Lok Sabha Chunav Result: बीजेपी को नहीं मिला 272 का जादुई आंकड़ा, किस दिशा में बढ़ेगी देश की राजनीति?
Lok Sabha Chunav Result 2024: 18वीं लोकसभा के चुनाव परिणामों से कई संदेश मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए को लगातार तीसरी बार बहुमत मिला है। पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई सरकार लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर सत्ता में लौट रही हो।
एनडीए को 2014 और 2019 दोनों ही बार प्रचंड बहुमत मिला था। उस प्रचंड बहुमत का सबसे बड़ा आधार यही था कि भाजपा को अपने दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ था। 2014 में बीजेपी को 282 सीटें मिली थीं, जो 1984 के बाद ऐसा पहली बार हुआ था। 2019 में पार्टी ने इस आंकड़े को 303 तक पहुंचा दिया।

बीजेपी 272 के जादुई आंकड़े से रह गई दूर
लेकिन, अबकी बार बीजेपी अपने दम पर 543 सीटों में से 272 का जादुई आंकड़ा लाने में नाकाम रही है। ऐसे में तरह-तरह के सियासी अटकलें लगनी स्वाभाविक हैं। विपक्षी पार्टियां एक दशक से सत्ता से दूर हैं। एनडीए को मिली सफलता से उनको अपना सपना 5 साल और आगे तक चकनाचूर होते नजर आ रहा है।
टीडीपी, जेडीयू पर अटकी इंडिया ब्लॉक की नजर
इंडिया ब्लॉक की पार्टियों की नजरें एनडीए के टीडीपी और जेडीयू पर गड़ चुकी हैं। हालांकि, इंडिया ब्लॉक का आंकड़ा करीब 234 सीटों तक पहुंच रहा है और उसे सिर्फ जादुई आंकड़े के लिए भी 38 सीटों की जरूरत है। उन्हें लगता है कि टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सांसदों का समर्थन मिल जाए तो वह अपनी किस्मत फिर से चमकाने में जुट सकते हैं। लेकिन, इतने से भी उनकी दाल गलने नहीं वाली है।
सिर्फ जेडीयू, टीडीपी से भी नहीं पूरा हो सकता है विपक्ष का सपना
क्योंकि, विपक्ष को फिर से सत्ता का स्वाद चखने के लिए एनडीए के कुछ और दलों के भी सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी। कुछ अन्य दलों को भी जोड़ना पड़ेगा। ऐसे में चंद्रबाबू नायडू जैसे मंजे हुए राजनेता विपक्ष की अनिश्चितता के चक्कर में पड़ेंगे, यह बहुत बड़ा सवाल है। जबकि, आंध्र प्रदेश में उनकी अपनी सरकार बन रही है, जिसमें भाजपा भी उनकी सहयोगी है।
किस दिशा में बढ़ेगी देश की राजनीति?
एनडीए के साथ काम करने का नायडू के पास लंबा तजुर्बा भी है। अलबत्ता नीतीश के लिए किसी तरह की कयासबाजी मुश्किल है। मान लिया जाए कि अगर विपक्ष आने वाले समय में फिर भी किसी तरह से जोड़-तोड़ की सरकार बना लेने में सफल भी हो गया तो सरकार कितने दिनों चलेगी, यह सवाल पहले दिन से बना रहेगा। ऐसी स्थिति में मध्यावधि चुनाव की तलवार भी पहले दिन से लटकी रहेगी।
कभी मजबूरी वाला गठबंधन चलाने के अनुभवी नहीं रहे हैं मोदी
अब सवाल है कि अपने 22 साल से भी ज्यादा के सियासी करियर में कभी मजबूरी वाली गठबंधन सरकार चलाने के आदी नहीं रहे नरेंद्र मोदी के लिए पिछली दो बार की तरह मजबूत सरकार चला पाना इस बार कितना आसान होगा। नायडू और नीतीश दोनों धुरंधर हैं। वह पीएम मोदी को उसी तरह से सरकार चलाने देंगे, जैसा पिछले 10 वर्षों से वह चलाते आ रहे हैं, यह आज का सबसे बड़ा सवाल है।
यह सवाल इसलिए भी वाजिब है कि नीतीश हर बार पलटने से पहले कहते हैं कि यह उनका आखिरी बार था। लेकिन, फिर मौका मिलते ही पलटी मार जाते हैं। दूसरी तरफ चंद्रबाबू नायडू तकरीबन पांच वर्षों से भी ज्यादा समय तक बीजेपी से दूर रह चुके हैं। 2019 के चुनाव में तो वह मोदी सरकार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक की तरह का ही अभियान भी चला चुके हैं। हालांकि, उनका यह अनुभव उनके सियासी करियर का शायद सबसे खराब अनुभव साबित हो चुका है।
क्या करेंगे पीएम मोदी?
ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या नरेंद्र मोदी का ऐसा व्यक्ति है जो सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए सहयोगियों की हर दखलअंदाजी पसंद करे? फिर सवाल है कि इसका विकल्प क्या होगा? क्या वे पार्टी के किसी अन्य नेता को जिम्मेदारी सौंपकर गठबंधन की सरकार चलाने के लिए कहेंगे? या फिर समय उन्हें भी गठबंधन की राजनीति का मंजा हुआ राजनेता बनने को मजबूर कर देगा!












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