Lok Sabha Election: कांग्रेस के घोषणा पत्र में इस बार अलग क्या होगा? इन 5 वादों पर रह सकता है फोकस
लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस पार्टी ने पिछले साल दिसंबर में ही पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की अगुवाई में मेनिफेस्टो कमेटी गठित कर दी थी। कांग्रेस पार्टी इस बार अपने नेता राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' की थीम पर ही 'न्याय संकल्प पत्र' के नाम से घोषणा पत्र मतदाताओं के सामने लाने की तैयारी में है।
माना जा रहा है कि न सिर्फ कांग्रेस पार्टी का मेनिफेस्टो इस बार राहुल की यात्रा से प्रभावित होगा, बल्कि पार्टी से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे साफ है कि इसपर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की सोच का भी पूरी तरह से असर दिखेगा।

कांग्रेस के मेनिफेस्टो पर दिखेगा राहुल की सोच का असर!
2019 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद राहुल गांधी ने भले ही कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ दिया था, लेकिन पार्टी उनके प्रभाव से कभी दूर नहीं हो पायी।
इसलिए इस बात की पूरी संभावना है कि कांग्रेस आम चुनावों के लिए जो घोषणा पत्र तैयार कर रही है, उसमें उनकी सोच को निश्चित तौर से जगह मिलेगी। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की ओर से इसके लिए जो कवायद कर रही है, उससे भी यही बात निकलकर आई है।
जातिगत जनगणना
पिछले साल 2 अक्टूबर को बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट जारी होन के बाद से इस मुद्दे को राहुल गांधी पूरी तरह से लपक चुके हैं। वह मणिपुर से मुंबई तक की जो भारत जोड़ो न्याय यात्रा लेकर निकले हुए हैं, उसमें जाति की गिनती उनके भाषणों का सबसे प्रमुख विषय बना हुआ है।
इसलिए, माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी की मेनिफेस्टो कमेटी जो घोषणा पत्र तैयार कर रही है, उसमें जाति आधारित जनगणना उसके सबसे प्रमुख वादे के रूप में शामिल हो सकती है।
पार्टी जाति जनगणना के बाद आरक्षण की सुप्रीम कोर्ट से निर्धारित सीमा को बढ़ाने जैसे वादे भी कर सकती है। क्योंकि, राहुल गांधी, 'जितनी आबादी, उतना हक' जैसे नारे दे चुके हैं।
एमएसपी की कानूनी गारंटी
पंजाब के किसानों ने इसी महीने से सभी फसलों पर एमएसपी को काननूी गारंटी देने की मांग को लेकर जिस तरह से आंदोलन शुरू किया है और उसपर कांग्रेस पार्टी की जो प्रतिक्रिया रही है, उससे यह साफ है कि पार्टी इसे घोषणा पत्र का हिस्सा जरूर बनाएगी।
पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अभी से वादा कर रहा है कि उनकी सरकार बनी तो किसानों की सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देकर खरीदने का कानूनी प्रावधान बनाएगी। पार्टी के घोषणापत्र में किसानों की अन्य मांगों को भी अहमियत दी जा सकती है।
अग्निपथ योजना खत्म करना
साल 2022 में मोदी सरकार युवाओं को सेना में अस्थाई भर्ती के लिए जो अग्निपथ स्कीम लेकर आई थी, उसका कांग्रेस ने तभी से मुखर विरोध शुरू कर दिया था। राहुल गांधी भी इसका विरोध करते आए हैं।
हाल ही में राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट एक टीवी चैनल से कह चुके हैं 'अपने मेनिफेस्टो में हम ये शामिल करेंगे कि यदि हम सत्ता में आए तो भारतीय सेना में भर्ती की जो पुरानी व्यवस्था थी, वही फिर से बहाल किया जाए।'
युवा मतदाताओं के लिए लुभावनी पेशकश
चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस बार 1.85 करोड़ लोग पहली बार मतदान करेंगे। इनकी उम्र 18 से 19 वर्ष के बीच है। इसके बाद 20 से 29 वर्ष आयु के मतदाताओं की संख्या 19.74 करोड़ है, जो कि कुल मतदाताओं के 20.38% हैं।
ये वैसे युवा हैं, जिनके सामने रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है। राहुल गांधी के लिए मोदी सरकार के खिलाफ बेरोजगारी बहुत बड़ा मुद्दा रहा है। ऐसे में हो सकता है कि कांग्रेस पार्टी इन युवा वोटरों को टारगेट करने के लिए कोई बहुत ही लुभावने वादे को अपने घोषणा पत्र में जगह दे।
पुरानी पेंशन योजना की बहाली
सरकारी कर्मचारियों को प्रभावित करने के लिए कांग्रेस पार्टी के पास पुरानी पेंशन योजना की वापसी एक बहुत बड़ा मुद्दा रहा है। हिमाचल प्रदेश से लेकर, कर्नाटक और तेलंगाना विधानसभा चुनावों में भी पार्टी को इसके वादे से फायदा मिला है। हालांकि, राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में इसका फायदा नहीं हुआ।
फिर भी लगता है कि कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र में पूरे देश में पुरानी पेंशन योजना लागू करने के वादे को शामिल किया जाए।
कांग्रेस की 16 सदस्यीय घोषणा पत्र समिति में पार्टी महासचिव और राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हैं। उनके अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, पार्टी महासचिव जयराम रमेश, सांसद शशि थरूर और गौरव गोगोई के अलावा गुजरात से जिग्नेश मेवाणी जैसे नेता भी शामिल किए गए हैं।












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