Lok Sabha Election: वंशवादी राजनीति से क्यों डरने लगी हैं ममता बनर्जी, क्या पीएम मोदी का असर है?
Bengal Lok Sabha Election: जिस भाई को ढाई साल की उम्र से संभाला था, उनसे ममता बनर्जी आखिर इतनी नाराज क्यों हो गईं कि उन्हें अपने जीवन से अलग कर देने की बात कहनी पड़ गई!
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ने अपने सबसे छोटे भाई बाबुन (स्वपन) बनर्जी के बारे में यहां तक कहा कि, 'मैं उससे सारे रिश्ते तोड़ती हूं। चुनावों के दौरान अगर मेरे परिवार का हर व्यक्ति टिकट मांगेगा तो यह परिवारतंत्र हो जाएगा, लेकिन मैं मानुष तंत्र में विश्वास करती हूं।'

छोटे भाई पर बहुत ज्यादा कठोर हो गईं ममता!
दरअसल, बाबुन ने हावड़ा लोकसभा सीट से फुटबॉल खिलाड़ी और तीन बार के सांसद प्रसून बनर्जी को टिकट देना का विरोध किया था। इसके बाद यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
अलबत्ता प्रसून के खिलाफ उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने के संकेत दिए भी थे, लेकिन इस बात ने ममता को अपने छोटे भाई से इतना नाराज कर दिया कि उन्होंने उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानने से भी इनकार कर दिया।
ममता के भाई ने हावड़ा से टीएमसी उम्मीदवार पर उठाए थे सवाल
वैसे बाबुन ने बुधवार को कहा था, 'जबतक दीदी जीवित हैं, मैं किसी दूसरी पार्टी में शामिल नहीं हो सकता। प्रसून हावड़ा के लिए सही पसंद नहीं हैं।'
'मैं 'मानवताबाद' का पालन करती हूं, 'परिवारबाद' का नहीं'
लेकिन, उनकी यही बात ममता को पसंद नहीं आई। वो बोलीं, 'जब मैं एक राजनीतिक दल में हूं, मैं करोड़ों लोगों के साथ काम करती हूं। मेरा कोई परिवार नहीं है। मा माटी मानुष मेरा परिवार है। मैं उसे अपने परिवार का हिस्सा नहीं मानती। मैंने उसे मुझसे और अपने परिवार से पूरी तरह से अलग कर दिया है। कृप्या उसे मेरा भाई ना बताएं।....वह कहीं भी जा सकता है। मैं 'मानवताबाद' का पालन करती हूं, 'परिवारबाद' नहीं।'
जिस भाई को बड़ा किया, उसके प्रति कठोर होना पड़ा!
टीएमसी चीफ ने बताया कि 'जब मेरे पिता का निधन हो गया, वो (बाबुन) सिर्फ ढाई साल का था। मैं दूध के एक डिपो में काम करती थी, जिसके 45 रुपए मिलते थे। उससे मैंने इसे बड़ा किया।'
वंशवादी राजनीति से क्यों डर रही हैं ममता बनर्जी?
टीएमसी चीफ ने अपने छोटे भाई को अपने परिवार से अलग करने को 'वंशवादी राजनीति के खिलाफ' अपने स्टैंट की तरह पेश किया।
उन्होंने कहा, 'मैंने अपने रुख (परिवारवाद के विरोध) का जीवंत उदाहरण दिया है। आगे हमारी यह जिम्मेदारी है कि प्रसून की भारी मतों से जीत सुनिश्चित करें....'
क्या पीएम मोदी का असर है?
दरअसल, ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के तृणमूल सरकार में बढ़ते प्रभुवत्व को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह उनपर लगातार निशाना साधते रहे हैं।
अब ममता ही नहीं, उनकी पार्टी भी बाबुन बनर्जी की घटना से यह दिखाना चाहते हैं कि ममता पर परिवारवाद की राजनीति का आरोप लगाना सही नहीं है।
भाजपा के खिलाफ सबसे मुश्किल चुनाव लड़ रही हैं ममता!
हाल ही में चुनाव रणनीतिकार और 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल की जीत सुनिश्चित कर चुके प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू में कहा है कि भारतीय जनता पार्टी इस बार बंगाल में अप्रत्याशित परिणाम दे सकती है।
खासकर के संदेशखाली की घटनाओं की वजह से ममता सरकार की छवि पर जिस तरह का बट्टा लगा है और केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून लागू करके बहुत बड़े दलित वोट बैंक को खुश करने की कोशिश की है, उसके बाद ममता किसी तरह का राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहतीं।
टीएमसी के अंदर के एक व्यक्ति ने ममता के भाई की घटना को लेकर कहा है, 'इन बातों से पार्टी को बेवजह शर्मिंदा होना पड़ता है। ये सब वास्तव में खराब समय में दीदी की पीठ में छुरा घोंपने की तरह है...वह जितनी ही क्रोधित हैं, उतनी ही आहत भी....।'












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