बिहार महागठबंधन में फंसा पेंच, कांग्रेस को महज इतनी सीटें देने पर अड़ी RJD
नई दिल्ली। बिहार में कांग्रेस-आरजेडी समेत अन्य पार्टियों को मिलाकर बन रहा महागठबंधन मुश्किल दौर से गुजर रहा है। दरअसल, यूपी में सपा-बसपा के बीच महागठबंधन का फॉर्मूला फाइनल होने के बाद अब सभी की निगाहें बिहार पर टिकी हैं। हालांकि बिहार में महागठबंधन के कुनबे में कांग्रेस, आरजेडी के अलावा, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी, जीतनराम मांझी की पार्टी HAM और मुकेश सैनी भी शामिल हैं। ऐसे में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला कैसा हो इसको लेकर माथापच्ची जारी है। इस बीच खबर ये भी आ रही है कि महागठबंधन के दो प्रमुख दलों कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीटों को लेकर तालमेल नहीं बन पा रहा है। इसके अलावा भी कई मुद्दे सामने आए हैं जिससे ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है?

क्या होगा महागठबंधन में सीट शेयरिंग फॉर्मूला
बिहार में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में सीटों का फॉर्मूला फाइनल हो चुका है। इसमें बीजेपी और जेडीयू दोनों पार्टियां 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं, वहीं 6 सीटें रामविलास पासवान की पार्टी एलजेपी को दी गई हैं। अब बात करें महागठबंधन की तो बिहार में 2014 लोकसभा चुनाव में आरजेडी 27 सीटों पर और कांग्रेस 12 सीटों पर चुनाव में उतरी थीं। हालांकि इस बार जो खबरें मिल रही हैं उसके मुताबिक आरजेडी के रणनीतिकार कांग्रेस को 8 सीटें देने को राजी दिख रहे हैं, लेकिन कांग्रेस की ओर से 12 सीटों की मांग की जा रही है। इसी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

कांग्रेस को 8 सीटों से ज्यादा देने के लिए तैयार नहीं आरजेडी
बिहार में इस बार महागठबंधन में उपेन्द्र कुशवाहा की आरएलएसपी के अलावा जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी जैसे नए सहयोगी भी शामिल हैं, ऐसे में उनके आने से कांग्रेस और आरजेडी के कोटे की सीटें घटना तय माना जा रहा है। आरजेडी के अंदरुनी सूत्रों के मुताबिक बिहार में पार्टी कम से कम 20 सीटों पर चुनाव लड़ने की प्लानिंग कर रही है। वहीं सूत्रों का दावा है कि आरजेडी, कांग्रेस को 8 सीटें तो देने के लिए तैयार लेकिन नहीं मानने पर 10 सीटों पर सुलह की कोशिश कर रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नए सहयोगियों को जगह देने के लिए हम अपनी सीटें कम कर रहे हैं तो कांग्रेस को भी अपने कोटे की सीटें कम करनी होंगी।

कांग्रेस में हो सकती है कई दिग्गजों की एंट्री
दूसरी ओर कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी की कोशिश प्रदेश की 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की है। इसके अलावा आने वाले दिनों में कई बड़े नेता जिनमें कीर्ति आजाद और शत्रुघ्न सिन्हा का नाम शामिल है, उनके भी कांग्रेस में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस और सीटों की डिमांड कर सकती है। ऐसी स्थिति में सीट शेयरिंग फॉर्मूला बनाने में तनातनी बढ़ सकती है।

कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी को मिलेंगी कितनी सीटें
वहीं खबर है कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी को बिहार में चार सीटें और एक सीट झारखंड में देने की बात कही गई है। हालांकि इसमें भी एक सीट पर विवाद हो सकता है क्योंकि तेजस्वी यादव ने हाल ही में बीएसपी अध्यक्ष मायावती से मुलाकात की थी, जहां उन्होंने बिहार की एक सीट मायावती की पार्टी को देने के लिए कहा था। माना जा रहा है कि एक सीट जो बीएसपी को दी जाएगी वो उपेंद्र कुशवाहा के कोटे से ही होगी। हालांकि इसके उपेंद्र कुशवाहा कितना तैयार होंगे ये देखना बाकी है।

राहुल गांधी की रैली के बाद फैसला संभव
इसके अलावा बिहार में कांग्रेस और आरजेडी के बीच और भी कई मुद्दे सामने आए हैं जिससे लग रहा है कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। जानकारी के मुताबिक यूपी में महागठबंधन के ऐलान के बाद आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। इस मुलाकात को लेकर बिहार कांग्रेस खुश नहीं है। इसके अलावा आरजेडी के आर्थिक आधार पर सवर्ण आरक्षण के विरोध से भी कांग्रेस के रणनीतिकार खुश नहीं हैं। फिलहाल महागठबंधन में सीटों का फॉर्मूला 3 जनवरी को राहुल गांधी की बिहार में होने वाली रैली के बाद सामने आने की उम्मीद है। इस रैली के बाद ही आगे की रणनीति सामने आएगी।












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