कर्नाटक में सभी 28 सीटें जीतने के बीजेपी के लक्ष्य के बाद, चुनाव लड़ने से क्यों भाग रहे हैं कांग्रेसी दिग्गज?

भाजपा को लोकसभा की 370 सीटों पर जीत का लक्ष्य हासिल करने के लिए कर्नाटक से काफी उम्मीदें हैं। 2019 में पार्टी को अकेले 25 सीटें मिली थी और एक पर उसके समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। इसलिए अबकी बार राज्य में पार्टी ने सभी 28 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी वहां कांग्रेस और जेडीएस की गठबंधन वाली सरकार थी। दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था और फिर भी उन्हें एक-एक सीटों से ही संतोष करना पड़ा था।

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मंत्रियों को चुनाव लड़ाने की तैयारी में कांग्रेस
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने लोकसभा चुनाव में अब पार्टी को 20 सीटें मिलने का अनुमान जताया है। इस लक्ष्य को जीतने के लिए उन्होंने अपने मंत्रियों से भी कहा है कि अगर पार्टी उन्हें टिकट देती है, तो लोकसभा चुनावों में भी भाग्य आजमाने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

कांग्रेसी दिग्गज चुनाव लड़ने से कर रहे हैं इनकार
दरअसल, हकीकत ये है कि कांग्रेस के कुछ दिग्गज लोकसभा चुनाव लड़ने से साफ तौर पर कतरा रहे हैं। मसलन, कांग्रेस सरकार में सामाजिक कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा ने सार्वजनिक तौर पर खुद के चुनाव लड़ने की संभावनाओं से स्पष्ट इनकार कर दिया है।

मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने पार्टी नेताओं को दी हिदायत
इसके बाद सीएम सिद्दारमैया को एक तरह से हिदायत देनी पड़ी है कि अगर स्थानीय एमएलए या विधानसभा चुनाव में हारे हुए पार्टी प्रत्याशी या ब्लॉक और जिलाध्यक्षों की ओर से किसी भी मंत्री के नाम का प्रस्ताव लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए आता है तो उनके पास चुनाव लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।

मंत्री ने कहा कि सीएम,डिप्टी सीएम खुद लड़ लें चुनाव
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस रुख से उन मंत्रियों और कांग्रेसी दिग्गजों की चिंताएं बढ़ गई हैं, जो लोकसभा चुनाव लड़ने से कन्नी काट रहे हैं।

दरअसल, शनिवार को जब मीडिया वालों ने महादेवप्पा से कहा था कि पार्टी के एक सर्वे से पता चला है कि उनका नाम संभावित उम्मीदवार के तौर पर सामने आ रहा है, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा दिया था कि वे चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं।

उनकी प्रतिक्रिया से साफ जाहिर हो गया कि वह इस तरह के प्रस्ताव से पूरी तरह से नाखुश हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि सर्वे में संभवत: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का भी नाम होना चाहिए, क्योंकि वे भी सक्षम और लोकप्रिय नेता हैं।

कांग्रेस भाजपा के लक्ष्य का उड़ा रही है मजाक
वैसे रविवार को सिद्दारमैया ने एक बार फिर दावा किया कि कांग्रेस पार्टी ने जिस तरह से राज्य में चुनावी गारंटियों को लागू किया है और बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की घोषणाएं की हैं, उससे पार्टी कम से कम 20 सीटें जरूर जीतेगी।

उन्होंने कहा, 'भाजपा सभी 28 सीटें जीतने का ढिंढोरा पीट रही है....उन्हें पता है कि जनता इस बार भी कांग्रेस को आशीर्वाद देगी। इसलिए वे झूठ का पुलिंदा लेकर आ रहे हैं।'

28 सीट और हर बूथ पर 10% ज्यादा वोट है बीजेपी का टारगेट
इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कर्नाटक में पार्टी नेताओं को अबकी बार सभी 28 सीटें जीतने का टारगेट दिया है। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों के मुकाबले प्रदेश के सभी बूथों पर पार्टी का वोट शेयर 10% बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा है।

इस समीकरण की वजह से बीजेपी को है लक्ष्य हासिल करने की उम्मीद
भाजपा का लक्ष्य इस समीकरण पर आधारित है कि इस बार उसने जेडीएस के साथ गठबंधन कर लिया है। पिछले लोकसभा चुनाव में कर्नाटक में बीजेपी को करीब 52% वोट मिले थे। वहीं गठबंधन में लड़ी कांग्रेस को 32% और जेडीएस को करीब 10% वोट मिले थे।

अबकी बार यह गणित बदल चुका है और जेडीएस के एनडीए में आ जाने से भाजपा का गणित ज्यादा मजबूत लग रहा है। इसके अलावा पिछली बार कर्नाटक के मतदाताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर वोट दिया था, इसलिए शायद बीजेपी को अपना टारेगट पूरा कर लेने का अधिक यकीन है।

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