Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Lok Sabha Chunav 2024: अरविंदर सिंह लवली के इस्तीफे से दिल्ली में कैसे बदल गया कांग्रेस का सारा गेम?

Delhi Lok Sabha Chunav 2024: दिल्ली में पिछले दो लोकसभा चुनावों से कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पा रही है। इस बार आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन में उसे तीन सीटें चुनाव लड़ने के लिए मिली हैं। लेकिन अरविंदर सिंह लवली के इस्तीफे से उसके चुनावी सितारे शुरू में ही गर्दिश में दिखने लगे हैं।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे चार पन्नों के इस्तीफे में जो भी मुद्दे उठाए हैं, उससे स्पष्ट हो गया है कि राजधानी में पार्टी की सारी ऊर्जा बीजेपी से लड़ने से ज्यादा आपसी लड़ाई में ही बर्बाद हो रही है।

arvinder singh lovely congress

दिल्ली में कांग्रेस का कैसे होगा मंगल?
लवली की बातों से साफ हो गया है कि आम आदमी पार्टी के साथ दिल्ली में जो तालमेल किया गया है, उसे दिल्ली कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता अभी तक पचा नहीं पाए हैं। ऊपर से जिस तरह से तीन सीटों में से दो- उत्तर पश्चिमी दिल्ली में उदित राज और ऊत्तर पूर्वी दिल्ली में कन्हैया कुमार को टिकट दिया गया है, उसे प्रदेश इकाई हजम ही नहीं कर पा रही है।

लवली की चिट्ठी से यह भी उजागर हुआ है कि इतना सबकुछ होते हुए भी कांग्रेस के प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया की भूमिका ने उन्हें और भी आहत किया है, जिसकी वजह से वह अपना पद छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

दिल्ली कांग्रेस के कद्दावर और सौम्य चेहरा हैं लवली
अरविंदर सिंह लवली दिल्ली कांग्रेस के एक बहुत ही कद्दावर और सौम्य चेहरा हैं। वह कुछ समय के लिए बीजेपी में जाने से पहले और इस कार्यकाल में भी 7-8 महीने प्रदेश से कांग्रेस की अध्यक्षता कर रहे थे।

वे 1998 से 2015 तक गांधी नगर विधान विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। शीला दीक्षित सरकार में वे शहरी विकास, राजस्व, शिक्षा और परिवहन जैसे अहम विभागों में मंत्री रह चुके हैं।

कांग्रेस से वे 1990 से ही जुड़े हुए हैं, जब वे दिल्ली युवा कांग्रेस के महासचिव बने थे और 1992 से 1996 तक एनएसयूआई के भी महासचिव रहे हैं।

अरविंदर सिंह लवली का समीकरण
अरविंदर सिंह लवली पंजाबी जाट हैं। राजधानी में लगभग 35% जनसंख्या पंजाबी समाज की है और करीब 8% जाट हैं। इस तरह से 43% लोगों के साथ लवली का एक सीधा समीकरण बनता है।

खास बात ये है कि लवली नाम से ही नहीं, बातचीत में भी बड़े सौम्य और प्रभावी माने जाते हैं, जिसकी वजह से करीब डेढ़ दशक तक दिल्ली में सत्ता में रहने के बाद भी उनमें उसका कभी अहंकार नहीं दिखा।

कांग्रेस के आम कार्यकर्ता भी आलाकमान के फैसलों से असहमत
ऐसा नहीं है कि लवली ने कांग्रेस अध्यक्ष के सामने अपनी जो बातें रखी हैं, वह उन परिस्थितियों को अकेले भुगत रहे हैं। पार्टी के आम कार्यकर्ता भी खुलेआम आलाकमान के फैसलों पर उंगलियां उठा रहा है।

कन्हैया कुमार को टिकट देने में गड़बड़?
मसलन, कन्हैया कुमार को प्रत्याशी बनाए जाने पर तो कांग्रेस दफ्तर के बाहर रोजाना प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस के कार्यकर्ता ही उन्हें विवादित छवि वाला बता रहे हैं।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक स्थानीय कांग्रेसी ने कहा, 'हमारे यहां से 6 कैंडिडेट टिकट मांग रहे थे लोकल.....इनमें प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार, संदीप दीक्षित पूर्व सांसद, और तीन विधायक (पूर्व)। एक जिलाध्यक्ष सात लोग टिकट मांग रहे थे।'

उन्होंने आगे कहा, 'सातों को टिकट आपने नहीं दी और एक बाहरी विवादित सेलिब्रिटी को टिकट दी है...उसका विरोध तो होगा ही होगा। कैंडिडेट नहीं होते यहां पे तो ठीक था...लेकिन जब इतने सारे हेवीवेट हैं फिर भी आप दे रहे हैं तो कुछ न कुछ गड़बड़ तो है न उसमें।'

दरअसल, दिल्ली की तीन में से जिन दोनों सीटों को लेकर कांग्रेस में सिर फुटव्वल हो रहा है, उसे 2019 के चुनाव परिणामों के आधार पर देखें तो आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में गठबंधन होने के बावजूद भाजपा का पलड़ा बहुत ज्यादा भारी है। ऐसे में दिल्ली कांग्रेस में दंगल के बीच प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा कांग्रेस के लिए कहीं से भी शुभ संकेत नहीं है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+