Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

नरेंद्र मोदी से नफरत और मुहब्‍बत दोनों करते रहे नीतीश कुमार, अब जाकर बने 'हमसफर'

नई दिल्‍ली। बात मई 2009 की है, चुनाव प्रचार अपने चरम पर था। लुधियाना में राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की महारैली आयोजित की गई। महारैली इसलिए, क्‍योंकि इसमें एनडीए के करीब-करीब सभी बड़े नेता शिरकत करने आए। तब एनडीए के दो मुख्‍यमंत्रियों की हाथ में हाथ पकड़े एक तस्‍वीर अखबारों के पहले पन्‍ने पर छपी। इनके नाम हैं- नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी। बिहार और गुजरात के मुख्‍यमंत्रियों की यही तस्‍वीर आगे चलकर एनडीए में टूट का बड़ा कारण बनी। हालांकि, कैमरामैन ने तस्‍वीर बड़ी ही खूबसूरत खींची थी, लेकिन इस तस्‍वीर से जो संदेश निकला वह नीतीश कुमार को रास नहीं आया। पूरा किस्‍सा क्‍यों और कैसे हुआ इसका जिक्र भी करेंगे, लेकिन लुधियाना की उस महारैली का जिक्र आज हम इसलिए कर रहे हैं, क्‍योंकि बिहार में जल्‍द ही एक और महारैली होने वाली है। 2009 के दो सीएम में से एक यानी नरेंद्र मोदी अब पीएम हैं और जिस मुख्‍यमंत्री के साथ उन्‍हें स्‍टेज शेयर करना है, उनका नाम है- नीतीश कुमार।

नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी इश्‍क तो करते रहे, पर जमाने से कहने से डरते रहे

नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी इश्‍क तो करते रहे, पर जमाने से कहने से डरते रहे

2019 लोकसभा चुनाव से पहले होने जा रही इस मेगा रैली में नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार पहली बार साथ नजर आने वाले हैं। पीएम मोदी और नीतीश कुमार के बीच रिश्‍ता बड़ा उतार-चढ़ाव वाला रहा है, लेकिन अब मेगा रैली में दोनों जब साथ आ रहे हैं, तो यह कहा जाता जा सकता है कि दोनों के रिश्‍तों का यह सबसे स्‍वर्णिम काल है। पीएम मोदी और नीतीश कुमार का रिश्‍ता अब तक कुछ इस तरह कहा जा सकता है- 'इश्‍क तो करते हैं, पर जमाने से कहने से डरते हैं', लेकिन अब वक्‍त बदला है और 'इजहार ए मोहब्‍ब्‍त' भी खुलकर हो रहा है। अब तक इश्‍क छिपाने की वजह यह थी कि 2002 में गुजरात दंगों की वजह से नीतीश कुमार को हमेशा यह डर रहा कि कहीं नरेंद्र मोदी की वजह से उनकी सेक्‍युलर सियासत पर असर न पड़ जाए। हालांकि, नरेंद्र मोदी की तारीफ में कसीदे उन्‍होंने तब भी पडे़। 2003 में गुजरात में एक कार्यक्रम में शामिल होने गए नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी के भीतर राष्‍ट्रीय नेता बनने की संभावनाएं देख ली थीं। नीतीश कुमार ने उस कार्यक्रम में गुजरात दंगों को भुलाने की अपील तक कर डाली थी।

नरेंद्र मोदी के साथ लुधियाना वाली तस्‍वीर अखबार में देखकर आगबबूला हो गए थे नीतीश

नरेंद्र मोदी के साथ लुधियाना वाली तस्‍वीर अखबार में देखकर आगबबूला हो गए थे नीतीश

2003 गुजरात जाकर नरेंद्र मोदी में राष्‍ट्रीय नेता बनने की संभावनाओं की बात करने वाले नीतीश कुमार ने 2010 में नरेंद्र मोदी को प्रचार में बिहार न बुलाने की गुजारिश की थी। गठबंधन धर्म का ख्‍याल रखते हुए बीजेपी शीर्ष नेतृत्‍व ने नीतीश कुमार की मांग को स्‍वीकार भी कर लिया था। किस्‍सा जून 2010 का है, पटना में बीजेपी राष्‍ट्रीय कार्यकारिणाी बैठक होने वाली थी। इस मीटिंग से कुछ दिन पहले अखबारों में एक विज्ञापन छपा। दैनिक जागरण और हिंदुस्‍तान, बिहार के दो सबसे लोकप्रिय हिंदी अखबारों में छपे इस विज्ञापन को देखकर नीतीश कुमार की मॉर्निंग टी का स्‍वाद बिगड़ गया था। विज्ञापन में लुधियाना की वही तस्‍वीर छपी थी, जिसमें नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार का हाथ अपने हाथों में पकड़ा था और विज्ञापन में जिक्र था उस 5 करोड़ की आर्थिक मदद का जो कोसी बाढ़ पीडि़तों के लिए गुजरात सरकार की ओर से बिहार सरकार को दी गई थी। मतलब नरेंद्र मोदी की सरकार की ओर से नीतीश कुमार की सरकार को आर्थिक सहायता दी गई थी, जिसे विज्ञापन में छपवाया गया था। नीतीश कुमार को यह विज्ञापन नागवार गुजरा, जिसे बीजेपी की लोकल यूनिट ने छपवाया था। गुस्‍से से भरे नीतीश कुमार ने बीजेपी नेताओं के साथ डिनर कैंसिल कर दिया। साथ ही नरेंद्र मोदी को बिहार चुनाव प्रचार के लिए आने से मना करवाया।

