LPG supply crisis: खत्म होगा गैस का संकट! 46,000 टन गैस लेकर भारत पहुंचा 'शिवालिक'
LPG tanker Shivalik Nanda Devi: ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की आहट और वैश्विक तनाव के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत और राहत भरी खबर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई सफल वार्ता के बाद, होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता भारतीय जहाजों के लिए खोल दिया गया है।
अब 46,000 टन एलपीजी से लदा भारतीय जहाज 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' भारतीय नौसेना के कड़े पहरे में सुरक्षित रूप से गुजरात तट की ओर बढ़ रहे हैं। युद्ध जैसे हालातों में भारत की यह 'एनर्जी सिक्योरिटी' न केवल रसोई गैस की किल्लत को खत्म करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत का प्रमाण भी है।

Strait of Hormuz Indian LPG tanker: होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता
ईरान ने इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत के साथ अपनी दोस्ती निभाई है। होर्मुज स्ट्रेट, जो दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल मार्गों में से एक है, वहां से भारतीय एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित निकलने की अनुमति दी गई है। ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहली ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के हित एक समान हैं, इसलिए युद्ध जैसी स्थिति के बावजूद भारतीय जहाजों को प्राथमिकता दी गई।
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Israel Iran War Tension Impact: जहाज 'शिवालिक' की घर वापसी
भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर 'शिवालिक' मौत के कुएं कहे जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर चुका है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना के जंगी जहाजों के सुरक्षा घेरे में 'शिवालिक' अब खुले समुद्र में है और तेजी से गुजरात के कांडला या मुंबई बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है।
उम्मीद है कि आज 46,000 टन गैस का खजाना भारत पहुंच जाएगा, जिससे देश में गहराते गैस संकट पर पूर्ण विराम लग जाएगा। मोदी सरकार की सफल कूटनीति ने युद्ध के बीच भी भारत की 'एनर्जी लाइफलाइन' को सुरक्षित बचा लिया है।
'नंदा देवी' और 46,000 टन गैस
भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 'नंदा देवी' जहाज एक बड़ी खेप लेकर आ रहा है। इस जहाज में 46,000 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लदी हुई है। इतनी भारी मात्रा में गैस की सुरक्षित आपूर्ति भारत की डोमेस्टिक सप्लाई चेन के लिए जीवनरेखा की तरह है। 'नंदा देवी' ने भी संवेदनशील समुद्री क्षेत्र को पार कर लिया है।
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मोदी-पेजेशकियन बातचीत का असर
इस सुरक्षित ट्रांजिट के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई 'हाई-लेवल' बातचीत का बड़ा हाथ है। इजराइल और अमेरिका के साथ जारी तनाव के बावजूद, दोनों नेताओं ने ऊर्जा प्रवाह और माल की सुरक्षित आवाजाही को लेकर चर्चा की थी। इसी संवाद का नतीजा है कि भारतीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिला।
भारतीय नौसेना का सुरक्षा कवच
भारतीय नौसेना इस पूरे ऑपरेशन में एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रही है। मिशन के तहत तैनात नौसैनिक जहाजों ने 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' को करीब से ट्रैक किया है। जब तक ये जहाज भारतीय सीमा में सुरक्षित प्रवेश नहीं कर जाते, तब तक नौसेना के अधिकारी लगातार निगरानी बनाए हुए हैं ताकि देश की ऊर्जा आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।












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