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Lok Sabha Chunav 2024: कांग्रेस ने क्यों 'छिपाया' मुस्लिम लीग का झंडा, क्या BJP से डर गए राहुल गांधी?

Lok Sabha Election 2024 Kerala: कांग्रेस नेता राहुल गांधी बुधवार को केरल की अपनी वायनाड सीट से नामांकन करने पहुंचे थे। नामांकन दाखिल करने से पहले उन्होंने अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ एक रोड शो भी किया। लेकिन, जिस तरह से उनके रोड शो में कांग्रेस की सहयोगी मुस्लिम लीग (IUML) के साथ-साथ उसके अपने झंडे भी गायब रहे वह हैरान करने वाला है।

किसी भी राजनीतिक दल के लिए उसका झंडा और चुनाव चिन्ह ही सबकुछ होता है। चुनावों के दौरान यही तो उनका पहचान होता है, जिससे मतदाताओं को पता चलता है कि वह किस पार्टी को समर्थन कर रहे हैं। देश में लाखों लोगों की रोजी-रोटी भी राजनीतिक दलों के झंडे बनाने से ही चलती है।

wayanad muslim league flag

स्मृति ईरानी ने राहुल को मुस्लिम लीग के झंडे पर घेरा
यूपी की अमेठी में पिछली बार राहुल को हरा चुकीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी गुरुवार को यह मुद्दा उठाया है। वह प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष के सुरेंद्रन के नामांकन के लिए वायनाड पहुंचीं थीं। इस बार राहुल को उनकी सीट पर सुरेंद्रन भी चुनौती दे रहे है।

ईरानी ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पर सवाल उठाते हुए कहा है, 'कल कांग्रेस पार्टी की नामांकन रैली में मुस्लिम लीग के झंडे को छिपाना इस बात का संकेत है कि या तो राहुल गांधी मुस्लिम लीग के समर्थन से शर्मसार हैं या फिर जब वे उत्तर भारत में आएंगे और जब मंदिर-मंदिर जाएंगे तो उत्तर भारत में मुस्लिम लीग के साथ उनके गठबंधन को छुपा पाएंगे....'

प्रतिबंधित संगठन पीएफआई को लेकर भी निशाने पर राहुल
यही नहीं उन्होंने कहा कि 'केरल आकर और खासकर वायनाड आकर इस बात को देखकर स्तब्ध हो गई हूं, आश्चर्यचकित हूं कि पीएफआई जैसे आतंकवादी संगठन पर बैन के बावजूद पीएफआई की पॉलिटिकल लीडरशिप से राहुल गांधी अपने चुनाव के लिए समर्थन ले रहे हैं....'।

राहुल गांधी ने रैली में झंडे से क्यों बनाई दूरी?
दिलचस्प बात है कि राहुल के रोड शो में सिर्फ मुस्लिम लीग का ही झंडा नहीं, बल्कि खुद कांग्रेस का भी झंडा नदारद था। इस रोड शो में केरल के विपक्षी गठबंधन यूडीएफ के हजारों कार्यकर्ता शामिल थे, लेकिन सबने झंडों से क्यों दूरी बनाई, यह सियासी अटकलों की वजह बनी हुई है। इसकी जगह पर कुछ कार्यकर्ता तिरंगे वाली कैप, बैलून और राहुल की तस्वीर वाली तख्तियां लहरा रहे थे।

क्या मुस्लिम लीग के झंडे की वजह से भाजपा से डर गए राहुल गांधी?
दरअसल, 2019 में जब राहुल पहली बार वायनाड में नामांकन के लिए पहुंचे थे तो उनके रोड शो में मुस्लिम लीग का हरा झंडा प्रमुखता से नजर आया था। इसके बाद कुछ विरोधियों खासकर भाजपा के लोगों की ओर से उस हरे झंडे को कथित तौर पर पाकिस्तानी झंडे के तौर पर पेश किया गया था। माना जा रहा है कि शायद उसी डर से इस बार पार्टी ने झंडे से ही दूरी बनाने में भलाई समझी है।

मुस्लिम लीग का झंडा अगर कांग्रेस के साथ उत्तर भारत में दिखे तो?- सीपीएम
इसके बारे में सीपीएम के प्रदेश सचिव एमवी गोविंदन ने दावा किया है कि यूडीएफ के कार्यकर्ताओं को झंडा लाने से इसलिए मना कर दिया गया था कि इससे मुस्लिम लीग का ही झंडा प्रमुखता से नजर आता।

उन्होंने कहा, 'उत्तर भारत में कैसी तस्वीर होगी यदि आईयूएमएल का झंडा कांग्रेस के झंडे के साथ नजर आए? इसलिए कांग्रेस ने लीग से कहा कि अपना झंडा लेकर न आएं और जब लीग ने कांग्रेस के झंडे के बारे में पूछा तो उन्होंने तय कर लिया कि कोई अपना झंडा लेकर नहीं आएगा।'

कांग्रेस नहीं बता पा रही है मुस्लिम लीग का झंडा छिपाने की वजह
वायनाड के ही कलपेट्टी विधानसभा सीट से कांग्रेस एमएलए टी सिद्दीकी ने झंडे से दूरी की असल वजह बताने से कन्नी काटते हुए कहा है कि चुनाव में झंडा नहीं, बल्कि चुनाव निशान ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। सीपीएम सस्ती राजनीति कर रही है, क्योंकि उसके पास और कोई मुद्दा नहीं है।

उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी उम्मीदवार हैं और उनका चुनाव निशान 'हाथ' है। यूडीएफ कई दलों का एक गठबंधन है और वायनाड में हमारा नारा है, 'कई पार्टियां, एक उम्मीदवार, एक निशान'। इसलिए हमने उम्मीदवार की तस्वीर और चुनाव चिन्ह को प्रोजेक्ट करने का फैसला किया है।'

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