इस तरह एनडीए से अलग चले गए नीतीश कुमार

इस तरह एनडीए से अलग चले गए नीतीश कुमार

यहां से नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के रिश्‍तों में तल्‍खी आ गई थी। नीतीश कुमार को यह बात नागवार गुजरी कि सिर्फ 5 करोड़ की मदद देकर अखबारों में इस तरह विज्ञापन छपवाया गया। परिणाम यह हुआ कि नीतीश कुमार न केवल डिनर कैंसिल किया और नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार में नहीं आने दिया बल्कि वह पांच करोड़ का चेक भी लौटा दिया। कुछ समय और बीता, नीतीश कुमार एनडीए में बने रहे, लेकिन नरेंद्र मोदी के साथ तल्‍खी कम नहीं हुई। वजह दो थीं- पहली मोदी के साथ छपी वह लुधियाना वाली फोटो जेडीयू के सेक्‍युलर वोट पर प्रहार कर रही थी। दूसरी वजह यह थी कि आर्थिक मदद देकर अखबार में छपवाना नीतीश कुमार को ऐसा लगा मानो मोदी ने बिहार का मखौल उड़ाया। रिश्‍तों पर जमी बर्फ इधर पिघली भी नहीं थी कि 2013 में नरेंद्र मोदी चौथी बार गुजरात के सीएम चुनकर आ गए। उधर, लाल कृष्‍ण आडवाणी के नेतृत्‍व में 2009 का चुनाव हार चुकी बीजेपी ने आडवाणी के ही परम शिष्‍य नरेंद्र मोदी को पीएम पद का दावेदार बनाकर मैदान में उतारने का फैसला कर लिया। गोवा में नरेंद्र मोदी के नाम का ऐलान होते ही नीतीश कुमार के जख्‍म हरे हो गए और वह एनडीए से अलग चले गए।

2014 और 2015 में आमने-सामने आए नरेंद्र मोदी और नीतीश, एक-एक ही बराबरी पर रहा मुकाबला

2014 और 2015 में आमने-सामने आए नरेंद्र मोदी और नीतीश, एक-एक ही बराबरी पर रहा मुकाबला

2014 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी के प्रतिद्वंद्वी नंबर वन की भूमिका निभाई। परिणाम आए और करीब-करीब पूरे उत्‍तर भारत में क्षेत्रीय पार्टियां शून्‍य में समा गईं। नीतीश कुमार की जेडीयू, लालू यादव की आरजेडी, उत्‍तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, मायावती की बसपा सभी ने मोदी लहर की कीमत अपनी जमीन गंवाकर चुकाई। 2014 लोकसभा चुनाव के बाद मोदी का विजय रथ चलता रहा और 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज गई। नरेंद्र मोदी के अश्‍वमेघ को रोकने के लिए नीतीश कुमार ने लालू यादव और कांग्रेस के साथ मिलकर जबर्दस्‍त व्‍यूह रचना की और 'बिहार के डीएनए' के नाम पर नरेंद्र मोदी को बाहरी बताने में सफल रहे। मोदी का विजयी रथ आखिरकार बिहार में रोक दिया गया। महागठबंधन सत्‍ता में आया और लालू के दो लाल- तेज प्रताप व तेजस्‍वी चाचा नीतीश कुमार के दो हाथ बने। कुछ समय सब ठीक चला, लेकिन लालू यादव एक के बाद एक चारा घोटाले मामलों में ऐसे फंसे कि नीतीश कुमार की सुशासन बाबू की छवि दागदार होने लगी। हारकर नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी के साथ जाने का फैसला कर लिया और एनडीए में घरवापसी कर ली।

इस तरह नरेंद्र मोदी के सामने डटे रहे नीतीश कुमार, अब बराबरी पर करेंगे स्‍टेज शेयर

इस तरह नरेंद्र मोदी के सामने डटे रहे नीतीश कुमार, अब बराबरी पर करेंगे स्‍टेज शेयर

एनडीए में नीतीश कुमार ने वापसी तो कर ली, लेकिन प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्‍ता में बैठी बीजेपी से उसे पहले जैसा सम्‍मान नहीं मिला। नीतीश कुमार सही समय का इंतजार करते। पहले कई उपचुनावों में हार और उसके बाद कर्नाटक, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में बीजेपी की हार के बाद नीतीश कुमार ने बिहार में बराबरी की दोस्‍ती कर 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के बराबर सीटों पर सम्‍मान समझौता कर लिया। अगला लोकसभा चुनाव बीजेपी और जेडीयू बराबर सीटों पर लड़ेंगे। इस तरह नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी के सामने लगातार चुनौती पेश कर उन्‍हें यह बता दिया कि भले ही वह प्रधानमंत्री पद की दौड़ में पिछड़ गए हों, लेकिन राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं। वह अगर नरेंद्र मोदी के साथ स्‍टेज शेयर करेंगे तो बराबरी पर, न थोड़ा कम न थोड़ा ज्‍यादा। नीतीश कुमार जानते हैं कि 2019 में बीजेपी को उनकी जरूरत पड़ेगी, यही कारण रहा कि महीनों तक वह अमित शाह के साथ सीट बंटवारे पर बराबर की सीटों पर अडिग रहे। राजनीति में किस मोड़ पर जाकर हवा का रुख बदलेगा, नीतीश कुमार को इस बात का भलि-भांति अंदाजा है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+