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लोकसभा चुनाव 2019- अखिलेश यादव: देश जानता है मैं प्रधानमंत्री के लिए किसका नाम लूंगा

By नितिन श्रीवास्तव

अखिलेश यादव
BBC
अखिलेश यादव

देश में लोकसभा चुनाव अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. 19 मई को सातवें चरण के चुनाव होंगे जिनमें उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाक़ों की गोरखपुर, वाराणसी और ग़ाज़ीपुर जैसी सीटें शामिल हैं.

राज्य में इस बार सपा, बसपा और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन चुनाव लड़ रहा है.

इस चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत की.

2014 , 2017 और अब 2019 इनसे आपकी क्या सीख रही?

2014 और 2017 का चुनाव देखें तो लोगों ने लगभग 2014 की तरह ही 2017 में भी वोट दिए. लोग सोचते थे कि भारतीय जनता पार्टी ने अच्छे दिन, नौकरी-रोज़गार और साथ ही साथ कुछ बड़ा बदलाव करने के जो नारे अपने घोषणापत्र में किए थे, वह उन पर अमल करेगी. लेकिन पांच साल पूरे हो गए और कुछ नहीं हुआ.

2016 में नोटबंदी हुई और 2017 उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव हुए. उस वक़्त तक लोग नोटबंदी का असर नहीं समझ पा रहे थे और इस भ्रम में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को दोबारा मौका दिया. समाजवादी पार्टी ने काम बहुत किया है, लोगों को आज भी हमारी सरकार की उपलब्धियां याद हैं.

उदाहरण के लिए मैं कह सकता हूं कि हमने पुलिस में स्ट्रक्चरल बदलाव किया और डायल 100 लेकर आए. एक्सप्रेस-वे पर ज़्यादा लोग नहीं चल रहे थे लेकिन अब चल रहे हैं, मेट्रो में ज़्यादा लोग नहीं सवार हो रहे थे अब हो रहे हैं. बिजली का उत्पादन बड़े पैमाने पर बढ़ाया था, समाजवादी पेंशन देने का काम हमने किया था.

जिस तरह बीजेपी ने अपनी बातें जनता तक पहुंचाईं क्या समाजवादी पार्टी इसमें नाकाम रही?

भारतीय जनता पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग अच्छी की थी. लोगों को बहका दिया था. अपना दल उनके साथ था, ओम प्रकाश राजभर उनके साथ थे. उन्होंने लोगों को गठबंधन दिया और वोट बढ़ाया.

लेकिन जब काम की बात आई तो ज़मीन पर काम नहीं किया. जनता बीजेपी से बहुत नाराज़ है.

2014 में एनडीए एक बेहद मज़बूत गठबंधन था क्या महागठबंधन उसका जवाब है?

महागठबंधन एक जवाब भी है. महागठबंधन में सपा के पास अपने (अपनी सरकार में) किए हुए काम थे और बसपा के पास भी अपने (अपनी सरकार में) काम थे.

हां आरएलडी के पास बड़े पैमाने पर काम करने के मौक़े नहीं आए. अपने अर्थमैटिक को लोकतंत्र में बेहतर बनाना होगा. अगर बीजेपी के लिए यह कहा जाता है कि वह सोशल इंजीनियरिंग बेहतर करती हैं. अपनी अर्थमैटिक बेहतर कर सकती है तो हमें बीजेपी से सीखना चाहिए. हमने उनसे सीखा और उसी का नतीजा है कि हमने गठबंधन बनाया. आज गठबंधन भारतीय जनता पार्टी को टक्कर दे रहा है.

हमने सपा बसपा का उदय और रंजिश भी देखी है उसे आप कैसे यकीन दिलाएंगे कि ये स्वभाविक गठबंधन है?

@YADAVAKHILESH

यह गठबंधन नैचुरल है. हम उपचुनाव में साथ आए और ये गठबंधन आज का नहीं है. बाबा भीमराव अंबेडकर और लोहिया जी एक साथ मिलकर काम करना चाहते थे. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. फिर मान्यवर काशीराम जी और नेताजी ने साथ मिलकर काम किया, वह ज़्यादा दिन तक नहीं चल सका.

