• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

बिहार महागठबंधन: तेजस्वी यादव कांग्रेस पर सख्त, मांझी, कुशवाहा पर नरम क्यों

|

नई दिल्ली। बिहार में महागठबंधन के दलों के बीच शुक्रवार को सीटों का बंटवारा हो गया है। राजद, कांग्रेस और सहयोगी दलों के बीच कई दिनों तक बातचीत के बाद सीटों का बंटवारा हुआ है। बिहार की 40 सीटों में राजद 20, कांग्रेस 9, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा 5, मुकेश सहानी की वीआईपी और मांझी की पार्टी हम 3-3 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। भाकपा माले को राजद कोटे से एक सीट दी गई है। सीटों के बंटवारे पर बातचीत के दौरान कई दफा राजद और कांग्रेस में तनाव की बात भी सामने आई लेकिन आखिर में मामला सुलट गया। सीट शेयरिंग से साफ है कि जहां कांग्रेस को लेकर राजद सख्त रही वहीं हम, रालोसपा और वीआईपी को सीट देने में नरम रही। आखिर राजग के रुख की वजह क्या है।

छोटे दलों पर राजद का करम क्यों

छोटे दलों पर राजद का करम क्यों

गठबंधन के दलों में बातचीत के दौरान कांग्रेस 12 सीटें चाहती थीं, उसने 2014 में भी 12 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे। तेजस्वी आठ सीटें देने पर अड़ गए, यहां तक कि कांग्रेस को ना मानने पर अलग रास्ता चुनने की बात भी कह दी। आखिर में कांग्रेस को झुकते हुए नौ सीटों पर मानना पड़ा। वहीं उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी को पांच, मुकेश साहनी की वीआईपी को तीन, मांझी की हम को तीन सीटें दी गईं। जबकि जानकार कह रहे थे कि कुशवाहा को चार और मांझी को एक या दो सीट गठबंधन में मिलेगी। वहीं वीआईपी को भी दो सीटें मिलने की बात कही जा रही थी। शरद यादव को राजद से टिकट देने का ऐलान किया गया है। राजद के इन दलों के लिए दरियादिली दिखाई तो इसकी वजह है सामने भाजपा, जदयू और लोजपा के मजबूत गठबंधन का होना। जातीय समीकरण साधने के लिए राजद ने ये स्टैंड लिया है।

महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्यों नहीं आए तेजस्वी, पार्टी ने बताई वजह

छोटे दलों के वोटबैंक पर निगाह

छोटे दलों के वोटबैंक पर निगाह

बिहार में करीब 16 फीसदी मुसलमान और 14 फीसदी यादव वोट हैं। मौटे तौर पर माना जाता है कि ये वोट राजद के साथ रहता है। तेजस्वी यादव और राजद के नेता भी ये जानते हैं कि सिर्फ यादव और मुसलमानों के सहारे वो लोजपा, जदयू और भाजपा के मजबूत गठबंधन से नहीं जीत सकते हैं। इसके लिए और जातियों को भी जोड़ने की जरूरत होगी। ऐसे में गठबंधन ने छोटे साथियों के सहारे पिछड़ी, अतिपिछड़ी जातियों को पक्ष में करने की कोशिश की है।

बिहार में मुसहर जाति के करीब छह फीसदी वोट हैं, जीतनराम मांझी मुसहर जाति से हैं। ऐसे में उनको खुश रखने के लिए उन्हें तीन सीटें दी गई हैं ताकि गैरपसवान जाति के लोग गठबंधन के साथ जुडें। उपेंद्र कुशवाहा कोइरी जाति से आते हैं, इस जाति के भी करीब छह फीसदी वोट हैं। मोदी सरकार में मंत्री रहे कुशवाहा एनडीए छोड़कर आए हैं, उन्हें कम सीटें दी जाती तों ये संदेश जाता कि उनको सम्मान नहीं मिला। ऐसे में उनको पांच सीटें दी गईं ताकि उनकी जाति के बीच सकारात्मक संदेश जाए। वहीं मुकेश साहनी की वीआईपी को भी तीन सीटें दी गईं। साहनी खुद मल्लाह हैं। मल्लाहों और निषादों के बीच साहनी की पकड़ मानी जीती है। करीब 12 सीटों पर इन जातियों के वोट निर्णायक हैं। वहीं राजद ने अपने कोटे से एक सीट भाकपा माले को देकर वामपंथी विचारधारा से जुड़े मजदूर संगठनों को पक्ष में करने की कोशिश की है।

कांग्रेस के साथ चल रही सीटों की खींचतान पर तेजस्वी यादव का बड़ा बयान

कांग्रेस को लेकर सख्ती होने की वजह

कांग्रेस को लेकर सख्ती होने की वजह

राजद अपने दूसरे साथियों पर नरम है तो कांग्रेस को उसने सीट शेयरिंग के दौरान कड़े तेवर दिखाए। इसकी वजह ये हैं कि कांग्रेस को उच्च जातियों में प्रभाव रखने वाली पार्टी माना तो जाता है लेकिन ये तबका अमूमन वोट भाजपा को देता है। खासतौर से कांग्रेस का कैंडिडेट ना होने पर पार्टी वोट ट्रांसफर नहीं करा पाता है, ये माना जाता है। कांग्रेस के पास कोई बंधा वोटबैंक नहीं है, जिसके दम पर वो गठबंधन के सहयोगियों से अड़कर बात कर सके। ऐसे में जहां राजद ने उसे सख्त तेवर दिखाए तो वहीं कांग्रेस को भी कदम पीछे खींचते हुए नौ सीटों पर ही राजी होना पड़ा।

महागठबंधन की पहली लिस्ट से मंसूबों पर फिरा पानी तो अब क्या करेंगे पप्पू यादव?

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
lok sabha elections 2019 bihar mahagathbandhan seat sharing formula
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X