Lok Sabha Election 2024: ओडिशा में क्या हैं बीजेडी, भाजपा और कांग्रेस की चुनौतियां? समझिए समीकरण
2024 के लोकसभा चुनाव में अब थोड़ा ही वक्त बचा है और ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजेडी), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस जैसे प्रमुख राजनीतिक दलों के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं।
मौजूदा समीकरणों को देखें तो सत्तारूढ़ बीजेडी के सामने इस बार विपक्ष की तुलना में चुनौतियां कहीं ज्यादा हैं। वहीं विपक्षी दलों की पहली जरूरत, चुनाव प्रचार में आगे बढ़ने से पहले संगठन के मुद्दों को ठीक करने की है।

बीजेडी की अगर बात करें, तो 2024 के लिए उसके सामने चुनौतियों की लिस्ट काफी लंबी है। इनमें जहां टिकटों का वितरण, सत्ता विरोधी लहर, पार्टी की अंदरूनी कलह और दागी नेता जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं, तो वहीं पीएम नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता भी उसके सामने एक बड़ी चुनौती है। हालांकि बीजेडी का कहना है कि वो इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम है।
बीजेडी नेता देबी प्रसाद मिश्रा ने कहा, 'चुनौतियां हर चुनाव में और हमेशा रहती हैं। हम चुनौतियों से निपटे हैं और जनता का आशीर्वाद हमें मिला है। हम पूरी ईमानदारी और एक समर्पित भाव से ओडिशा के लोगों की सेवा कर रहे हैं। जिस पार्टी के समर्थकों की संख्या ज्यादा होगी, उसके लिए टिकट के ज्यादा दावेदार होना भी स्वाभाविक है।'
वहीं दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में शानदार जीत हासिल करने वाली भाजपा का मनोबल बढ़ा हुआ है। भाजपा लगातार दावा कर रही है कि ओडिशा में उसका वोट शेयर बढ़ रहा है और इसीलिए पार्टी का फोकस 2024 के लोकसभा चुनावों तो लेकर भी प्रदेश में बढ़ गया है। हाल ही में तीन दिवसीय विचार-मंथन सत्र के जरिए स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने 2024 में ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं को हर वार्ड में 50 प्रतिशत वोट शेयर का लक्ष्य रखने को कहा गया है।
पार्टी की चुनौतियों को लेकर विधानसभा में विपक्ष के नेता जयनारायण मिश्र ने कहा, 'चुनाव के दौरान सत्ताधारी दल की तरफ से सरकारी मशीनरी, धन और बाहुबल का इस्तेमाल हमारे लिए मुख्य चुनौतियां हैं। जनता के बीच अपना आधार बढ़ाकर हम जमीनी स्तर पर इन चुनौतियों से पार पाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे कार्यकर्ता हर परिवार तक पहुंच रहे हैं।'
अब बात आती है कांग्रेस की, जिसने विधानसभा में अपनी 9 सीटों से बढ़कर 90 तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। हालांकि पार्टी के लिए ये इतना आसान नहीं है। कांग्रेस में गुटबाजी अब गंभीर होती जा रही है। इसके अलावा और भी चुनौतियां हैं, जिनमें जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करना, चुनाव के दौरान कॉर्डिनेशन बनाना, साथ ही राज्य और केंद्र सरकार की विफलताओं के बारे में लोगों को समझाना। इसके अलावा टिकटों का वितरण भी उसके लिए एक बड़ी चुनौती है।
ओडिशा कांग्रेस के अध्यक्ष शरत पटनायक ने बताया कि सभी पंचायतों में लगभग 90 फीसदी बूथ कमेटियों का गठन किया जा चुका है। हम घर-घर जाकर लोगों के सामने भाजपा और बीजेडी की नाकामियों को उजागर कर रहे हैं।












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