Lok Sabha Election: चुनाव से पहले ही कश्मीर में कैसे आउट हो गई कांग्रेस, ज्यादा से ज्यादा क्या मिलेगा?

Lok Sabha Election 2024 Jammu and Kashmir: लोकसभा चुनाव से पहले जम्मू और कश्मीर में विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक के लिए एक तस्वीर जो अभी तक सामने उभर कर आ रही है, उससे एक बात साफ है कि कम से कम कश्मीर घाटी की तीनों सीटों से कांग्रेस पहले ही बाहर हो गई है।

पीडीपी ने घाटी की तीनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर पहले ही गठबंधन के तार-तार होने का ऐलान कर दिया था। लेकिन बाद में नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें भरोसा दिया है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी उनके उम्मीदवारों को बिन शर्त समर्थन देगी।

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कश्मीर घाटी में नेशनल कांफ्रेंस, जम्मू और उधमपुर में कांग्रेस लड़ेगी- उमर अब्दुल्ला
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों ही पार्टियां मिलकर इस चुनाव में जम्मू और कश्मीर की सभी 5 सीटें जीतने की कोशिश करेगी। कांग्रेस के साथ तालमेल के बारे में विस्तार से बताते हुए उमर ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने नेशनल कांफ्रेंस को कश्मीर घाटी की तीनों सीटों में पर पूर्ण समर्थन का वादा किया है और इसके बदले में उनकी पार्टी जम्मू डिविजन की दोनों ही सीटों पर कांग्रेस की जीत के लिए पूरा दम लगा देगी।

पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर ने जो कुछ कहा है, उसके अनुसार श्रीनगर, बारामूला और अनंतनाग-राजौरी लोकसभा की तीनों सीटिंग सीटों पर नेशनल कांफ्रेंस अपने उम्मीदवार उतारेगा। जबकि, जम्मू और उधमपुर में कांग्रेस को अपने प्रत्याशी देने का अवसर दिया जाएगा।

अब्दुल्ला ने कहा, 'कांग्रेस ने हमें स्पष्ट रूप से बताया है कि वह कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के तीनों उम्मीदवारों का समर्थन करेगी। एक या दो दिन में यह साफ हो जाएगा कि नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस संयुक्त रूप से जम्मू और कश्मीर में सभी पांच उम्मीदवारों की सफलता सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे- कश्मीर में तीन नेशनल कांफ्रेंस उम्मीदवारों की और जम्मू में दो कांग्रेस प्रत्याशियों की।'

चुनाव से पहले ही कश्मीर घाटी से कांग्रेस हुई आउट!
2019 में कांग्रेस पार्टी ने कश्मीर घाटी की तीन सीटों में से सिर्फ श्रीनगर में नेशनल कांफ्रेस प्रत्याशी फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ प्रत्याशी नहीं दिया था। जबकि, अनंतनाग और बारामूला दोनों ही सीटों पर वह चुनाव लड़ी थी। अनंतनाग में तो कांग्रेस उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहा था और पीडीपी सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती तीसरे नंबर पर खिसक गई थीं।

जम्मू और उधमपुर में पिछली बार भी नहीं लड़ी पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस
जबकि, जम्मू और उधमपुर में तो पिछली बार भी नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी चुनाव मैदान में नहीं उतरी थी। भाजपा के मुकाबले में कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार उतारे जरूर थे। लेकिन, दोनों ही सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों की जीत का मार्जिन बहुत ही ज्यादा था।

कश्मीर घाटी की तीनों सीटों पर पीडीपी-एनसी दोनों लड़ेगी
भाजपा के गढ़ में तब्दील होने की वजह से इस बार कांग्रेस शुरू से चाह रही थी कि इंडिया ब्लॉक के तहत वह जम्मू की एक ही सीट पर चुनाव लड़े और इसके बदले में पीडीपी और एनसी घाटी में उसके लिए एक सीट छोड़ दे। उधर पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती पहले ही साफ कर चुकी हैं कि नेशनल कांफ्रेंस घाटी की तीनों सीटों में से एक भी नहीं छोड़ेगा, इसलिए उनकी पार्टी भी कश्मीर की तीनों ही सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा क्या मिलेगा?
अगर कांग्रेस ने उमर अब्दुल्ला के कहे मुताबिक कश्मीर घाटी में गठबंधन धर्म निभाया और तीन में से एक भी सीट पर नहीं लड़ी तो वह चुनाव से पहले ही रेस से बाहर हो जाएगी। उसे ज्यादा से ज्यादा भाजपा के गढ़ बन चुके जम्मू और उधमपुर में इंडिया ब्लॉक की सहयोगियों के समर्थन का भरोसा ही मिल सकता है। कश्मीर में 19 अप्रैल से पांच चरणों में चुनाव करवाए जा रहे हैं।

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