Lok Sabha Election: मंदिर जाने वालों और न जाने वालों के बीच एक दशक में BJP की लोकप्रियता बढ़ी, आंकड़ों में समझे
Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 के अब कुछ महीने ही शेष रह गए हैं। बीजेपी अपनी पूरी ताकत झोंकने में जुटी है। वहीं, विपक्षी गुट 'इंडिया' अपने दलों के बीच मनमुटाव की उलझनों में उलझा हुआ है। बीजेपी इस मौके को पूरी तरह भुनाने में लगी है। इस बीच, रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा बीजेपी के लिए एक सुनहरे मौके से कम नहीं है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि केंद्र में बैठी बीजेपी सत्ता को इससे लाभ मिलना तय माना जा रहा है। विकासशील समाजों के अध्ययन के लिए केंद्र (CSDS) से जारी आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी हद तक साफ है। एक दशक में बढ़ी बीजेपी की लोकप्रियता...

पिछले कुछ सालों में भारत में बीजेपी समर्थकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह वृद्धि विशेष रूप से उन लोगों में स्पष्ट है, जो नियमित रूप से मंदिरों में जाते हैं और उनमें भी जो नहीं जाते हैं। आंकड़े बताते हैं कि रोजाना मंदिर जाने वालों के बीच बीजेपी का समर्थन 2009 में 28 फीसदी से बढ़कर 2019 में 51 फीसदी हो गया। इसी तरह, नियमित मंदिर जाने वालों के बीच बीजेपी की लोकप्रियता भी 2009 में 24 फीसदी से बढ़कर 2019 में 43 फीसदी हो गई।
दिलचस्प बात यह है कि पार्टी उन लोगों के बीच अपने मतदाता आधार का विस्तार करने में कामयाब रहे, जिन्होंने कहा कि वे कभी भी मंदिरों में नहीं जाते हैं। 2009 में 17 फीसदी से बढ़कर 2019 में 39 फीसदी हो गया। इस एक दशक की अवधि में बीजेपी की लोकप्रियता में वृद्धि, जैसा कि इन आंकड़ों से पता चलता है, यह समाज के विभिन्न वर्गों के बीच पार्टी की सफल पहुंच और स्वीकार्यता का संकेत है। भले ही उनका धार्मिक झुकाव कुछ भी हो।
एक नजर में समझें
- 2009 में मंदिर रोजाना 28 फीसदी, नियमित रूप से 24 फीसदी, शायद ही कभी 18 फीसदी और कभी नहीं वालों में 17 फीसदी
- 2014 में मंदिर रोजाना 45 फीसदी, नियमित रूप से 38 फीसदी, शायद ही कभी 32 फीसदी और कभी नहीं वालों में 27 फीसदी
- 2019 में मंदिर रोजाना 51 फीसदी, नियमित रूप से 43 फीसदी, शायद ही कभी 42 फीसदी और कभी नहीं वालों में 39 फीसदी












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