Lok Sabha Chunav: किस जाति के हैं अन्नामलाई, तमिलनाडु में कितना बड़ा वोट बैंक? BJP ने यूं ही नहीं लगाया दांव
Lok Sabha Chunav 2024 Tamil Nadu: तमिलनाडु में बीजेपी पहली बार अपने पुराने साथी अन्नाद्रमुक के बगैर चुनाव मैदान में उतरी है और फिर भी चेन्नई से लेकर दिल्ली तक उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं का जोश हाई है। तमिलनाडु में भाजपा ने पार्टी की रणनीति को पूरी तरह से प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के हाथों में छोड़ रखा है, जिनके सिर पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ है।
आईपीएस की अच्छी-भली नौकरी छोड़कर सीधे द्रविड़ राजनीति के लिए विख्यात तमिलनाडु पहुंचे 39 साल के के अन्नामलाई ने जबसे राज्य में भाजपा की कमान संभाली है, पार्टी सत्ताधारी डीएमके जैसी पार्टी के खिलाफ फ्रंट फुट पर खेल रही है। कई दशक गुजर गए, लेकिन तमिलनाडु की राजनीति पर सिर्फ द्रविड़ राजनीति ही हावी दिखी। अन्नामलाई की बढ़ती लोकप्रियता उसी कथित द्रविड़ राजनीति को उखाड़ फेंकने के संकल्पों में छिपी हुई है।

भाजपा को 25% वोट शेयर मिलने का दावा
मौजूदा लोकसभा चुनाव के लिए उनका दावा है कि अकेली बीजेपी को इस बार तमिलनाडु में 25% वोट मिलेंगे। अन्नामलाई ने ईटी से कहा है, 'तमिलनाडु में हमेशा बहुत तेज गति वाली-परिवर्तनकारी चुनाव होते हैं। इस बार हमें उम्मीद है कि यह एनडीए के पक्ष में रहेगा। तमिलनाडु के वोटर ऐसा करेंगे कि पूरा भारत याद रखेगा।'
कर्नाटक कैडर के पूर्व आईपीएस ने यूं ही नहीं पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत की है, जिनकी तारीफ प्रधानमंत्री भी करते रहे हैं। दरअसल, खुद कोयंबटूर सीट से चुनाव लड़ रहे अन्नामलाई को यकीन है कि एआईएडीएमके से छुटकारा पाकर जातिगत वोट बैंक वाली छोटी-छोटी पार्टियों के साथ किया गया गठबंधन, इस राज्य में भाजपा को मजबूती से स्थापित कर देगा।
द्रविड़ राजनीति पर क्यों हमलावर रहते हैं अन्नामलाई?
तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटें हैं और भाजपा ने 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। जबकि चार सीटों पर चुनाव चिन्ह उसके हैं और प्रत्याशी सहयोगियों ने दिए हैं। अन्नामलाई की लोकप्रियता की एक वजह यह है कि वह राज्य की जमी-जमाई द्रविड़ राजनीति के खिलाफ खुलकर बोलते हैं, जिसपर सिर्फ दो दलों का कब्जा है।
उनका कहना है, 'तथाकथित द्रविड़ राजनीति का जमाना लद चुका है। जैसे 2019 में यूपी के लोग जाति की राजनीति से स्पष्ट तौर पर आगे बढ़ गए, तमिलनाडु के लोग 2024 में उस भ्रष्ट व्यवस्था से आगे बढ़ जाएंगे, जो खुद को द्रविड़ राजनीति कहता है।'
जातिगत वोट बैंक वाली पार्टियों से भाजपा ने किया है गठबंधन
जानकार मानते हैं कि पीएमके और एआईएडीएमके के बागियों टीटीवी दिनाकरन और ओपीएस के साथ गठबंधन से बीजेपी को उत्तरी और दक्षिणी तमिलनाडु में काफी मदद मिल सकती है। पीएमके को मूल रूप से वन्नियार जाति का समर्थन प्राप्त है, जिनकी आबादी सबसे ज्यादा यानी 14% है।
किस जाति के हैं अन्नामलाई?
खुद अन्नामलाई पश्चिमी तमिलनाडु से आते हैं, जहां उनकी गौंडर जाति की जनसंख्या भी 6 से 7% बताई जाती है। इस तरह से बीजेपी ने इस बार न सिर्फ सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों में अन्नामलाई की पदयात्रा से पूरे राज्य के लोगों तक पहुंचने की कोशिश की है, बल्कि द्रविड़ राजनीति के दबदबे को खत्म करने के लिए जातिगत समीकरण भी बिठाने की भी भरपूर कोशिश की है।
डेक्कन हेरालेल्ड से एक वरिष्ठ पत्रकार मालन नारायणन ने भी बीजेपी का वोट शेयर डबल डिजिट में पहुंचने की संभावना जताते हुए कहा है, 'एनडीए को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार-विरोधी वोट थोक में एआईएडीएमके को न जाए। मुख्य बात ये है कि डीएमके-विरोधी अधिकतर वोट कौन लेता है।'
तमिलनाडु में 2026 की तैयार करके उतरी है बीजेपी?
तीन दशक से ज्यादा तमिलनाडु को कवर करने वाले आर भगवान सिंह का कहना है, 'बीजेपी चीफ के तौर पर अन्नामलाई ने इस द्रविड़ गढ़ में बेहतरीन राजनीतिक माहौल तैयार किया है। वह जो चाहते थे, वह सब मिला है और इससे ज्यादा की कामना नहीं कर सकते, सिर्फ इसके कि अब उन पर मौजूदा चुनाव में बड़े स्कोर का वादा पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।'
उनका कहना है कि 23 सीटों पर चुनाव लड़ना और बीजेपी और प्रधानमंत्री के मैसेज को जमीनी स्तर पर पहुंचा कर उन्होंने पार्टी को 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयार किया है। उनके मुताबिक, 'अन्नामलाई ने अपना अंतिम लक्ष्य स्पष्ट कर दिया है कि वह विधानसभा चुनाव है। 2024 तो 2026 के लिए जमीन की तैयारी है।'












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