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कन्हैया कुमार ने दी दोस्तों-रिश्तेदारों को फोन करने की सलाह, जानिए क्यों

लोकसभा चुनाव के नतीजे जारी होने से चंद घंटे पहले कन्हैया कुमार ने एक फेसबुक पोस्ट लिखकर दोस्तों और रिश्तेदारों को फोन करने की सलाह दी है।

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) के रिजल्ट की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे प्रत्याशियों के दिलों की धड़कनें भी तेज हो रही हैं। एग्जिट पोल के नतीजों में एनडीए (NDA Govt) को बहुमत मिलने को लेकर पहले ही देश का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। 23 मई को सुबह सात बजे से मतों की गिनती शुरू हो जाएगी। हालांकि वीवीपैट पर्चियों से ईवीएम के मिलान के कारण इस बार चुनाव नतीजे घोषित होने में थोड़ी देर होगी। इस बीच जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष और बिहार की बेगुसराय लोकसभा सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के उम्मीदवार कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) ने लोकसभा चुनाव के नतीजे जारी होने से ठीक एक दिन पहले अपने फेसबुक पेज पर एक खास पोस्ट लिखी है।

'5 साल में मतभेद को 'मन का भेद' बनाया गया'

'5 साल में मतभेद को 'मन का भेद' बनाया गया'

कन्हैया कुमार ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है, 'कल चुनाव में चाहे कोई जीते, हमें इसका ध्यान रखना होगा कि आने वाले समय में समाज में नफरत की हर हाल में हार हो। पिछले पांच सालों में मतभेद को जिस तरह 'मन का भेद' बनाया गया है, उसने न केवल लोकतंत्र को कमजोर किया है बल्कि समाज को नफरत की आग में झोंकने का काम भी किया है। नेताओं के चक्कर में आपस में लड़ने वालों को ठंडे दिमाग से सोचने की जरूरत है कि ऐसा करने से किनका फायदा होता है और किनका नुकसान। असहमति को अपराध या अपमान मानने की मानसिकता न केवल लोकतंत्र को कमजोर बनाती है, बल्कि रिश्तों में भी जहर घोलती है। लोकतांत्रिक होने का मतलब है असहमति को सम्मान देना और यह बात चुनाव या राजनीति से आगे जाती है।'

'देश का मतलब क्या है?'

'देश का मतलब क्या है?'

कन्हैया कुमार ने आगे लिखा, 'देश का मतलब क्या है? जो देश में रहते हैं, वही देश बनाते हैं। उनके हित ही देश के हित हैं। अगर गरीब किसान, मजदूर, विद्यार्थी, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, महिला आदि को नुकसान पहुंचाने वाली नीतियां बनती हैं तो इसका नुकसान पूरे देश को होता है। इन नीतियों का विरोध करना देशप्रेम है न कि पीएम, सीएम या सांसद के विरोध को देश का विरोध मानकर सड़कों पर हिंसा करना। जिन्होंने देशप्रेम को नेताप्रेम बना दिया है, उनसे सावधान रहने की जरूरत है। वे अपने फ़ायदे के लिए आपके रिश्तों में भी ज़हर घोल रहे हैं।'

'दोस्त, पड़ोसी या रिश्तेदार को फोन करें'

अपनी फेसबुक पोस्ट में कन्हैया कुमार ने लिखा, 'जिस दोस्त, पड़ोसी या रिश्तेदार से राजनीतिक बहस के कारण आपकी बातचीत बंद हो गई है, उसे आज फोन करें, उसके परिवार का हाल-चाल पूछें और बताएं कि उनसे आपका रिश्ता इतना कमजोर नहीं कि वह ऐसी बातों से टूट जाएगा। असहमतियों का सम्मान करना ही लोकतंत्र की खूबसूरती है। अगर 'हम भारत के लोग' किसी भी तरह की नफरत को अपने दिल से मिटा देंगे, तो समाज और राजनीति में भी नफरतवादी ताकतें अपने आप हारने लगेंगी।' आपको बता दें कन्हैया कुमार बिहार की बेगुसरास सीट से चुनाव लड़े थे। उनके सामने भाजपा से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और महागठबंधन की तरफ से तनवीर हसन चुनाव मैदान में थे। कन्हैया के चुनाव प्रचार में फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर, संगीतकार जावेद अख्तर और अभिनेत्री शबाना आजमी समेत कई लोग शामिल हुए थे।

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