लेकिन इस बार हमने जो गठबंधन किया है वह सिर्फ़ पार्टियों का गठबंधन नहीं है. हमने कोशिश की है कि ये दो विचारधाराओं का गठबंधन हो. हम कोशिश कर रहे हैं कि यह विचारों का संगम बने.

क्या बूथ स्तर का कार्यकर्ता उस झंडे पर वोट देगा जिसमें आप और मायावती दोनों की तस्वीर हो?

छह चरण के मतदान हो चुके हैं. और हर जगह दोनों दलों का एक-दूसरे को वोट ट्रांसफ़र हुआ है. अगर यह ना हुआ होता तो गठबंधन का मनोबल इतना बढ़ा ना होता. इसकी वजह से आपने देखा होगा कि बीजेपी की लीडरशिप ना जाने क्या-क्या भाषा का इस्तेमाल कर रही है.

तो महागठबंधन महामिलावट नहीं है, जैसा मोदी जी कहते हैं?

मोदी जी अपने गठबंधन भूल जाते हैं. वह पहले शीशे के सामने खड़े हों और ख़ुद को देखकर यह बोलें कि ये गठबंधन नहीं महामिलावट है, तब उन्हें पता चलेगा कि उन्होंने किन-किन लोगों से गठबंधन किया है.

@YADAVAKHILESH

बीजेपी कहती है अगर आप जीतते हैं तो राष्ट्रहित को ख़तरा है?

मैंने जितने भी चुनाव लड़े हैं मैनें कभी जाति नहीं बताई. कभी ये नहीं कहा कि मैं पिछड़ा हूं इसलिए मेरी मदद की जाए. ये देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने बार-बार कहा कि मैं पिछड़ा हूं, नीची जाति से आता हूं, मेरी मदद की जाय. मैंने और समाजवादी पार्टी ने जाति-धर्म के आधार पर वोट नहीं मांगा.

आप पर आरोप लगते हैं कि आपकी सरकार में यादव लोग ज़्यादा फलते-फूलते हैं

मुझे आज ये लोग बता दें कि अगर ऐसे लोग बैठे थे तो आज वे कहां हैं. बता दें कि पूरे प्रदेश में यादव जाति का डीएम बना हो या एक भी यादव एसपी बना हो. जब गवर्नर साहब और प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां जाति के आधार पर पोस्टिंग होती है तो मैंने ये जानना चाहा उनसे की हमें आप सूची उपलब्ध करा दीजिए की कितने डीएम हैं, कितने आईपीएस ऐसे हैं. ये बस आरोप लगाते हैं.

@YADAVAKHILESH

कांग्रेस इस गठबंधन में शामिल होगी? क्या कांग्रेस के साथ होने से फ़ायदा होता?

अभी नहीं लेकिन 23 मई के नतीजों के बाद गठबंधन मिलकर इस पर फ़ैसला लेगा. कांग्रेस का साथ ना होना निराशाजनक नहीं बल्कि अच्छा ही हुआ और हमें गठबंधन के ही प्रत्याशियों की मदद करनी पड़ रही है. कांग्रेस ख़ुद इस गठबंधन में आना ही नहीं चाहती थी.

आपके भीतर भी प्रधानमंत्री बनने की अकांक्षा है?

देश का प्रधानमंत्री नया हो. वह देश के किसी भी कोने से हो सकता है लेकिन यूपी से होगा और बेहतर होगा. अभी हमारी ऐसी कोई इच्छा नहीं है कि हम दिल्ली जाएं पीएम की कुर्सी के लिए अपना पक्ष रखें. यह पूरा देश जानता है कि जब नाम की चर्चा होगी तो मैं किस नाम के लिए कहूंगा. 23 तारीख़ को दोनों दल मिलकर फ़ैसला लेंगे. मैं प्रधानमंत्री की रेस में नहीं हूं. प्रधानमंत्री का पद बहुत बड़ा होता है. अनुभव जिसके पास हो और काफ़ी ज़्यादा अनुभव हो वो प्रधानमंत्री बने तो अच्छी बात है. मैं इतना बड़ा सपना नहीं देखता जो पूरा ही ना हो, इसलिए मैं अभी पीएम की रेस से बाहर हूं.

