लोकसभा में पारित हुआ भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद संशोधन विधेयक
नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद संशोधन विधेयक 2018 को मंजूरी दे दी जिसका मकसद आयुर्विज्ञान शिक्षा और आयुर्विज्ञान व्यवसाय की विनियामक प्रणाली की पुन: संरचना एवं भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद में सुधार लाना है। सदन ने संक्षिप्त चर्चा के बाद 'भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (संशोधन) विधेयक-2018' को पारित कर दिया। सरकार इसी को लेकर पहले अध्यादेश लाई थी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा ने कहा कि आयुर्विज्ञान चिकित्सा व्यवस्था के बेहतर नियमन तथा चिकित्सा शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए अध्यादेश लाया गया था और अब यह विधेयक लाया गया है।

विधेयक पर चर्चा के बाद मंत्री ने कहा कि एमसीआई की कार्यपद्धति को लेकर पहले खुद विपक्ष के सदस्य ही सवाल उठाते थे। उन्होंने कहा कि इस संस्था से जुड़ी निगरानी समिति ने इस्तीफा दे दिया था और ऐसे में पूरा काम रुख गया था। ऐसे में अध्यादेश लाना पड़ाा।मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य मामलों से संबंधित संसदीय समिति ने भी सिफारिश की थी कि एमसीआई की कार्यपद्धति में सुधार के लिए बदलाव किए जाएं। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने एन के प्रेमचंद्रन के सांविधिक संकल्प को नामंजूर करते हुए विधेयक को मंजूरी दे दी ।
आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने राष्ट्रपति द्वारा 26 सितंबर 2018 को प्रख्यापित भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद संशोधन अध्यादेश का निरानुमोदन करने का सांविधिक संकल्प प्रस्तुत किया था । प्रेमचंद्रन ने कहा कि सरकार की ओर से अध्यादेश लाने का कोई उचित कारण नहीं था और उसका यह कदम कानूनन और अनैतिक भी है। उन्होंने सवाल किया कि एमसीआई में बदलाव के लिए सरकार ने तीन साल तक प्रतीक्षा क्यों की? तृणमूल कांग्रेस की ममता सिंह ने भी अध्यादेश लाए जाने का विरोध करते हुए कहा कि आखिर क्या आपात स्थिति आ गई थी कि सरकार को यह कदम उठाना पड़ा।












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