Lok Sabha Election: हो गया फाइनल? इस नए फॉर्मूले पर होगा यूपी में सपा-कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा
INDIA alliance news: विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' में सीट शेयरिंग को लेकर अब धीरे-धीरे बातचीत आगे बढ़ने लगी है। पहले महाराष्ट्र और अब सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले यूपी में भी सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय हो गया है।
पहले खबर थी कि कांग्रेस 2009 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन के आधार पर यूपी में सीटें चाहती है। लेकिन, अब समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक नए फॉर्मूले पर सीट बंटवारे के लिए लगभग सहमत हो गए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 'मंगलवार को दोनों दलों की बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट शेयरिंग के लिए दो बातों पर सहमति बनी। पहली- सीट बंटवारे का आधार 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों का प्रदर्शन होगा। दूसरी- विशेष सीटों के मामले में पार्टियों और संभावित उम्मीदवार की पकड़ को ध्यान में रखा जाएगा।'
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी कुछ छोटे दलों और आरएलडी के साथ मिलकर लड़ी और 32 फीसदी वोट शेयर के साथ 111 सीटों पर जीत हासिल की। आरएलडी के खाते में 8 सीटें गईं थी। इस चुनाव में कांग्रेस 399 सीटों पर लड़ी थी, लेकिन उसे महज 2.33 फीसदी वोट शेयर के साथ एक ही सीट पर जीत मिली।
तीन राज्यों के चुनाव में दिखी थी दरार!
आपको बता दें कि पहले चर्चा थी कि समाजवादी पार्टी यूपी में कांग्रेस को ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं है। हाल ही में जब तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए तो मध्य प्रदेश में कांग्रेस और सपा अलग-अलग चुनाव लड़े। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव चाहते थे कि मध्य प्रदेश में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा जाए, लेकिन कांग्रेस ने उनकी इस मांग पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद बयान आए कि सपा मध्य प्रदेश का बदला कांग्रेस से यूपी में लेगी।
कुछ इस तरह होगा सपा-कांग्रेस में सीटों का बंटवारा
हालांकि, अब मंजर बदला हुआ दिख रहा है। समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सीट बंटवारे को लेकर सपा का रुख नरम है और हर सीट पर जिताऊ कैंडिडेट को अहमियत दी जाएगी। सपा नेता ने बताया कि बैठक में फैसला हुआ है कि दोनों पार्टियां उन सीटों की लिस्ट संभावित उम्मीदवार के साथ आपस में शेयर करेंगी, जिनपर वो चुनाव लड़ना चाहती हैं। इसके बाद हर सीट के समीकरण देखते हुए फैसला लिया जाएगा। अगर किसी सीट पर ओबीसी मतदाता ज्यादा हैं, तो फिर ये देखा जाएगा कि किस पार्टी के पास मजबूत ओबीसी प्रत्याशी है।
2009 में कितनी सीटें जीती थी कांग्रेस?
गौरतलब है कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। 2014 में कांग्रेस को यूपी से केवल 2 और 2019 में एक ही सीट मिली। इसीलिए, कांग्रेस ने 2024 के लिए सीट शेयरिंग के मामले पर 2009 के लोकसभा चुनाव में उसके प्रदर्शन को आधार मानने की बात कही, जिसमें वो यूपी की 21 सीटों पर जीती थी।
2014 और 2019 में क्या थी कांग्रेस-सपा की हालत?
वहीं, बात अगर समाजवादी पार्टी की करें तो 2014 और 2019 में उसका प्रदर्शन भी कुछ खास नहीं रहा और उसे दोनों बार यूपी में महज 5-5 सीटों पर ही जीत मिली। 2019 में सपा ने बसपा के साथ गठबंधन किया था, इसके बावजूद उसे कोई फायदा नहीं मिला। हालांकि पिछले दो लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का वोट शेयर, कांग्रेस से ज्यादा रहा है। 2014 में सपा का वोट शेयर जहां 22.35 फीसदी रहा, वहीं कांग्रेस के खाते में केवल 7.53 फीसदी वोट शेयर गया। इसके बाद 2019 में सपा को 18.11 फीसदी और कांग्रेस को 6.36 फीसदी वोट शेयर मिला।












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