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बेंगलुरु चर्च स्ट्रीट धमाके के पीछे वन मैन आर्मी!

बेंगलुरु। लोन वोल्‍फ टेरर यानी आतंक का सामान और उसकी सोच से लैस एक ऐसा शख्‍स जिसमें अकेले ही किसी भी शहर या उस शहर के किसी हिस्‍से को हिलाने की ताकत होती है। उसे इसके लिए किसी भी बड़े संगठन के नाम की जरूरत ही नहीं होती है। रविवार को बेंगलुरु के चर्च स्‍ट्रीट में हुआ ब्‍लास्‍ट इस बात का साफ सुबूत है कि इस ब्‍लास्‍ट को किसी संगठन की जगह सिर्फ एक ही शख्‍स ने अंजाम दिया और शहर के लोगों में डर और दहशत का माहौल बनाने की सफल कोशिश तक कर डाली।

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कर्नाटक और लोन वोल्‍फ टेरर

  • बेंगलुरु का रहने वाला काफील अहमद लोन वोल्‍फ टेरर का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है।
  • काफील का किसी भी आतंकी संगठन के साथ कोई लेना देना नहीं था।
  • पश्‍चिम से निराश काफील ने खुद को चरमपंथी बनाया।
  • इसके लिए उसने इंटरनेट की मदद ली और बम तैयार किया।
  • इस बम की मदद से ही उसने ग्‍लास्‍गो एयरपोर्ट को उड़ाने की कोशिश की थी।
  • लोन वोल्‍फ टेरर के इसी तरह के कुछ उदाहरण लंदन सबवे और बोस्‍टन मैराथन बॉम्बिंग के दौरान देखने को मिले थे।
  • हाल ही में जब सिडनी की घटना हुई तो वह भी लोन वोल्‍फ टेरर का उदहारण बन गया।
  • इन सभी लोन वोल्‍फ टेरर एक्टिविटीज में आरोपियों ने ऑनलाइन मौजूद सभी मैटेरियल को पढ़ा, वीडियोज देखे और फिर बम तैयार किए।

क्‍यों आतंकी संगठनों की पहली पसंद

  • हाल ही में अल कायदा की ओर से अपील की गई है कि लोन वोल्‍व्‍स आतंकी हमलों में इजाफा करें।
  • यह साफ इशारा है कि आतंकी संगठन अब हाई प्रोफाइल लोकेशंस पर छिपकर काम करने में काफी कठिनाई हो रही है।
  • आतंकी संगठनों के बारे में इंटेलीजेंस काफी होती है और उनके सदस्‍यों पर नजरें बराबर बनी रहती हैं।
  • वहीं लोन वोल्‍फ सिर्फ एक अपार्टमेंट में बैठकर बिना किसी आतंकी संगठन की मदद से बम तक तैयार कर लेता है।
  • इस तरह की गतिविधियों में शामिल किसी भी व्‍यक्ति के बारे में जानकारी जुटा पाना काफी मुश्किल होता है।
  • वह चुपचाप खुद को किसी बड़ी गतिविधि के लिए तैयार करता रहता है।
  • वह एकदम से सामने आता है और किसी ब्‍लास्‍ट को अंजाम दे डालता है।

क्‍या किया था अमेरिका ने

अमेरिका का एक उदाहरण इसमें उनकी मदद कर सकता है। लोन वोल्‍फ के कांसेप्‍ट पर आगे बढ़ रहा था और जांच के केंद्र में सिर्फ एक व्‍यक्ति था न कि आउटफिट। आउटफिट के बारे में तब जांच की गई जब उसका कोई लिंक जांचकर्ताओं के हाथ आया।

अमेरिका ने जांच को शुरू करते समय व्‍यक्ति की प्रोफाइल तक तैयार कर ली थी। उन्‍होंने सारे फुटेज को इकट्ठा कर उसकी कॉल डिटेल्‍स का पता लगाया। साथ ही जांचकर्ताओं ने उसे पकड़ने से पहले सभी गवाहों से भी जानकारी हासिल की।

अमेरिका से सबक ले पुलिस

भारतीय पुलिस भी इस तरह से सुराग हासिल करने की कोशिश कर सकती है। वह एक व्‍यक्ति के बारे में पता लगाए न कि सिर्फ एक संगठन पर ही अपनी जांच को केंद्रीत करे। पुलिस को ध्‍यान रखना होगा कि अगर बॉम्‍बर के बारे में पता लग गया या फिर वह उसके हाथ आ गया तो फिर उसे इस बात का पता चल सकता है कि ब्‍लास्‍ट किसी संगठन ने कराए हैं या फिर यह सिर्फ एक व्‍यक्ति की साजिश है।

पुलिस संगठन के पीछे

इसके बावजूद रविवार को हुए ब्‍लास्‍ट में लगी एजेंसियां बस किसी न किसी संगठन पर इसकी जिम्‍मेदारी डाल रहे हैं लेकिन उनका ध्‍यान शायद इस ओर जा ही नहीं रहा है कि इस ब्‍लास्‍ट को संगठन ने नहीं बल्कि लोन वोल्‍फ टेरर या फिर 'वन मैन आर्मी' की ओर से अंजाम दिया गया हो सकता है।

ब्‍लास्‍ट की जांच कर रही पुलिस ने इसकी जिम्‍मेदारी अल उम्‍माह, सिमी और इंडियन मुजाहिद्दीन पर डाल दी है। यह तीनों ही पूरी तरह से संगठित आतंकी समूह हैं जो इस तरह के ब्‍लास्‍ट को अंजाम देने में आगे रहते हैं।

जबकि हकीकत पर अगर गौर करें तो आज के समय में किसी भी संगठन की कोई खास स्‍टाइल है ही नहीं बल्कि वह ऑनलाइन पढ़कर ही सारी जानकारी हासिल कर लेते हैं।

पुलिस को अब तक ब्‍लास्‍ट करने वाले आरोपियों की प्रोफाइल तैयार कर लेनी चाहिए। पुलिस किसी संगठन की ब्‍लास्‍ट के पीछे जिम्‍मेदारी के बारे में जांच जरूर करे लेकिन उसे लोन वोल्‍फ की ओर से भी जांच का रुख मोड़ना चाहिए।

क्‍या यह नौसिखए का काम था

चर्च स्‍ट्रीट में हुआ धमाका लोन वोल्‍फ टेरर एक्टिविटी इसलिए भी हो सकता है क्‍योंकि अगर आरोपी को इसके जरिए कोई संदेश देना होता तो वह ब्‍लास्‍ट के बाद जरूर किसी न किसी तरह से कम्‍यूनिकेट करता। जिस अंदाज में ब्‍लास्‍ट के लिए बम को तैयार किया गया, उससे साफ पता लगता है कि आरोपी पूरी तरह से नौसिखिया था जिसने ऑनलाइन टिप्‍स लिए थे।

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