VIDEO: 'चीतों से आया लंपी वायरस', कांग्रेस नेता ने नामीबिया को बताया नाइजीरिया, BJP ने घेरा
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने जानवरों में हो रहे लंपी बीमारी को लेकर बेतुका बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह लंपी वायरस वाली बीमारी नाइजीरिया में लंबे समय से चल रहा है। चीतों को वहीं से लाया गया है।
मुंबई, 03 अक्टूबर: महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने जानवरों में हो रहे लंपी बीमारी को लेकर बेतुका बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह लंपी वायरस वाली बीमारी नाइजीरिया में लंबे समय से चल रहा है। चीतों को वहीं से लाया गया है। बयान देते समय नाना पटोले नामीबिया की जगह नाइजीरिया बोल दिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर किसानों के नुकसान के लिए ऐसा किया है। नाना पटोले का कहना है कि चीते को लाने से यहां बीमारी और फैल गई है। केंद्र सरकार की यह सोची समझी साजिश है। जिससे किसानों को और परेशानी हो।

कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले की लंपी बीमारी वाली टिप्पणी पर महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने प्रतिक्रिया दी है। लोढ़ा ने कहा कि देश में कांग्रेस के हाल पर हर कोई हंस रहा है। चीता नाइजीरिया से नहीं बल्कि नामीबिया से लाए गए थे। इस तरह के बयान पर लोगों की हंसी आ रही है।
वहीं, इससे पहले लंपी रोग के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि इस बीमारी से पशुओं का नुकसान हुआ है। राज्य सरकारों के साथ मिलकर केंद्र सरकार इसे कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है। हमारे वैज्ञानिकों ने लंपी रोग की स्वदेशी वैक्सीन भी तैयार कर ली है।
उन्होंने कहा था कि भारत में हम पशुओं के यूनिवर्सल वैक्सीनेशन पर भी बल दे रहे हैं। हमने संकल्प लिया है कि 2025 तक हम शत प्रतिशत पशुओं को फुट एंड माउथ डिजीज और ब्रुसलॉसिस की वैक्सीन लगाएंगे। हम इस दशक के अंत तक इन बीमारियों से पूरी तरह से मुक्ति का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। हमारे पास भैंस और गायों की जो नस्ल है, वह कठिन समय में भी खुद को ढालती हैं। पीएम मोदी ने बन्नी भैंस के बारे में बताया कि गुजरात की बन्नी भैंस रात के कम तापमान में घास चरने के लिए निकलती है। क्योंकि गुजरात में दिन में भयंकर धूप होती है।
विदेश से आए मेहमान यह सुनकर चौंक जाएंगे कि रात में भैंस के साथ उनका पशुपालक नहीं होता है। ये बन्नी भैंस 15 किमी दूर चरते हुए निकल जाती हैं। सुबह होते ही वह घर पहुंच जाती हैं। पीएम ने कहा कि भारत, डेयरी पशुओं का सबसे बड़ा डेटाबेस तैयार कर रहा है। डेयरी सेक्टर से जुड़े हर पशु की टैगिंग हो रही है। आधुनिक टेक्नोल़ॉजी की मदद से हम पशुओं की बायोमीट्रिक पहचान कर रहे हैं। हमने इसे नाम दिया है- पशु आधार।
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