जानें आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे के बारे में सबकुछ, जिन्होंने संभाला 'चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी' का पदभार
जानें आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे के बारे में सबकुछ, जो बने 'चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी' के अध्यक्ष
नई दिल्ली, 16 दिसंबर: थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (एम. एम. नरवणे) ने ''चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी'' के अध्यक्ष का पदभार संभाला लिया है। इसमें देश के तीनों सेना के प्रमुख शामिल होते हैं। सेना के अधिकारियों ने ये जानकारी बुधवार (15 दिसंबर) को दी है। 08 दिसंबर को भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर हादसे में भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद से यह पद खाली हो गया था। सूत्रों के मुताबिक जनरल नरवणे के सबसे वरिष्ठ होने की वजह उन्हें कमेटी के अध्यक्ष का पदभार सौंपा गया है। बता दें कि सीडीएस पद के गठन से पहले देश में आमतौर पर सेनाओं के प्रमुखों में से सबसे वरिष्ठ को चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष का पदभार सौंपा जाता था। तो आइए मनोज मुकुंद नरवणे के बारे में?

आजादी के बाद देश के 28वें आर्मी चीफ हैं नरवणे
लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे वर्तमान में थल सेनाध्यक्ष हैं और ''चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी'' के अध्यक्ष भी हैं। नरवणे आजादी के बाद देश के 28वें आर्मी चीफ हैं। आर्मी चीफ से पहले लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे सेना के उप प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। उससे पहले नरवणे सेना की पूर्वी कमान का नेतृत्व कर रहे थे, जो चीन के साथ भारत की लगभग 4,000 किलोमीटर की सीमा की देखभाल करती है।

कई बड़ी मिशन का हिस्सा रह चुके हैं एम. एम. नरवणे
एम. एम. नरवण अपनी 39 वर्षों की सेवा में जम्मू और कश्मीर और पूर्वोत्तर में शांति, क्षेत्र और अत्यधिक सक्रिय आतंकवाद विरोधी वातावरण में कई कमांड और स्टाफ नियुक्तियों में काम किया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन और पूर्वी मोर्चे पर एक पैदल सेना ब्रिगेड की भी कमान संभाली है। वह श्रीलंका में भारतीय शांति सेना का भी हिस्सा थे और उन्होंने तीन साल तक म्यांमार में भारतीय दूतावास में भारत के रक्षा अताशे के रूप में काम किया था।
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NDA और IMA के पूर्व छात्र हैं जनरल नरवणे
लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी ( IMA) के पूर्व छात्र हैं। जनरल नरवणे को जून 1980 में सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की 7वीं बटालियन में कमीशन दिया गया था। जनरल एक सम्मानित अधिकारी हैं जिन्हें जम्मू और कश्मीर में अपनी बटालियन को प्रभावी ढंग से कमांड करने के लिए 'सेना मेडल' (प्रतिष्ठित) से सम्मानित किया गया है।
जनरल नरवणे नागालैंड में महानिरीक्षक असम राइफल्स (उत्तर) के रूप में अपनी सेवाओं के लिए 'विशिष्ट सेवा पदक' और एक प्रतिष्ठित स्ट्राइक कोर की कमान के लिए 'अति विशिष्ट सेवा पदक' भी ले चुके हैं।

CDS की रेस में सबसे आगे जनरल नरवणे का नाम
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के निधनके बाद सरकार जल्द ही अगले सीडीएस की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार कर रही है। इस रेस में सबसे सेना प्रमुख जनरल नरवणे का नाम सबसे आगे चल रहा है। कई सेवानिवृत्त सैन्य कमांडरों ने कहा है कि जनरल नरवणे को सीडीएस के पद पर नियुक्त करना विवेकपूर्ण कदम होगा।












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