बिहार में पांचवें चरण के पांच मैचों की पिच रिपोर्ट- उत्साह में है एनडीए की टीम

पटना। इंडियन पोलिटिकल लीग का कारवां अब पांचवें चरण में पहुंच गया है। मुकाबले के लिए पांच मैदानों की पिच तैयार है। पिच की हालत और जो वेदर कंडिशन है उसके हिसाब से ग्रैंड एलायंस की टीम परेशानी में दिख रही है। सीतामढ़ी, मधुबनी, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर और सारण में 6 मई को मुकाबला होना है। ये सभी मैदान एनडीए के लिए माकूल रहे हैं। पिछले मुकाबलों में उनको ही जीत मिली थी। इस बार भी एनडीए की मजबूत टीम मैदान में है। जब कि दूसरी तरफ ग्रैंड एलायंस की कप्तानी बहुत ढीली दिखायी पड़ रही है। कप्तान का अपने खिलाड़ियों पर ही नियंत्रण नहीं है। सीतामढ़ी, हाजीपुर, मधुबनी में तो अपने ही लोग महागठबंधन की टीम को हराने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं।

सीतामढ़ी

सीतामढ़ी

सीतामढ़ी में राजद के अर्जुन राय और जदयू के सुनील कुमार पिंटू के बीच सीधा मुकाबला है। अर्जुन पहले जदयू की टीम में थे। 2009 में इस सीट पर जदयू की जर्सी पहन कर उन्होंने जीत हासिल की थी। 2014 में वे चुनाव हार गये। फिर उन्होंने जदयू छोड़ कर राजद की लालटेन उठा ली। दूसरी तरफ सुनील पिंटू भी पोलिटकल क्लब बदलने वाले खिलाड़ी हैं। वे भाजपा से चार बार विधायक रहे थे। एक बार बिहार में मंत्री भी रहे। उनके पिता हरिशंकर प्रसाद की 2003 में विधायक रहते मौत हो गयी थी। सहानुभूति लहर में सुनील भी विधायक बन गये। जब जदयू ने अपने पूर्व घोषित उम्मीदवार डॉ. वरुण को बदलने का फैसला किया तो सुनील पिंटू की लॉटरी लग गयी। वे आनन-फानन में भाजपा छोड़ कर जदयू में शामिल हो गये। लेकिन इस मुकाबले में अर्जुन राय और सुनील पिंटू दोनों ही भीतरघात से डरे हुए हैं। अर्जुन राय को बल्लेबाजी की मौका दिये जाने से राजद के स्थानीय नेता सीताराम यादव बहुत खफा हैं। 2014 में राजद के सीताराम यादव यहां हार गये थे। वैसे वे दो बार यहां से जीते भी हैं। अर्जुन राय मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं। बाहरी प्लेयर को यहां बुलाये जाने से नाराज सीताराम समर्थकों ने अर्जुन राय की पिच खोद डाली है। दूसरी तरफ सुनील पिंटू को अचनाक टीम में लिये जाने से जदयू के पुराने बल्लेबाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। डॉ. वरुण के टिकट लौटाने का मुद्दा भी सुनील पिंटू के लिए नुकसानदेह हो सकता है। जो असंतुष्टों को मुकाबले के दिन मना लेगा जीत उसी की होगी।

मधुबनी

मधुबनी

मधुबनी में पिच की जो हालत है उसकी वजह से महागठबंधन की टीम मुकाबला शुरू होने के पहले ही हारती दिख रही है। कांग्रेस के शकील अहमद ने वीआइपी के बद्रीनाथ पूर्वे का खेल पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। शकील अहमद जहां तपेतपाये अनुभवी खिलाड़ी हैं वहीं बद्री पूर्वे पोलिटिकल मैच में डेब्यू ही कर रहे हैं। दोनों में कोई तुलना ही नहीं है। शकील अहमद इस सीट पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। 1998 और 2004 में वे यहां से जीत भी चुके हैं। केन्द्र में मंत्री भी रहे हैं। इस क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ है। अल्पसंख्य वोट उनके पाले में जाने से इस बार महागठबंधन की हालत खराब हो जाएगी। भाजपा ने इस बार यहां के मौजूदा सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के पुत्र अशोक यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है। अशोक यादव विधायक रहे हैं। उनके पिता हुकुमदेव नारायण यादव मधुबनी में चार मुकाबले जीत चुके हैं। एनडीए में पूरी तरह एकजुटता है। फिलहाल भाजपा की स्थिति मजबूत दिख रही है।

मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर में भाजपा के अजय निषाद और वीआइपी के डॉ. राजभूषण चौधरी निषाद के बीच कांटे की टक्कर है। इस सीट पर निषाद समुदाय डिसाइडिंग फैक्टर है। दोनों मुख्य खिलाड़ी इसी जाति के हैं। 2014 में अजय निषाद यहां से मुकाबला जीत चुके हैं। इस मैदान पर भाजपा और राजद की लगभग बराबर ताकत रही है। इस लोकसभा क्षेत्र की छह विधानसभा सीटों में से दोनों तरफ तीन- तीन सीटें हैं। लेकिन राजद ने यहां खुद मैदान में उतने की बजाय मुकेश सहनी के वीआइपी को को मौका दिया है। राजभूषण चौधरी का खेल राजद के समर्थन पर टीका है। दूसरी तरफ अजय निषाद अपने सामाजिक समीकरण को लेकर आश्वस्त दिखते हैं। उनके पिता कैप्टन जयनारायण निषाद पिछड़ी जाति के मजबूत नेता था। वे यहां से कई बार सांसद भी चुने गये थे। अजय निषाद के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुजफ्फरपुर में जनसभा कर चुके हैं। सभा में जुटी भीड़ से भाजपा के समर्थक पूरे उत्साह में हैं।

हाजीपुर

हाजीपुर

यहां मुख्य मुकाबला लोजपा के पशुपति कुमार पारस और राजद के शिवचंद्र राम के बीच है। यह सीट दोनों के लिए बहुत खास है। यहां कांटे की लड़ाई तो है लेकिन राजद और लोजपा, दोनों की भीतरघात से सहमे हुए हैं। ऊंट किसी करवट बैठ सकता है। पशुपति कुमार पारस लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। उनका राजनीतिक वजूद बड़े भाई रामविलास पासवान की लोकप्रियता पर टिका है। 2015 में विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं। रामविलास पासवान की वजह से ही नीतीश कुमार ने पारस को बिना विधायक रहते हुए भी मंत्री बना लिया था। अब पारस पर अपने बड़े भाई की विरासत को बचाने की चुनौती है। उन्हें रामविलास पासवान के भाई होने का फायदा मिलता तो दिख रहा है लेकिन रामा सिंह के विरोध से उनके समर्थकों में चिंता है। रामा सिंह वैशाली के मौजूदा सांसद हैं। रामविलास पासवान से खटपट होने के बाद वे अब लोजपा से अलग हैं। लोजपा ने वैशाली से पूर्व विधायक वीणा सिंह को उम्मीदवारा बनाया है। इससे रामा सिंह नाराज हैं और पारस को हराने के लिए जीन जान लगाये हुए हैं। हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में वे राजपूत मतों को पारस के खिलाफ गोलबंद करने में जुटे हैं। दूसरी तरफ राजद उम्मीदवार शिवचंद्र राम भी आंतरिक कलह से परेशान हैं। लालू यादव के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव ने इस सीट पर बालेन्द्र दास को चुनाव मैदान में उतारा है। वे लालू-राबड़ी मोर्चा के बेनर तले चुनाव लड़ रहे हैं। बालेन्द्र दास को जो भी मत मिलेंगे वह राजद के हिस्से से ही कटेगा। जहां मुकाबला बराबरी का हो वहां थोड़े मतों का नुकसान भी घातक होगा। इस सीट पर फिलहाल लोजपा की स्थिति बेहतर दिखायी पड़ रही है।

सारण

सारण

सारण (छपरा) लोकसभा क्षेत्र हाईप्रोफाइल सीट है। दिग्गज लालू यादव यहां से चार बार सांसद रहे हैं। मौजूदा सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी इस सीट से तीन चुनाव जीत चुके हैं। इस बार राजीव प्रताप रूडी के सामने लालू यादव के समधी चंद्रिका राय खड़े हैं। बहुत जद्दोजहद के बाद सारण सीट चंद्रिका राय को मिली है। उन पर लालू की विरासत को बचाने की बड़ी जिम्मेवारी है। 2014 के चुनाव में राबड़ी देवी इस सीट पर हार गयीं थीं। इस लिए लालू परिवार इस सीट पर खास नजर रखे हुए है। राबड़ी देवी की फटकार के बाद तेज प्रताप ने यहां से चुनाव लड़ने का इरादा छोड़ दिया। इसके बाद भी चंद्रिका राय पर राजनीति दवाब कम नहीं हुआ है। वे जीत के लिए अपनी पूरी ताकत झोंके हुए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने छपरा के चुनावी सभा में ये घोषणा की है कि अगर केन्द्र में फिर भाजपा की सरकार बनती है तो राजीव प्रताप रूडी को बड़ी और अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। इस घोषणा से एनडीए समर्थकों में बहुत उत्साह है। नरेन्द्र मोदी, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान की संयुक्त सभाओं से एनडीए के खेमे में जोश दिखायी पड़ रहा है।

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