जमानत याचिका खारिज होने के बाद लालू यादव ने जेल से लिखा भावुक पत्र, कहा- लोकतंत्र और संविधान को बचाइयेगा
पटना। लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण की वोटिंग से ठीक पहले आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने एक भावुक पत्र जारी किया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद लालू यादव ने ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट किया, साथ ही एक पत्र भी शेयर किया है। अपने ट्वीट में आरजेडी मुखिया ने लिखा कि 44 वर्षों में पहला चुनाव है जिसमें आपके बीच नहीं हूं। लोकसभा चुनाव 2019 में सक्रिय भूमिका नहीं निभाने पर अफसोस जताते हुए उन्होंने लोकतंत्र और संविधान बचाने की अपील की है।

लालू यादव ने कहा- 44 वर्षों में पहला चुनाव है जिसमें आपके बीच नहीं हूं
लालू यादव ने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से जमानत की अपील की थी, लेकिन सीबीआई ने उनकी जमानत याचिका का विरोध किया। सीबीआई की ओर से कहा गया कि लालू प्रसाद यादव लोकसभा चुनाव के लिए जमानत मांग रहे हैं। जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ट्वीट में लिखा, "44 वर्षों में पहला चुनाव है जिसमें आपके बीच नहीं हूँ। चुनावी उत्सव में आप सबों के दर्शन नहीं होने का अफ़सोस है। आपकी कमी खली रही है इसलिए जेल से ही आप सबों के नाम पत्र लिखा है। आशा है आप इसे पढ़ियेगा एवं लोकतंत्र और संविधान को बचाइयेगा। जय हिंद, जय भारत।"
आरजेडी सुप्रीमो ने ट्वीट के साथ शेयर किया भावुक पत्र
लालू यादव ने इस ट्वीट के साथ एक पत्र भी शेयर किया, इसमें उन्होंने लिखा, 'इस वक्त जब बिहार एक नई गाथा लिखने जा रहा है। लोकतंत्र का उत्सव चल रहा है। यहां रांची के अस्पताल में अकेले बैठकर मैं सोच रहा हूं कि क्या विध्वंसकारी शक्तियां मुझे इस तरह कैद कराके बिहार में पिर किसी षड्यंत्र की पटकथा लिखने में सफल हो पाएंगी। मेरे रहते बिहारवासियों के साथ मैं फिर से धोखा नहीं होने दूंगा। मैं कैद में हूं, मेरे विचार नहीं। अपने विचारों को आपसे साझा कर रहा हूं, क्योंकि एक दूसरे से विचारों को साझा करके ही हम इन बांटने वाली ताकतों से लड़ सकते हैं।

लालू बोले- 'इस बार के चुनाव में सब कुछ दांव पर'
लालू यादव ने आगे लिखा, 'रांची के अस्पताल में अभी शाम में अकेले बैठकर आप लोगों से बात करने का मन हुआ। जैसा कि आप सब जानते ही हैं लोकसभा चुनाव कि बिगुल फुंक चुका है। देश में बहुत बार चुनाव हुआ है पर इस बार चुनाव पहले जैसा चुनाव नहीं है। इस बार के चुनाव में सबकुछ दांव पर है। देश, समाज, लालू यानी आपका बराबरी से सिर उठाकर चलने का जज्बा देने वाला और आपके हक और इज्जत और गरिमा सब दांव पर है। लड़ाई आर-पार की है। मेरे गले में सरकार और चालबाजों का फंदा फंसा हुआ है। उम्र के साथ शरीर साथ नहीं दे रहा पर आन और आबरू की लड़ाई में लालू की ललकार हमेशा रहेगी। ई ललकार हमारे सिपाहियों के दम पर है। जो हार में जीत में हर हाल में मैदान में डटने वाला रहा है। पीठ दिखाकर भागने वाला नहीं है।'
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