चुनाव प्रचारों में राजनेताओं के भाषणों का स्तर गिरता जा रहा हैं आप कैसे देखते हैं इसे?

भाषणों और शब्दों में गिरावट भारतीय जनता पार्टी के लोग लाए हैं. भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने लागातार अपने भाषणों का स्तर गिराया है. क्या प्रधानमंत्री टोंटी पर बात कर सकते हैं. क्या राज्य के मुख्यमंत्री प्रेस को मेरे घर भेजकर टोंटी ढूंढवा सकते हैं. अभी हमारे बाबा मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्होंने गोरखपुर में एक चिड़ियाघर बनवाया है, लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि उस चिड़ियाघर को सपा-बसपा ने बनवाया है. बयानों में गिरावट बीजेपी ही ला रही है.


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@YADAVAKHILESH

क्या मायावती का मोदी पर दिया गया बयान गठबंधन को नुकसान पहुंचाएगा?

मायावती जी ने बस ये बताया कि प्रधानमंत्री जी पिछड़ी जाति से नहीं आते. मुझे नहीं लगता इस बयान का गठबंधन को कोई नुकसान होगा.

चुनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है जाति की बात आ रही है, क्या जाति मुद्दों पर हावी हो रही है?

मैं तो चाहता हूं कि चुनाव जाति-धर्म पर ना हो. इसलिए मेरा पिछला चुनाव 'काम बोलता है' चुनावी कैंपेन पर था. लेकिन बीजेपी ने पूरा चुनाव जाति और धर्म पर लड़ा.

ज़्यादातर चुनाव में पुलवामा और पाकिस्तान का ज़िक्र हो रहा है जिससे आम लोग भी सहमत हैं आप इसे कैसे देखते हैं?

प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी राष्ट्र की सेना की बात करते हैं लेकिन जब एक बीएसएफ़ फ़ौजी चुनाव लड़ना चाहता है तो पूरी पार्टी उसे चुनाव नहीं लड़ने देती. मैं पूछता हूं कि अगर किसी सैनिक ने खाने की, दाल की और रोटी की शिकायत की तो इसमें उसकी क्या ग़लती है. चुनाव आयोग को तुरंत विभाग रिपोर्ट भेज दी गई.

चुनाव आयोग हमारी भी बात सुन लेता, मैंने कन्नौज में 100 लोगों को रेड कार्ड जारी किया. पुलिस ने लाठीचार्ज किया. हमने चुनाव आयोग में शिकायत की और आयोग ने डीएम से रिपोर्ट मांगी. डीएम ने कहा सब ठीक है और आयोग ने मान लिया. मुझे ये बता दीजिए की आख़िर डीएम किसके हैं, क्या कोई ज़िलाधिकारी राज्य सरकार के ख़िलाफ़ रिपोर्ट दे सकता है?

23 तारीख को आप किन-किन पार्टियों संपर्क साधेंगे

मैं, मायावती जी और अजीत जी एक साथ बैठेंगे और राय-मशविरा करेंगे. सब कुछ तभी तय होगा. हमने अन्य पार्टियों से भी बात की है. ममता जी ने सभी नेताओं को बंगाल में बुलाया था. केसीआर, चंद्रबाबू नायडु भी कोशिशों में जुटे हुए हैं और इन कोशिशों का कोई नतीजा ज़रूर 23 मई को निकलेगा.

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English summary
Lok Sabha Elections 2019- Akhilesh Yadav: The country knows whom I will name for the Prime Minister
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