Lok Sabha Election: BJP-NDA के लिए पहले चरण का चुनाव क्यों है सबसे ज्यादा मुश्किल?
Lok Sabha Election News: चुनाव आयोग ने इस बार देश के पहले आम चुनाव के बाद सबसे ज्यादा लंबा इलेक्शन शेड्यूल तय किया है, जो 19 अप्रैल से लेकर 1 जून तक के बीच डेढ़ महिनों में करवाया जाना है।
अगर 2019 के लोकसभा चुनावों के परिणामों के आधार पर देखें तो सात चरणों में हो इस चुनाव के लिए पहला चरण इस बार भी भाजपा और एनडीए के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल साबित हो सकता है।

पहले चरण में सबसे ज्यादा 102 सीट
सबसे बड़ी बात कि पहले चरण में लोकसभा की 102 सीटों पर चुनाव करवाने की घोषणा हुई, जो सबसे ज्यादा है। इस चरण में कुल 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में इतनी सीटों वोट डाले जाएंगे। कुछ राज्यों में सभी सीटों पर चुनाव होंगे और कई राज्यों में कुछ सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
2019 में इन 102 सीटों पर इंडिया-एनडीए में था कांटे का मुकाबला
इस चरण को बीजेपी और उसकी अगुवाई वाले एनडीए के लिए सबसे मुश्किल चुनाव इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि 2019 के चुनावों में इन 102 सीटों पर एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच करीब-करीब कांटे का मुकाबला रहा था।
तमिलनाडु के सभी 39 सीटों पर इसी चरण में चुनाव
पहले फेज में जिन 102 सीटों पर चुनाव होंगे, उनमें से एनडीए को तब 50 सीटें मिली थीं, वहीं विपक्षी इंडिया ब्लॉक को 48 सीटों पर सफलता मिली थी। 4 सीटें अन्य दलों के खाते में गई थीं।
इस चरण में एनडीए के लिए सबसे कठिन चुनौती वाला राज्य तमिलनाडु है, जहां सभी 39 सीटों पर 19 अप्रैल को ही वोट डाले जाएंगे। पिछली बार एआईएडीएम को 1 सीट मिली भी थी, लेकिन इस बार वह भी बीजेपी के गठबंधन से अलग हो चुकी है।
इस चरण में अगर एनडीए अन्य राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत भी कर ले, लेकिन जबतक तमिलनाडु में सीटें नहीं मिलेंगी, पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद मुश्किल साबित होगी।
अन्य 6 चरणों की सीटों पर एनडीए को मिली थी जबर्दस्त बढ़त
लेकिन, अन्य सभी 6 चरणों में एनडीए, पिछली बार इंडिया गठबंधन पर बहुत ज्यादा भारी पड़ा था। मसलन, 26 अप्रैल को दूसरे चरण में जिन 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 89 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, उनमें से पिछली बार एनडीए 61 सीटों पर जीता था। जबकि, इंडिया ब्लॉक को सिर्फ 23 सीटें मिली थीं और 4 अन्य के खाते में गई थी।
तीसरे चरण की 94 में से 84 सीटें एनडीए के पास
तीसरे चरण में 7 मई को 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 94 सीटों पर वोटिंग होगी। इनमें से 84 सीटें अभी एनडीए के पास है और इंडिया ब्लॉक के पास 8 ही सीटें हैं। अन्य के पास 2 सीटें हैं।
चौथे चरण की 96 सीटों में इंडिया को मिली थी सिर्फ 11 सीट
13 मई को चौथे चरण में 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 96 सीटों के लिए मतदान होना है। इनमें से एनडीए पिछली बार 47 सीटें जीत गया था, वहीं इंडिया ब्लॉक को सिर्फ 11 सीटें मिली थीं। यहां 38 सीटें अन्य दलों के खातों में गई थीं, जो इन दोनों गठबंधनों के हिस्सा नहीं थे।
पांचवें चरण की 49 सीटों में 41 पर जीता था एनडीए
20 मई को पांचवें चरण में 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लोकसभा की 49 सीटों पर चुनाव होंगे। इनमें से पिछली बार एनडीए 41 सीटें जीता था और इंडिया ब्लॉक के भाग्य में सिर्फ 6 सीटें आई थीं। 2 सीटों पर अन्य उम्मीदवारों की जीत हुई थी।
छठे चरण की 57 सीटों पर सिर्फ 4 पर ही सिमटा था इंडिया ब्लॉक
25 मई को छठे चरण में 7 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की 57 सीटों के लिए मतदान होगा। इनमें से 44 सीटों पर एनडीए ने कब्जा किया था और सिर्फ 4 पर ही इंडिया ब्लॉक को सफलता मिली थी। अन्यों के खाते में 9 सीटें गई थीं।
अंतिम चरण की 57 सीटों में एनडीए 32 पर जीता था
सातवें और अंतिम चरण में 1 जून को 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 57 सीटों पर मतदान होगा। 2019 में इन सीटों में से 32 पर एनडीए जीता था और इंडिया ब्लॉक को सिर्फ 19 सीटें ही मिली थीं। 6 सीटें अन्य दलों के खातों में गई थी।
इस तरह से पिछले लोकसभा चुनावों के हिसाब से पहले चरण में अपने प्रदर्शन में सुधार करना एनडीए के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण है। अन्य चरणों में जहां उसके पास ज्यादा सीटें पहले से हैं, उन्हें बचाना भी चुनौती भरा साबित हो सकता है। लेकिन पिछली बार के चुनाव परिणाम से लगता है कि वहां उसका जनाधार मजबूत जरूर है।












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