Lok Sabha Election 2024: पांच 'भारत रत्न' से मोदी सरकार ने कैसे दिए 5 सियासी संदेश, समझिए
Bharat Ratna 2024 Winners List: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की ओर से एक ही साल में पांच शख्सियतों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने की घोषणा करना किसी चुनावी वर्ष के लिए निश्चित तौर पर मास्टरस्ट्रोक से कम नहीं है।
खास बात ये है कि इसके लिए जिन शख्सियतों को चुना गया है, उनमें से कम से कम तीन तो ऐसे हैं, जिससे सीधे चुनावी समीकरण प्रभावित होने की संभावना है।

पांचों शख्सियतों का देश के लिए अनमोल योगदान
लेकिन, दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट है कि इनमें से एक भी नाम ऐसा नहीं लगता, जो सिर्फ राजनीति की वजह से चुना गया हो। क्योंकि, सबका देश के लिए अपने स्तर पर योगदान अनमोल रहा है।
कर्पूरी ठाकुर: पिछड़ा क्रांति के जनक
मोदी सरकार ने इस साल सबसे पहले समाजवाद के प्रतीक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुल को 'भारत रत्न' देने का एलान किया है। उन्हें मरणोप्रांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की घोषणा उस दिन हुई, जिसके अगले दिन उनका जन्म शताब्दी वर्ष आने वाला था।
कर्पूरी ठाकुर ओबीसी की राजनीति में अति पिछड़ा और आरक्षण क्रांति के जनक माने जाते हैं। मोदी सरकार ने उन्हें यह सम्मान तब देने का फैसला किया, जब बिहार में जाति जनगणना करवा कर तत्कालीन महागठबंधन सरकार अपनी पीठ थपथपा रही थी और जिसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी पूरे देश में करवाने की मांग कर रहे हैं।
बिहार की राजनीति में इसका एक तात्कालिक प्रभाव तो यही देखने को मिला की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अपने जेडीयू के साथ वापस एनडीए में वापसी का रास्ता ज्यादा आसान हो गया।
लालकृष्ण आडवाणी: हिंदुत्व क्रांति के अगुवा
भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री और पूर्व गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी पिछले दशकों से देश में हिंदुत्व की राजनीति के प्रतीक बन चुके हैं।
पिछली शताब्दी में राम मंदिर आंदोलन के लिए उनकी राम रथ यात्रा ने देश की राजनीति की तस्वीर हमेशा के लिए बदलने का काम किया था।
उन्होंने राम मंदिर आंदोलन की जो बुनियाद रखी थी, उसकी नींव पर आज अयोध्या में पवित्र राम जन्मभूमि पर भगवान राम राम लला का भव्य और दिव्य मंदिर स्थापित हो चुका है। जिस वर्ष यहां प्राण प्रतिष्ठा हुई है, उसी साल उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा, हिंदुत्व की राजनीति के लिए बहुत बड़ा संदेश है।
चौधरी चरण सिंह: किसान क्रांति के अगुवा
देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पहचान आज भी किसान नेता के तौर पर बनी हुई है। उन्हें भारत रत्न देकर साफ तौर पर यह संदेश देने की कोशिश हुई है कि यह सरकार किसानों का सम्मान करती है।
खास बात ये है कि कर्पूरी ठाकुर और आडवाणी की तरह चरण सिंह भी देश में कांग्रेस-विरोधी राजनीति के लिए जाने जाते हैं और आपातकाल के खिलाफ चले आंदोलन की अपने-अपने स्तर पर अगुवाई कर चुके हैं।
ऐसे में चरण सिंह को मरणोपरांत भारत रत्न देने की घोषणा करके मोदी सरकार ने न सिर्फ भारत के किसानों को साधने की कोशिश की है, बल्कि पश्चिमी यूपी से लेकर दिल्ली के सारे पड़ोसी राज्यों में मौजूद जाट मतदाताओं को भी चुनावी साल में अच्छी खबर देने का प्रयास किया है।
बड़ी बात ये है कि यह घोषणा ऐसे समय में हुई जब चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी को बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए में शामिल करने की अटकलें लग रही हैं।
पीवी नरसिम्हा राव: आर्थिक क्रांति के जनक
मोदी सरकार ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पीवी नरसिम्हा राव को मरणोपरांत 'भारत रत्न' देने की घोषणा करके एक तरह से कांग्रेस को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है।
राजनीतिक रूप से कोई राव से सहमत हो या न हो, लेकिन देश में आर्थिक क्रांति और उदारीकरण लाने में उन्होंने जिस नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया था, वह इतिहास में दर्ज हो चुका है। अगर उदारीकरण के पीछे पूर्व पीएम डॉक्टर मनमोहन सिंह का दिमाग था तो उसका कंट्रोल राव के पास था।
कांग्रेस में रहते हुए राव के लिए पार्टी में आखिरी वक्त में सबकुछ ठीक नहीं रहा था। कहा जाता है कि बाद के समय में उनका गांधी परिवार से तालमेल नहीं बैठ पा रहा था।
मोदी सरकार ने उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देकर एक तरफ विकसित भारत में उनके नेतृत्व के योगदान को सम्मान देने की कोशिश की है तो लगे हाथ विपक्षी कांग्रेस के लिए भी असहज स्थिति बना दी है।
एमएस स्वामिनाथन- कृषि क्रांति के जनक
भारत में हरित क्रांति के जनक डॉ एमएस स्वामिनाथन को मरणोपरांत 'भारत रत्न' देकर मोदी सरकार ने उनका नहीं, बल्कि देश की 140 करोड़ जनता और उनमें भी खासकर कृषि और किसानों को सम्मान देने का काम किया है।
देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए डॉक्टर स्वामिनाथन से फिट शख्सियत कौन हो सकता है, जिनके दम पर आज भारत न सिर्फ खाद्यान के मामले में आत्मनिर्भर है, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों को भी भूख से उबारने का दम रखता है।
अगर आज देश में खाद्य सुरक्षा और समृद्धि आई है तो इसमें उनका अनमोल योगदान है। कृषि वैज्ञानिक स्वामिनाथन का पिछले साल 28 सितंबर, 2023 को 98 साल की उम्र में निधन हुआ था।
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