मध्यप्रदेश: मालवा-निमाड़ की 8 सीटों के लिए कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में लोकसभा की बाकी बची सीटों पर कांग्रेस पूरी ताकत झोंक रही है। अंतिम चरण में मध्यप्रदेश में 8 सीटों पर मतदान रविवार 19 मई को होगा। कांग्रेस का सारा ध्यान आरक्षित वर्ग की पांच सीटों पर है। इनमें से दो सीटें अनुसूचित जाति और 3 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। राहुल गांधी और प्रियंका दोनों ने इन 5 सीटों को लक्ष्य बनाया है। मालवा निमाड़ क्षेत्र की यह सीटें अब तक भाजपा के लिए सुगम सीटें थी। इंदौर, देवास, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, धार, खरगोन और खंडवा में होने वाले इन चुनाव में खरगोन, धार और रतलाम अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है और देवास तथा उज्जैन अनुसूचित जाति के लिए। उज्जैन में राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा दोनों के ही कार्यक्रम हैं। प्रियंका वाड्रा ने इंदौर, रतलाम और उज्जैन को लक्ष्य बनाया हैं। उज्जैन के महांकाल मंदिर में भी प्रियंका वाड्रा का कार्यक्रम रखा गया है।

राहुल-प्रियंका करेंगे सभाएं

राहुल-प्रियंका करेंगे सभाएं

राहुल गांधी 14 मई को मंदसौर लोकसभा क्षेत्र के नीमच, उज्जैन लोकसभा के तराना तथा खंडवा-बुरहानपुर लोकसभा के खंडवा में आमसभाओं को संबोधित करेंगे। इसके पहले देवास, धार और खरगोन में राहुल गांधी की सभाएं हो चुकी है। देवास में राहुल गांधी ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रहलाद टिपानिया का कबीरपंथी लोकगीत सोशल मीडिया पर भी शेयर किया था। कुछ और स्टार प्रचारकों को भी कांग्रेस मालवा निमाड़ क्षेत्र में लाने की योजना बना रही है। इनमें नवजोत सिंह सिद्धू और शत्रुघ्न सिन्हा शामिल हैं। कांग्रेस के चुनाव प्रबंधकों को लगता है कि इससे पार्टी को फायदा मिलेगा।

मालवा निमाड़ की 8 में से 7 सीटों पर फिलहाल भाजपा का कब्जा है। भाजपा इन सभी सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। कांग्रेस को लगता है कि इन क्षेत्रों में कांग्रेस भाजपा को कमजोर कर सकती है। दोनों ही पार्टियां अपने प्रमुख नेताओं के दौरे करवाकर जनसमर्थन की अपेक्षा में है। नरेन्द्र मोदी की सभाओं के बाद अब राहुल गांधी दूसरे दौर में यहां पहुंच रहे हैं। एक जमाने में कभी कांग्रेस का गढ़ रहे आदिवासी क्षेत्र अब कांग्रेस की पकड़ से दूर चले गए हैं। मध्यप्रदेश में 15 साल तक भाजपा की सरकार रहने पर लोगों का रुख बदल गया है और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल भी नीचे गिर गया है। अब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, लेकिन कांग्रेस को वैसा प्रतिसाद नहीं मिल रहा, जिसकी अपेक्षा थी। मुख्यमंत्री कमलनाथ इसीलिए राहुल प्रियंका की अधिक से अधिक सभाएं मध्यप्रदेश में रखवाने की इच्छा रखते थे। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को जिन सीटों पर सफलता मिली, उन्हीं सीटों के भरोसे उन्हें लोकसभा चुनाव जीतने की आशा है।

