Lok Sabha Chunav: बंगाल में कितनी सीटों से खुश है कांग्रेस, लेफ्ट से किन लोकसभा क्षेत्रों पर फंस रहा है पेच?
West Bengal Lok Sabha Election 2024 News: बंगाल में इंडिया ब्लॉक की सबसे बड़ी सदस्य टीएमसी सभी 42 सीटों पर उम्मीदवार घोषित करके गठबंधन से पहले ही अलग हो चुकी है। अब डील कांग्रेस, लेफ्ट फ्रंट और इंडियन सेक्युलर फ्रंट के बीच में हो रही है। इनमें सीटों की संख्या तो लगभग पक्की हो चुकी है, लेकिन कुछ खास सीटों को लेकर विवाद गंभीर है।
जानकारी के मुताबिक लेफ्ट फ्रंट चाहता है कि कांग्रेस सिर्फ 10 सीटों पर ही लड़ने के लिए राजी हो जाए, वैसे उसे 12 सीटें मिलेंगी तो वह इससे ही पूरी तरह से संतुष्ठ होकर काफी खुश हो सकती है।

सिर्फ 12 सीटों पर कांग्रेस हो जाएगी खुश!
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, 'हमें खुशी है कि लेफ्ट फ्रंट हमारी 12 सीटों की डिमांड मांगने के लिए राजी हो गया है। हम सीपीएम के लिए मुर्शिदबाद छोड़ने के लिए तैयार हैं, अगर पुरुलिया और रायगंज हमारे लिए छोड़ दिया जाए।'
कुछ सीटों पर क्यों फंस रहा है पेच?
2019 के लोकसभा चुनाव में मुर्शिदाबाद में कांग्रेस प्रत्याशी (25.99%) को सीपीएम उम्मीदवार (12.43%) से दोगुने से भी ज्यादा वोट मिले थे। वहीं पुरुलिया में कांग्रेस को 6.23% वोट आए थे, जबकि ऑल इंडिया फॉर्वर्ड ब्लॉक को 5.05% वोट हासिल हुए थे। हालांकि, रायगंज में तब सीपीएम को 14.24% वोट मिले थे और कांग्रेस प्रत्याशी को सिर्फ 6.55% ही वोट मिला था।
कांग्रेस को 10 और आईएसएफ को 6 सीटें देने के लिए राजी!
बंगाल में टीएमसी ने कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट से जरूर हाथ खींच लिए हैं, लेकिन इन्हें इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) जैसा सहयोगी जरूर मिल गया है। जानकारी के मुताबिक लेफ्ट फ्रंट आईएसएफ के लिए 6 सीटें तक छोड़ने को तैयार है और इसके नेता और विधायक पीरजादा नौशाद सिद्दीकी डायमंडर हार्बर में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ ताल ठोक सकते हैं।
क्या बंगाल में कांग्रेस के लगभग बराबरी में खड़ा हो रहा है आईएसएफ?
जानकारी के अनुसार शुरू में आईएसएफ 14 सीटों की मांग कर रहा था, लेकिन बाद में 8 सीटों की बात कहने लगा। लेफ्ट फ्रंट के नेता इन कोशिशों में लगे हैं कि यह किसी तरह से जादवपुर और मुर्शिदाबाद में अपने उम्मीदवार न उतारे।
बंगाल में क्यों बढ़ चुकी है आईएसएफ की सियासी हैसियत?
दरअसल, 2021 में बंगाल विधानसभा चुनाव में लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस को जहां एक सीट भी नहीं मिली थी, वहीं यह पार्टी एक सीट जीत गई थी और जिन सीटों पर इसने उम्मीदवार उतारे थे, उसकी तुलना में जिन सीटों पर लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस लड़ी थी, वहां उनके वोट भी कम आए थे।
लेफ्ट फ्रंट के अंदर भी कुछ सीटों के लिए ठनी हुई है
लेफ्ट फ्रंट की दिक्कत ये है कि वह कांग्रेस और आईएसएफ से सीटें फाइनल करने से पहले वामपंथी दलों के बीच आपस में सहमति बना लेना चाहता है। क्योंकि, यहां भी काफी गतिरोध की बात सामने आ रही है। जैसे औल इंडिया फॉर्वर्ड ब्लॉक पुरुलिया से दावा छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।
पुरुलिया ही नहीं, जानकारी के मुताबिक पार्टी के नेता कूचबिहार और बारासात सीटों पर भी अपनी दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, जिसे पार्टी अपनी परंपरागत सीट मानती है और किसी भी कीमत पर ये सीटें कांग्रेस या आईएसएफ को देने के लिए राजी नहीं है।
वहीं बशीहरहाट सीट को लेकर सीपीआई और सीपीएम के बीच आपस में टकराव की स्थिति पैदा होने की बात सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक सीपीएम यहां से निरापद सरदार को टिकट देना चाहती है, जो संदेशखाली कांड के खिलाफ प्रदर्शन की वजह से गिरफ्तार कर लिए गए थे। लेकिन, सीपीआई यह सीट छोड़ने को तैयार नहीं है।
उत्तर 24 परगना के एक सीपीएम नेता के मुताबिक, 'हमने सरदार को लेकर एक आंतरिक सर्वे करवाया है। यदि सीपीआई हमारे लिए यह सीट नहीं छोड़ती है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा, क्योंकि वे संदेशखाली की घटना के बाद वामपंथ का चेहरा बनकर सामने आए हैं।'
वैसे कांग्रेस के इंतजार में थक कर इसी हफ्ते की शुरुआत में लेफ्ट पार्टियों ने 17 उम्मीदवार घोषित भी कर दिए हैं और संभावना है कि 7 और नामों की घोषणा जल्द हो सकती है।
सवाल खासकर कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी को लेकर उठ रहा है। क्योंकि, इसने टीएमसी से गठबंधन टूटने के बाद अपनी डिमांड काफी कम कर दी है, फिर भी मनपसंद की सीटें लेना भारी पड़ रहा है।












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