Lok Sabha Chunav Result: एनडीए का क्यों टूटा 400 पार सीटों का सपना? 5 वजहें

Lok Sabha Election Result: लोकसभा चुनावों के परिणामों से साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाला गठबंधन एनडीए अपने 400 पार सीटों से जीत के लक्ष्य से दूर ही नहीं, 300 के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाया है।

बीजेपी ने इस बार के लोकसभा चुनावों में अपने लिए 370 और एनडीए के लिए 400 पार सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था। लेकिन, चुनाव आयोग की ओर से जारी परिणामों में यह मुमकिन नहीं हो पाया है।

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आरक्षण खत्म होने का डर दिखाने वाला विपक्ष का अभियान सफल!
इस बार के चुनाव अभियान में विपक्षी इंडिया अलायंस ने भाजपा के खिलाफ यह अभियान चलाया कि एनडीए अगर 400 सीटें पार कर जाएगा तो वह संविधान बदलकर ओबीसी, दलित और आदिवासियों को मिलने वाले आरक्षण को खत्म कर देगा। परिणामों को देखने के बाद लगता है कि बीजेपी और एनडीए गठबंधन के इस नरेटिव को अपने तर्कों से काटकर मतदाताओं को समझा पाने में नाकाम रहा।

मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा बैकफायर कर गया!
लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे चुनाव अभियान में जिस तरह से मुस्लिम आरक्षण को बड़ा मुद्दा बनाया, वह बैकफायर कर गया और मुस्लिमों ने इसके खिलाफ बहुत ही आक्रामक वोटिंग की है। चुनाव परिणामों से लगता है कि जहां 400 पार सीटें मिलने पर संविधान बदलने के विपक्ष के डर दिखाने वाले एजेंडे ने खासकर ओबीसी और दलित मतदाताओं को भाजपा और एनडीए से दूर कर दिया, वहीं मुस्लिम वोट पूरी तरह से बीजेपी और एनडीए को हराने वाले उम्मीदवारों के पक्ष में गोलबंद हो गया।

महिलाओं के खाते में हर साल एक लाख रुपए डालने का वादा
इंडिया ब्लॉक की अगुवा कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में महिलाओं के खाते में हर साल एक लाख रुपए डालने का वादा किया है। इस बार हिंदी भाषी प्रांतों समेत कई राज्यों महिलाओं ने पुरुष मतदाताओं को मतदान में पछाड़ दिया है। लगता है कि विपक्ष के इस वादे के सामने मोदी सरकार का लाभार्थी कार्ड नहीं चल पाया।

एनडीए के मौजूदा सांसदों के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी
भाजपा ने इस बार कई सारी सीटों पर उम्मीदवार बदलने की कोशिश की। लेकिन, कई सीटों पर जातीय समीकरणों की वजह से उसके हाथ बंधे नजर आए। लगता है कि इसका परिणाम ये हुआ कि जिनका टिकट कटा, वे भी पार्टी को भीतरघात करके नुकसान पहुंचाने में सफल रहे; और जिनका टिकट नहीं कटा, उससे स्थानीय स्तर पर समर्थकों ने मुंह मोड़ लिया। चुनावों के दौरान बीजेपी के सहयोगियों में से जेडीयू और शिवसेना में यह बहुत बड़ी समस्या की तरह दिखाई पड़ी है।

400 पार वाले नारे ने बिगाड़ा गणित

देश के कई राज्यों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक 400 पार वाले नारे ने इस बार एनडीए के खिलाफ 2004 के इंडिया शाइनिंग की तरह गणित बिगाड़ने का काम किया है। क्योंकि, कई मोदी समर्थकों ने यह मानकर स्थानीय समीकरणों और उम्मीदवारों के फेस वैल्यू पर वोट डाला कि प्रधानमंत्री तो मोदी बन ही रहे हैं। भाजपा के रणनीतिकारों ने जो सोचा था, असल में वह दांव उन्हीं पर उलटा पड़ गया। यह 2019 से ठीक विपरीत स्थिति है।

यही नहीं, 2014 में यूपीए सरकार के 10 सालों के शासन के खिलाफ जबर्दस्त एंटी-इंकंबेंसी के दम पर मोदी लहर के नाव पर सवार होकर मोदी सरकार सत्ता में आई थी। 2019 में पुलवामा हमला और उसके बदले बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद एक राष्ट्रवाद की भावना देश भर में कायम हुई थी। लेकिन, 2024 में बीजेपी और एनडीए इस तरह का कोई लहर वाला मुद्दा बनाने में भी नाकाम रहे।

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