Lok Sabha Election 2024: 'दूर' की सोच रही कांग्रेस! 'इंडिया' में अपनाएगी 'तू डाल-डाल,मैं पात-पात' वाली रणनीति
कांग्रेस पार्टी विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक में अपने दबदबे को किसी भी कीमत पर हल्का नहीं होने देना चाहती। पार्टी को पता है कि सीटों के बंटवारे के दौरान तोल-मोल करना फिलहाल उसके लिए बहुत आसान नहीं रहने वाला है। इसलिए वह बहुत दूर की सोच रही है।
इंडिया ब्लॉक में 28 पार्टियां हैं और अभी तक सीटों के बंटवारे को लेकर इनके बीच से कोई ठोस फॉर्मूला सामने नहीं आ पाया है। जितने मुंह, उतनी बातें वाली स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस के दिग्गजों को मालूम है कि सहयोगियों को अपनी बात के लिए मनाना इतना भी आसान नहीं रहने वाला है।

कांग्रेस प्रत्येक लोकसभा सीटों का करेगी आकलन
कांग्रेस नेताओं की कोशिश है कि जब पार्टी की प्रदेश इकाइयों से सीट बंटवारे का मसला राष्ट्रीय नेतृत्व के पास आ जाए तो इंडिया ब्लॉक के सहयोगी नेताओं के सामने अपनी दावेदारी को मजबूती के साथ रखने का ठोस आधार भी रहना चाहिए।
इसके लिए पार्टी देश की सभी लोकसभा सीटों में पर्यवेक्षकों को उतारने जा रही है, जिसकी जानकारी खुद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दी है।
सहयोगियों के सामने ठोस दावेदारी रखने की तैयारी
पार्टी का कहना है कि इससे उसे प्रत्येक लोकसभा सीटों पर उसकी अपनी स्थिति का पता लगाने और पार्टी की चुनाव लायक तैयारियों का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।
पर्यवेक्षक जो रिपोर्ट देंगे उसे आधार मानकर केंद्रीय नेतृत्व सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे के लिए बातचीत की टेबल पर बैठ सकता है। वह कह सकता है कि फलां सीट पर किस तरह से उसके दावे को नकारा नहीं जा सकता।
खड़गे के मुताबिक, 'कांग्रेस 500 सीटों पर तैयारी कर रही है। पार्टी इन 500 सीटों पर पर्येवक्षक नियुक्त कर रही है, ताकि हम इन सभी 500 सीटों के लिए तैयार रह सकें। आखिरकार, जब हम इंडिया के सहयोगियों के साथ सीट-बंटवारे पर चर्चा करेंगे, तो हम तय कर पाएंगे कि इनमें से किस सीट पर हम चुनाव लड़ें और किन पर सहयोगी दल।'
'कमजोर' सीटें लड़ने से बचना चाहती है कांग्रेस!
दरअसल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में कांग्रेस को सहयोगी दलों के साथ सीटों के लिए बहुत ज्यादा तोल-मोल करना पड़ रहा है।
लगता है कि पार्टी को आशंका है कि अगर सहयोगी दल उसकी मांग के हिसाब से सीटें देने के लिए राजी हो भी जाएं तो कहीं ऐसी सीटें न थमा दें जो कि गठबंधन के लिए बहुत ही 'कमजोर' हों।
जैसे कि खड़गे का कहना है, 'जैसे ही इंडिया अलायंस के सदस्यों के बीच समझौता फाइनल हो जाएगा, असल में सीटों की कितनी संख्या है, वह भी सामने आ जाएगी....ऐसा भी हो सकता है... हम सोच रहे हैं कि हमें 'ए' सीट मिल रही है; लेकिन, मान लीजिए कि गठबंधन में हमारा सहयोगी सहमत नहीं हो रहा है और कहता है कि तुम 'सी' सीट ले लो। इसी के चलते हम सभी सीटों पर काम कर रहे हैं।'
करीब दो-तिहाई सीटों पर कोई बंटवारा नहीं चाहती कांग्रेस
हाल में कुछ रिपोर्ट सामने आई हैं कि कांग्रेस 300 से कहीं ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का इरादा रखती है। इनमें से दो-तिहाई सीटों पर तो वह किसी तरह से सीटों का बंटवारा नहीं चाहती।
जिस राज्य में सहयोगी मजबूत हैं, वहीं तालमेल करना चाहती है कांग्रेस
ये वो सीटें हैं, जहां बीजेपी के खिलाफ अकेले कांग्रेस पार्टी मजबूत है या फिर कांग्रेस का सीधा मुकाबला किसी अन्य क्षेत्रीय दल के साथ है। बाकी एक-तिहाई सीटें वह उन राज्यों में इंडिया के सहयोगियों से उम्मीद कर रही है, जहां सहयोगी कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा मजबूत हैं।
कांग्रेस की रणनीति तो बड़ी ठोस है। लेकिन, उसके सहयोगी किस हद तक उसके दावे को मंजूरी देते हैं, यह भी देखने वाली बात होगी। क्योंकि, बंगाल, पंजाब, यूपी और दिल्ली जैसे राज्य में पसंद की सीटें सहयोगियों से ले पाना कांग्रेस के लिए पहली बड़ी चुनौती बनी रहेगी।












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