Lok Sabha Election 2024: 230 सीटों पर सहयोगियों के सामने सरेंडेर करेगी कांग्रेस? 'इंडिया' का सबसे बड़ा रोड़ा

इंडिया ब्लॉक में सीटों के बंटवारे में लगातार देरी हो रही है। सहयोगी दलों के नेताओं की ओर से तीखी बयानबाजियों का दौर जारी है। सबसे ज्यादा पेच कांग्रेस को लेकर फंस रहा है।

वह ज्यादा से ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहती है, लेकिन 230 सीटें ऐसी हैं, जहां उसे सहयोगियों के सामने एक-एक सीट के लिए तरसना पड़ सकता है।

congress seat sharing

230 सीटों में से लगभग 40 सीटों पर मानेगी कांग्रेस?
ये 230 सीटें 6 राज्यों की हैं, जहां आज कांग्रेस पार्टी काफी हद तक सहयोगी दलों की बैसाखियों के भरोसे है। मजे की बात ये है कि कांग्रेस इनमें से कम से कम 100 सीटें अपने लिए चाहती है। लेकिन, जमीनी हालात ऐसे हैं कि उसे 40 सीटें भी मुश्किल से मिलती दिख रही है।

ये 230 सीटें जिन राज्यों की हैं, उनमें यूपी (80), महाराष्ट्र (48),पश्चिम बंगाल (42), बिहार (40), पंजाब (13) और दिल्ली (7) शामिल हैं। मतलब, लोकसभा की 545 सीटों में से आधे से भी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस सहयोगियों के सामने मोहताज बनती दिख रही है।

यूपी में कांग्रेस करीब आधी सीटें चाहती है- मीडिया रिपोर्ट
बीजेपी को टक्कर देना है और केंद्र में सरकार की अगुवाई करनी है तो कोई भी पार्टी उत्तर प्रदेश को नजरअंदाज नहीं कर सकती। 2019 में समाजवादी पार्टी ने बीएसपी को अपने से एक सीट ज्यादा यानी 38 सीटों पर लड़ने का मौका दिया था।

जानकारी के मुताबिक कांग्रेस का मंसूबा है कि जब बीएसपी को सपा 38 सीटें दे सकती है तो उसे क्यों नहीं। लेकिन, जानकारों और कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अगर अखिलेश यादव कांग्रेस के प्रति बहुत उदार रवैया अपनाने को भी तैयार हो जाएं तो भी वह उसे चुनाव लड़ने के लिए 10 से ज्यादा सीटों का ऑफर देंगे, इसकी बहुत कम संभावना है।

महाराष्ट्र में भी नाक में दम करने लगी है उद्धव की शिवसेना
यूपी के बाद महाराष्ट्र में सबसे अधिक सीटें हैं। यहां शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने जिस तरह से अचानक सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस को लेकर पैंतरेबाजी शुरू की है, उससे लगता है कि कांग्रेस के लिए यह राज्य भी टेढ़ी खीर बनने वाला है।

उद्धव ठाकरे जानते हैं कि पिछली बार की तरह 23 सीटें लड़ने की उनकी पार्टी की दावेदारी बेमानी है। न तो कांग्रेस इसके लिए तैयार हो सकती है और न ही शरद पवार की एनसीपी।

सबसे संभावित परिस्थिति में इस समझौते की गुंजाइश यह बताई जा रही है कि तीनों पार्टियां बराबर यानी 16 के फॉर्मूले के लिए तैयार हो जाएं। लगता है कि राउत भी इसी आंकड़े के लिए अभी से दबाव बनाने की कोशिश में हैं।

बंगाल में कैसे गलेगी कांग्रेस की दाल?
पश्चिम बंगाल में तो कांग्रेस के लिए ज्यादा गुंजाइश भी नहीं है। ममता बनर्जी 2 सीटों से ज्यादा देने के लिए तैयार होंगी, इसकी संभावना नहीं के बराबर है। ऊपर से ईडी पर हमले के बाद दोनों दलों में जो बयाबाजी हुई है, उसने माहौल को और बिगाड़ दिया है।

कांग्रेस की दिक्कत ये है कि वह न तो विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन का हवाला दे सकती है और न ही पिछले लोकसभा चुनावों का। वह 2019 में 2 सीटें जरूर जीती थी। लेकिन, अधिकतर सीटों पर तो लेफ्ट गठबंधन को उससे ज्यादा वोट प्राप्त हुए थे।

बिहार में कांग्रेस को सबसे बेहतर डील की संभावना
अलबत्ता बिहार में कांग्रेस को सबसे अच्छी डील मिलने की संभावना लग रही है। लेकिन, यहां भी लालू और नीतीश उसे 5 सीटों से ज्यादा देंगे, इसकी संभावना कम ही है।

पंजाब में गठबंधन हो पाना बड़ी चुनौती
पंजाब में कांग्रेस को अपनी नई-नवेली दोस्त आम आदमी पार्टी के साथ डील करनी पड़ रही है। यहां की 13 सीटों में से पिछली बार कांग्रेस 8 जीती थी, और 1 पर आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार जीता था। लेकिन, पांच वर्षों के दौरान पंजाब की राजनीति पूरी तरह से पलट चुकी है।

यहां कांग्रेस की प्रदेश इकाई तो किसी भी सूरत में आम आदमी पार्टी के साथ समझौते को तैयार भी नहीं है; और न ही आम आदमी पार्टी कांग्रेस के लिए आसानी से एक भी सीट छोड़ने को तैयार लग रही है। तथ्य यह है कि दिल्ली और पंजाब में इसी पार्टी ने कांग्रेस का सफाया भी किया है।

ऐसे स्थिति में अगर कांग्रेस आला कमान अपनी नई दोस्त के सामने सरेंडर को भी राजी हो जाए तो भी उसे जीती हुई 8 सीटें मिलेंगी, इसकी संभावना बहुत ही दुर्लभ है।

पंजाब की तरह दिल्ली में भी कांग्रेस की प्रदेश इकाई आम आदमी पार्टी के साथ किसी भी तरह से तालेमल के पक्ष में नहीं रही है। लेकिन, यहां पिछले कुछ महीने से जो लगातार संकेत मिले हैं, उसके बाद हो सकता है कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस को 7 में से ज्यादा से ज्यादा 3 सीटें लड़ने का ऑफर दे सकती है।

ऐसे में अगर बहुत ही संभावित नजरिए से भी देखें और पंजाब में भी दोनों दलों के बीच कोई सहमित का रास्ता निकल जाए तो भी कांग्रेस इन 6 राज्यों की 230 में से 40 से अधिक सीटों पर लड़ पाएगी, यह संभावना नजर नहीं आती और कांग्रेस इतनी कम सीटों पर तैयार होगी यह बहुत बड़ा सवाल है।

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