कांग्रेस-लेफ्ट से नाराज होकर नहीं! ममता ने चुनावी गणित देखकर बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का लिया फैसला?
Mamata Banerjee News Today Hindi: टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा करके इंडिया ब्लॉक के अन्य सहयोगियों के पांव के नीचे से जमीन खींच ली है।
सामने से तो यही लग रहा है कि ममता लेफ्ट से तो नाराज थी हीं, कांग्रेस नेताओं की बयाबाजी ने भी उन्हें इतना सख्त फैसला लेने पर मजबूर कर दिया।

चुनावी गणित से प्रभावित है ममता बनर्जी का फैसला
लेकिन, सियासत की दुनिया में वो भले ही अपनी तुनकमिजाजी के लिए जानी जाती हों, लेकिन उनका अकेले चुनाव लड़ने का फैसला विशुद्ध चुनावी गणित से प्रभावित लग रहा है।
बंगाल में लगातार खिसकती गई है कांग्रेस-लेफ्ट की जमीन
अगर 2019 के लोकसभा चुनावों से लेकर 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजों को देखें तो राज्य में कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां लगातार कमजोर ही होती जा रही हैं।
पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और वामपंथी दलों ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था और उन्हें सिर्फ 10.04% वोट मिल पाए थे। जबकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों अलग-अलग लड़कर इससे ज्यादा वोट लाए थे।
तब कांग्रेस को करीब 6% और सीपीएम की अगुवाई वाले लेफ्ट गठबंधन को लगभग 7% वोट मिले थे। यानी दोनों के साथ होने के बावजूद दो वर्षों के अंदर इनका जनाधार लगभग 3% खिसक चुका था।
बंगाल में टीएमसी लगातार मजबूत होती गई है
जहां तक टीएमसी की बात है तो 2019 में उसे करीब 44% वोट मिले थे, लेकिन 2021 में उसका वोट शेयर करीब 4% बढ़कर 48% पहुंच गया।
2019 के मुकाबले 2021 में कमजोर हुई बीजेपी
लेकिन, बीजेपी का वोट शेयर इन दो वर्षों में करीब 41% से गिरकर मात्र 38% रह गया। टीएमसी को राज्य का यह चुनावी गणित अपने माफिक लग रहा है।
इंडिया ब्लॉक के लिए सीटें नहीं छोड़ने से टीएमसी की बढ़ेगी संभावना
पहली स्थिति में टीएमसी के नजरिए से देखें तो यह फैसला उसके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। क्योंकि, कांग्रेस के खिसकते जनाधार के बीच उसके लिए एक भी सीट छोड़ना उसे नुकसानदेह लग रहा था। जबकि, कांग्रेस जीती हुई सीटों से भी ज्यादा पर दावेदारी जता रही थी।
अगर सभी 42 सीटों पर लड़ेगी तो ज्यादा सीटें जीतने की संभावना बढ़ेगी। वैसे बीजेपी ने 35 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है, लेकिन ममता को लगता है कि उसे अकेले टक्कर देना गठबंधन में उलझने से उसके लिए ज्यादा आसान होगा।
बीजेपी को ज्यादा सीटें मिलीं तो भी बंगाल में ममता सुरक्षित
दूसरी स्थिति ये हो सकती है कि इससे बीजेपी को बंगाल में थोड़ी ज्यादा सीटें मिल जाएं। तो भी बंगाल की राजनीति में तत्काल ममता की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। वहां विधानसभा चुनाव 2026 में होने हैं। टीएमसी के लिए स्थिति जस की तस रहेगी।
कांग्रेस को अभी भी 'ममता' की उम्मीद
लगता है कि कांग्रेस को ममता की इस रणनीति की भनक लग गई है, इसलिए वह उन्हें मनाने-रिझाने में पूरा जोर लगा चुकी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उनकी ओर से अलग चुनाव लड़ने की घोषणा पर कहा है कि लंबी यात्रा में स्पीड ब्रेकर और लाल बत्तियां भी आती हैं।
जयराम ने कहा है, 'आपने उनका पूरा बयान नहीं पढ़ा है। उनका पूरा बयान है कि वह बीजेपी को हराना चाहती हैं और इसके लिए वह कदम पीछे नहीं खीचेंगी। इस बीच हम (भारत जोड़ो न्याय यात्रा के साथ) पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर रहे हैं। हम लंबी यात्रा पर हैं, स्पीड ब्रेकर आते हैं, लाल बत्ती आती है।'












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