दादी और मां की तरह राहुल भी चले दक्षिण की ओर, क्या मिलेगा कांग्रेस को फायदा?

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस बार अमेठी संसदीय सीट के साथ-साथ केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं, वैसे राहुल गांधी 'गांधी परिवार' के पहले शख्स नहीं है जो दक्षिण के रण में उतर रहे हैं बल्कि उनसे पहले उनकी मां दादी इंदिरा गांधी और मां सोनिया गांधी भी दक्षिण भारत से चुनाव लड़ चुकी हैं और दोनों को इसमें जीत भी हासिल हुई थी लेकिन क्या यह इतिहास राहुल गांधी भी दोहरा पाएंगे, इसका उत्तर तो 23 मई को मिलेगा, जिस दिन चुनावी नतीजे आएंगे।

 दादी इंदिरा ने लड़ा था चिकमंगलूर से उपचुनाव

दादी इंदिरा ने लड़ा था चिकमंगलूर से उपचुनाव

साल 1977 में देश की पूर्व प्रधानमंत्री और राहुल गांधी की दादी इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव हार गई थीं, इसके बाद साल 1978 में इंदिरा ने कर्नाटक की चिकमंगलूर लोकसभा सीट से उपचुनाव चुनाव लड़ा था जिसमें उन्हें जीत मिली थी, इसके बाद देश में कांग्रेस विरोधी हालात सुधरे थे और साल 1980 में कांग्रेस इस राज्य की सभी 27 संसदीय सीटें जीतने में कामयाब रही थी, उस साल भी इंदिरा ने रायबरेली के साथ-साथ आंध्र प्रदेश की मेडक सीट से विजय हासिल की थी।

मां सोनिया ने भी लड़ा था बेल्लारी से चुनाव

मां सोनिया ने भी लड़ा था बेल्लारी से चुनाव

राहुल गांधी की मां और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने भी साल 1999 के लोकसभा चुनाव में अमेठी के साथ-साथ कर्नाटक की बेल्लारी संसदीय से चुनाव मैदान में किस्मत आजमाई थी, सोनिया ने बेल्लारी में बीजेपी की सुषमा स्वराज को भारी मतों से पराजित किया था। सोनिया ने इसी साल अमेठी से भी चुनाव जीता था इसलिए उन्होंने बाद में बेल्लारी संसदीय सीट से इस्तीफा दे दिया था।

यह है वायनाड सीट का इतिहास

यह है वायनाड सीट का इतिहास

अब अपनी मां और दादी की तर्ज पर राहुल गांधी ने अमेठी के साथ-साथ केरल की वायनाड सीट को भी चुना है, वायनाड केरल की 20 लोकसभा सीटों में से एक है, यहां कुल सात विधानसभा की सीटें हैं, यहां पर कांग्रेस के नेता एमआई शानवास सांसद थे जिनका पिछले वर्ष निधन हो गया, जिसके बाद से यह सीट खाली है। वैसे आपको बता दें कि वायनाड में कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 100 फीसदी है।

कौन थे शानवास

कौन थे शानवास

शानवास पेशे से बिजनेसमैन थे और उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट तक की पढ़ाई की थी।यहां के सांसद एमआई शनवास ने पिछले लोकसभा चुनाव में सीपीआई के नेता सत्यन मोकरी को हराया था। शनवास को यहां 41.21 फीसदी यानि 377035 मत हासिल हुए थे, जबकि सीपीआई के उम्मीदवार सत्यन मोकरी को 38.91 फीसदी यानि 365165 मत हासिल हुए थे। जबकि तीसरे पायदान पर रहने वाले भाजपा उम्मीदवार पीआर रश्मिलनाथ को 80752 यानि 8.83 फीसदी वोट हासिल हुए थे। सांसद एमआई शनवास की बात करें तो उन्होंने संसद में कुल 231 सवाल पूछे और उनकी उपस्थिति 68 फीसदी रही थी। साथ ही शनवास ने कुल 46 बहस में हिस्सा लिया। शानवास का 67 वर्ष की उम्र में 21 नवंबर 2018 को निधन हो गया था।

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