ओवैसी से तालमेल करेंगे राहुल गांधी! AIMIM को 'इंडिया' ब्लॉक में ला सकती है कांग्रेस? 5 वजहें जानिए

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी के असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ कांग्रेस के गठबंधन की कोशिशों में जुटे होने की चर्चाएं गरम हैं। ऐसी अटकलें इस वजह से लगाई जा रही हैं, क्योंकि उनकी ओर से हाल में कुछ इस तरह के काम किए गए हैं, जिससे बड़े सियासी संकेत मिल रहे हैं।

लंदन में ओवैसी के भाई से मिले सीएम रेवंत रेड्डी
तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने पिछले शुक्रवार को लंदन में असदुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई और राज्य विधानसभा में उनकी पार्टी के नेता सदन अकबरुद्दीन ओवैसी को खास तौर पर मिलने के लिए बुलाया था।

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कहने के लिए रेड्डी ने इंग्लैंड के थेम्स रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट को समझने के लिए विवादित नेता छोटे ओवैसी को मिलने बुलाया था, ताकि हैदराबाद की मुसी नदी में भी उसी तरह का कुछ करने का विचार मिल सके।

लेकिन, सियासी दोस्ती से दुश्मनी में बदले रिश्ते के दौरान विदेशी जमीन पर मुलाकात की वजह से इसके अलग मायने निकल रहे हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी ओवैसी की पार्टी को इंडिया ब्लॉक की सहयोगी बनाना चाहती है।

यह इसलिए और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कांग्रेस समेत विपक्षी गठबंधन की तमाम पार्टी एआईएमआईएम को दूसरे राज्यों में वोट कटवा और बीजेपी की 'बी टीम' बताने में नहीं थकतीं हैं।

वह पहले आम आदमी पार्टी के लिए भी ऐसा ही कहा करती थीं, लेकिन आज अरविंद केजरीवाल की पार्टी इंडिया ब्लॉक की एक प्रमुख सहयोगी है।

कांग्रेस सरकार ने ओवैसी को ही बनाया था प्रोटेम स्पीकर
कांग्रेस और एआईएमआईएम नेता के बीच विदेशी धरती पर हुई मुलाकात पहली घटना नहीं है, जिससे यह कहा जा रहा है कि दोनों दलों के बीच कोई तालमेल की खिचड़ी पक रही है।

जब कांग्रेस सरकार ने अकबरुद्दीन ओवैसी को विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया था, तभी से ऐसी चर्चाएं शुरू हो गई थीं। बीजेपी ने इसका भारी विरोध भी किया था।

लंदन जाने से पहले ओवैसी की पार्टी के विधायकों से भी बैठक कर चुके हैं सीएम
यही नहीं, पिछले महीने ही तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनी है। लेकिन, लंदन जाने से पहले मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एआईएमआईएम के सारे विधायकों के साथ हैदराबाद में एक खास बैठक भी की थी। इस बैठक को पुराने हैदराबाद के विकास से जोड़ा गया था।

हालांकि, कांग्रेस और हैदराबाद के सांसद की पार्टी में किसी तरह के गठबंधन को फिलहाल एआईएमआईएम की ओर से साफ नकारा जा रहा है। लेकिन, कांग्रेस के एक खेमे में इस तरह की अटकलों को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा रहा है।

लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए मुस्लिम वोट अहम
कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं की ओर से पार्टी के आला कमान को यह बताया गया है कि एआईएमआईएम के इंडिया ब्लॉक में शामिल होने से न सिर्फ तेलंगाना में कांग्रेस को मुस्लिम वोट अपने पक्ष में मजबूत करने में सहायता मिलेगी। बल्कि, लोकसभा चुनावों में यह देश के दूसरे हिस्सों में भी लाभदायक हो सकता है।

तेलंगाना में कांग्रेस सरकार की स्थिरता और बढ़ेगी
पांचवीं वजह ये बताई जा रही है कि तेलंगाना विधानसभा की 119 में से कांग्रेस के पास सिर्फ 64 सीटें हैं। पार्टी के अंदर इस सामान्य बहुमत की वजह से पूरी निश्चिंतता नहीं बन पा रही है। अगर एआईएमआईएम के साथ गठबंधन हो गया तो उसके 7 विधायकों के दम पर कांग्रेस की सरकार में और स्थिरता आ सकती है।

हालांकि, कांग्रेस में भी एक ऐसा गुट है, जो मजलिस बचाओ तहरीक (MBT) नाम की पार्टी के साथ गठबंधन चाहता है, जो ओवैसी की पार्टी की तरह ही पुराने हैदराबाद के मुस्लिम-बहुल इलाकों में प्रभावी है। अंतिम फैसला कांग्रेस हाई कमान को लेना है।

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