Chunavi Kisse: जब एक वोट से गिरी थी 13 महीने पुरानी वाजपेयी सरकार, जानिए कौन था वो सांसद?
Lok Sabha Chunavi Kisse: लोकसभा चुनाव 2024 का प्रचार जोरों-शोरों से चल रहा है। नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की हैट्रिक लगाने के लिए जुटे हुए हैं। इस बीच विपक्षी इंडिया गठबंधन भी कड़ी टक्कर देने की जुगत मे हैं। ऐसे में इस चुनावी माहौल में बात उस किस्से की होगी, जब एक वोट से 13 महीने पुरानी वाजपेयी सरकार गिर गई थी।
सियासत के बड़े घटनाक्रमों में शुमार यह सियासी किस्सा साल 1999 का है, जब लोकसभा चुनाव के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने 10वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी, लेकिन 13 महीने के छोटे से कार्यकाल में ही उनको सत्ता से बेदखल होना पड़ा था।

विश्वास मत में फेल हुई वाजपेयी सरकार
दरअसल, बीजेपी के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी 1998 लोकसभा चुनाव के बाद दूसरी बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे थे। हालांकि अटल जी इस बार पीएम बने 13 महीने ही हुए थे कि विश्वास मत में सरकार एक वोट से बहुमत साबित नहीं कर पाई और वाजपेयी सरकार गिर गई।
वाजपेयी सरकार अपने 13 महीने के कार्यकाल के बाद 17 अप्रैल 1999 को सिर्फ एक वोट से लोकसभा में विश्वास मत जीतने में असफल रही। लेकिन बहुत ही कम लोग होंगे वो यह नहीं जानते होंगे कि आखिर वो एक वोट किसका था, जिसने अटल सरकार को गिरा दिया था।
'द इयर्स दैट चेंज्ड इंडिया' बुक में खुलासा
इस सियासी घटनाक्रम को 'द इयर्स दैट चेंज्ड इंडिया' बुक में बड़े ही विस्तार से बताया गया है, जिसे पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में पीएम के निजी सचिव रहे शक्ति सिन्हा ने साझा किया है। उन्होंने अपनी किताब के अंदर कई नेताओं का जिक्र किया, जिनका सपोर्ट वापस लेने के बाद वाजपेयी सरकार एक वोट से गिर गई थी।
इन्हीं में एक प्रमुख नाम अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम पार्टी (AIDMK) की दिवंगत नेता जयललिता का है। बताया जाता है कि उन्हीं के समर्थन वापस लेने के बाद एनडीए की वाजपेयी सरकार अल्पमत में आ गई थी और फिर विश्वास मत जीतने में असफल रही।
इसके अलावा चर्चाओं में और नाम भी आते हैं, जिनमें तल्कालीन कांग्रेस सांसद गिरधर गमांग और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सैफुद्दीन सोज को भी जिम्मेदार माना जाता है। बताया जाता है कि वाजपेयी सरकार को गिराने के उस एक वोट के पीछे असल में यह दोनों नेता ही जिम्मेदार थे। हालांकि सरकार के गिरने के अगले ही दिन फारुख अब्दुल्ला ने सोज को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
अटलजी ने दिया था इस्तीफा
1998 में दूसरी बार पीएम बने अटल बिहार वाजपेयी की सरकार के खिलाफ कुछ ऐसे राजनीतिक समीकरण बने कि 17 अप्रैल 1999 को उन्हें लोकसभा में बहुमत साबित करना था। हालांकि यह उनके लिए निराशाजनक साबित हुआ और उनके समर्थन में 269 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 270 वोट पड़े। जिसके बाद सरकार गिर गई।
तीन बार बने प्रधानमंत्री
बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी भारत के 3 बार प्रधानमंत्री रहे थे। सबसे पहले उन्होंने 1996 में सिर्फ 13 दिनों की सरकार चलाई। इसके बाद दूसरी बार वह 1998 से 1999 तक पीएम रहे, जो कि 13 महीने का कार्यकाल था। इसके बाद तीसरी बार वो 1999 से 2004 तक पूरे 5 साल के लिए प्रधानमंत्री रहे।
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