सीएनआर राव को भारत रत्न के फैसले के खिलाफ पीआईएल

CNR Rao
लखनऊ। भारतीय वैज्ञानिक डा. सीएनआर राव को भारत रत्‍न दिये जाने के फैसले के खिलाफ लखनऊ के दो छात्रों ने पीआईएल दाखिल की है। विधि छात्रा तन्‍या ठाकुर और कक्षा बारह के छात्र आदित्य ठाकुर ने डॉ सीएनआर राव को भारत रत्न दिए जाने के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में पीआईएल दायर की है।

याचिका के अनुसार भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है और इसे अत्यंत विचार-विमर्श के बाद ही किसी को दिया जाना चाहिए। भारत में जगदीश चन्द्र बोस, एस एन बोस, मेघनाद साहा, डॉ होमी भाभा, विक्रम साराभाई सहित अनेक ऐसे वैज्ञानिक हुए हैं जिनका विज्ञान के क्षेत्र में डॉ राव से कहीं अधिक और कहीं अत्यधिक स्थायी योगदान रहा है, जो ज्यादातर समय सरकार की निकटता के कारण विभिन्न सरकारी पदों पर काबिज रहे हैं।

डॉ राव ने कथित रूप से 1400 शोध पत्र लिखे हैं जो व्यवहारिक रूप से असंभव है, क्योंकि एक अच्छे और मौलिक शोधपत्र हेतु कम से कम 6 से 8 माह का समय लगता है। डॉ राव पर विदेशी जर्नल एडवांस मैटेरिअल में प्रकाशित एक लेख में अकादमिक चोरी के आरोप लगे जिस पर उन्होंने माफ़ी तक मांगी है। उन पर दिसंबर 2011 के जर्नल ऑफ़ ल्युमिनीसेन्स, जनवरी 2006 में एडवांस मैटेरिअल तथा 2010 में अप्लाइड फिजिक्स एक्सप्रेस में प्रकाशित लेखों में चोरी के स्पष्ट आरोप लगे हैं।

तनया और आदित्य ने निवेदन किया है कि अकादमिक चोरी के आरोप प्रमाणित हो चुके एक वैज्ञानिक को भारत रत्न का सर्वोच्च पुरस्कार नहीं दिया जा सकता और उन्होंने इस पुरस्कार के आदेश को निरस्त करने की मांग की है।

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