मंगलसूत्र से लेकर प्रॉपर्टी तब.. क्या-क्या आता है स्त्रीधन में? जानिए इससे जुड़े कानून के बारे में
Streedhan: लोकसभा चुनाव का समय है। सभी पार्टियां चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं। रैली और जनसभाएं की जा रही हैं। ऐसी ही एक रैली में पीएम मोदी ने विपक्ष में बैठी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो महिलाओं का मंगलसूत्र तक नहीं बचेगा। पीएम ने कहा कि कांग्रेस मां-बहनों के गोल्ड का हिसाब करेगी।
पीएम के बयान के बाद राजनीतिक उथल पुथल मच गई। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पलटवार भी किया। लेकिन इन सब के बीच एक सवाल निकल कर सामने आया कि मां-बहनों के गोल्ड या स्त्रीधन का अर्थ क्या है? क्या ये स्त्रीधन केवल विवाहित महिलाओं के लिए होता है या गैर-शादीशुदा स्त्रियां भी इस दायरे में आती हैं?
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क्या कहा PM मोदी ने
स्त्रीधन के बारे में जानने से पहले ये जान लेते हैं कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी ने रैली के दौरान क्या कहा था। राजस्थान में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि "पहले जब इनकी सरकार थी तब उन्होंने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला हक मुसलमानों का है। इसका मतलब ये संपत्ति इकट्ठा करते किसको बांटेंगे? जिनके ज्यादा बच्चे हैं, उनको बांटेंगे। घुसपैठियों को बांटेंगे। क्या आपकी मेहनत का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा? आपको मंजूर है ये?"
उन्होंने आगे कहा था, "ये कांग्रेस का मेनिफेस्टो कह रहा है कि वो मां-बहनों के गोल्ड का हिसाब करेंगे। उसकी जानकारी लेंगे और फिर उसे बांट देंगे। और उनको बांटेंगे जिनको मनमोहन सिंह की सरकार ने कहा था संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। भाइयों-बहनों ये अर्बन नक्सल की सोच, मेरी मां-बहनों, ये आपका मंगलसूत्र भी नहीं बचने देंगे। ये यहां तक जाएंगे।"
लगभग दो सप्ताह पहले कांग्रेस का मेनिफेस्टो आया था। पार्टी ने इसमें वेल्थ डिस्ट्रिब्यूशन की बात की है यानी की दौलत का समान बंटवारा, या इतना बंटवारा कि गरीब की बेसिक जरूरतें पूरी हो जाएं। घोषणा पत्र जारी होने के बाद से बीजेपी लगातार उसके पॉइंट्स पर कांग्रेस को घेर रही है। अब देश की राजनीति का विषय मंगलसूत्र और स्त्रीधन पर केंद्रित हो गया है।
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क्या होता है स्त्रीधन?
स्त्रीधन एक कानूनी टर्म है जिसका मतलब होता है महिला के हक का धन, संपत्ति, कागजात और दूसरी वस्तुएं। आमतौर पर माना जाता है कि स्त्रीधन में वही चीजें शामिल हैं, जो शादी के दौरान औरत को मिलती हैं। लेकिन कानून के अनुसार ऐसा नहीं है। स्त्रीधन गैरशादीशुदा स्त्री का भी कानूनी अधिकार है। इसमें वे सारी चीजें आती हैं, जो किसी महिला को बचपन से मिलती रही हों। इसमें छोटे-मोटे तोहफे, सोना, कैश, सेविंग्स से लेकर तोहफे में मिली प्रॉपर्टी भी शामिल है। शादी के दौरान मिले तोहफों से लेकर वैध्व्य के दौरान मिली चीजें भी, स्त्रीधन में आती हैं। महिला के शादीशुदा न होने पर भी उसे मिले छोटे से बड़े सभी तोहफे इसी श्रेणी में आते हैं। इसमें चल-अचल सभी चीजें शामिल होती हैं।
किन कानूनों के तहत मिलता है अधिकार?
हिंदू महिला का स्त्रीधन का हक हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 14 और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 27 के तहत आता है। यह कानून उसे शादी से पहले, शादी के समय या उसके बाद मिलते रहे तोहफों और प्रॉपर्टी पर अधिकार देता है। वहीं घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 12 महिलाओं को उन मामलों में स्त्रीधन का अधिकार देती है जहां वे घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। इन कानूनों की मदद से घरेलू हिंसा का शिकार हुई महिला अपना हक वापस ले सकती है।
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स्त्रीधन रखने वाले केवल ट्रस्टी
कई बार ऐसा देखा जाता है कि महिलाओं के मंगलसूत्र को छोड़कर ज्यादातर स्त्रीधन उसके ससुरालवाले ये कहकर रख लेते हैं कि वे संभालकर रखेंगे। इस प्रस्थिति में कानून उन्हें स्त्रीधन का ट्रस्टी मानता है। कानून के अनुसार महिला जब चाहे अपना स्त्रीधन वापस ले सकती है। वो जबभी मांग करेगी, गहने या कैश उसे लौटाने होंगे और इसमें कानून उसका साथ देगा।
क्या स्त्रीधन को दान करने या बेचने का भी हक है?
किसी भी महिला के पास ये अधिकार है कि वो अपने स्त्रीधन यानी गहने, तोहफे या प्रॉपर्टी किसी दूसरे को तोहफे में दे सके या बेच सके। ससुरालवाले या पति कानूनन इसपर रोक नहीं लगा सकते, सिर्फ सलाह दे सकते हैं। महिला अगर चाहे तो अपनी ये संपत्ति पति को भी दे सकती है, अगर उसे कोई बड़ी जरूरत हो, लेकिन बाद में पति को वो संपत्ति महिला को वापस लौटानी होती है।
हालांकि, ये कानून तभी मान्य होते हैं जब स्त्री के पास अपनी संपत्ति का लेखाजोखा रहे। जैसे, स्त्रीधन की लिस्ट हो, साथ में उसकी तस्वीरें भी हों। अगर महिला ने अपनी संपत्ति किसी लॉकर में रखी हो, तो उसका नंबर उसे याद रहना चाहिए। कई बार इसमें कुछ कन्फ्यूजन भी हो जाता है। जैसे उदाहरण के तौर पर, सास-बहू ने एक ही लॉकर में गहने रख दिए। बाद में तनाव होने पर, अगर गहनों का डॉक्युमेंटेशन न हो तो स्त्रीधन के बंटवारे में मुश्किल आ सकती है।
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