भाजपा के लिए आरएसएस ने संभाला मोर्चा

भाजपा के लिए आरएसएस ने संभाला मोर्चा

भाजपा की सीटों को बचाने के लिए आरएसएस के स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाल रखा है। संघ की प्रचार करने की शैली अलग है। संघ को लगता है कि नए मतदाता भाजपा के पक्ष में है। उन्हीं मतदाताओं को सक्रिय करने के इरादे से संघ ने नए-नए संगठन बना रखे है, जिनके नाम पर कार्यकर्ता घर-घर जा रहे है और लोगों को पर्चे देकर कह रहे हैं कि आगामी चुनाव में 100 प्रतिशत मतदान करना है। जो पर्चे दिए जाते है, उनमें किसी भी पार्टी का नाम नहीं होता, लेकिन उन पर्चों में भारत को मजबूत करने तथा सशक्त नेतृत्व की बात होती है। साथ ही सर्जिकल स्ट्राइक से संबंधित रेखाचित्र और अभिनंदन की तस्वीरें भी हैं। जाहिर है कि संघ अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा के प्रचार में जुटा है, लेकिन किसी भी पार्टी या उम्मीदवार का नाम नहीं होने और 100 प्रतिशत मतदान का आग्रह करने के कारण इस पर चुनाव आयोग कोई आपत्ति भी नहीं उठा सकता और न ही इसमें हुए खर्च को भाजपा के खर्च में शामिल कर सकता है।

भाजपा को लगता है कि एंटी इन्कमबेन्सी का असर मालवा निमाड़ में हो सकता है। विधानसभा में लगातार 15 साल सत्ता में रहने के बाद विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिला है। 2014 के चुनाव में इन आठों सीटों पर भाजपा जीती थी, लेकिन झाबुआ-रतलाम के सांसद दिलीप सिंह भूरिया की अस्वस्थता के कारण हुई मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने यह सीट वापस प्राप्त कर ली थी। विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए इन्कमबेन्सी से निपटने के लिए भाजपा ने यहां के 7 में से 5 सांसदों के टिकट काट दिए। उज्जैन से सांसद चिंतामणी मालवीय को टिकट नहीं देते हुए पूर्व विधायक अनित फिरोजिया को टिकट दिया गया। धार से सांसद सावित्री ठाकुर की जगह पूर्व सांसद छतरसिंह दरबार को उम्मीदवार बनाया गया।

 महाजन इस बार इंदौर से उम्मीदवार नहीं

महाजन इस बार इंदौर से उम्मीदवार नहीं

लोकसभा की स्पीकर और 8 बार सांसद रहने वाली सुमित्रा महाजन का टिकट भी इंदौर से काट दिया गया और उनकी जगह शंकर लालवानी को टिकट दिया गया। खरगोन से सांसद सुभाष पटेल की जगह गजेन्द्र सिंह पटेल को टिकट दिया गया। देवास से भाजपा ने एकदम नए चेहरे पर दांव लगाया और महेन्द्र सिंह सोलंकी को टिकट दिया, जो न्यायाधीश की नौकरी छोड़कर राजनीति में उतरे है। मध्यप्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान अपनी खंडवा बुरहानपुर सीट कड़े संघर्षों के बाद बचा पाए और अब वहां उन्हें कांग्रेस के अरुण यादव कड़ी टक्कर दे रहे है। इन आठों सीटों पर भाजपा नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट मांग रही है। पार्टी या स्थानीय उम्मीदवार का कोई महत्व नहीं है, जबकि कांग्रेस किसानों की कर्जमाफी को मुख्य मुद्दा बनाए हुए है। नरेन्द्र मोदी अंतिम चरण के मतदान के अंतिम दौर में 17 मई को खरगोन और झाबुआ सीटों पर प्रचार के लिए आएंगे।

जाहिर है भाजपा इन सभी सीटों को बहुत महत्वपूर्ण मानती है और किसी भी कीमत पर इन्हें अपने पास रखना चाहती है। कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में मिले, वोटों का संबल है और कर्जमाफी की योजना तथा न्याय योजना का आसरा है। ये सभी सीटें इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है कि यहां से प्रदेश कांग्रेस के दो पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और अरूण यादव तथा भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान अपनी ताकत आजमा रहे है।

यहां क्लिक करें और पढ़ें लोकसभा चुनाव 2019 की विस्तृत कवरेज

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