31 करोड़ से ज्यादा महिलाओं ने की वोटिंग, पिछली बार से 1.53 करोड़ से भी ज्यादा वोट बढ़े, क्या हैं इसके संकेत?
Lok Sabha Chunav Result: चुनाव आयोग की ओर से 4 जून की मतगणना के एक दिन पहले जो जानकारियां दी गई हैं, वह भारतीय लोकतंत्र के लिए बहुत ही अच्छे संकेत हैं। इस बार के चुनावों में 64 करोड़ से भी ज्यादा मतदाओं ने मतदान किया है, जो कि 2019 के मुकाबले 2.81 करोड़ (ईवीएम) वोटों से भी अधिक है।
लेकिन, इस बार जिस तरह से सातों चरणों में कम मतदान प्रतिशत चुनाव आयोग से लेकर आम लोगों तक के लिए एक चिंता का विषय रहा है, उसके बावजूद कुछ चीजें बहुत ही चौंकाने वाली हैं। मंगलवार को जब वोटों की गिनती होगी तो उनका बहुत ही ज्यादा अहम रोल रहने वाला है।

31 करोड़ से भी ज्यादा महिलाओं ने किया मतदान
2019 के चुनावों में देश में कुल 29,46,24,323 महिला मतदाताओं ने मतदान केंद्रों पर जाकर ईवीएम के बटन दबाए थे। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजीव कुमार ने सोमवार को जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके अनुसार 2024 के लोकसभा चुनावों में 31 करोड़ से भी ज्यादा महिला मतदाओं ने मतदान किया है।
1.53 करोड़ से ज्यादा अतिरिक्त महिला वोट किसे मिले?
चुनाव आयोग के आंकड़ों के आधार पर देखें तो इस बार पिछली बार के मुकाबले 1.53 करोड़ से ज्यादा महिला मतदाओं ने वोट डाले हैं। सवाल है कि इन महिला मतदाताओं का वोट किस तरफ गया है। 2019 के चुनावों में महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत पुरुष मतदाताओं से ज्यादा रहा था।
2019 में महिला केंद्रित योजनाओं का एनडीए को मिला था लाभ
इस बार भी कई राज्यों में हर चरण के चुनाव में महिला मतदाताओं ने पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मतदान किया है। 2019 के चुनावों में मोदी सरकार पांच साल के अपने कार्यों पर मुहर लगवाने के लिए चुनावों में उतरी थी। 2014 से 2019 के बीच मोदी सरकार की जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्जवला योजना, खुले में शौच से मुक्ति जैसे लोकप्रिय अभियानों की लाभार्थी सीधे करोड़ों महिलाएं बनी थीं।
लाभार्थी वोट बैंक का इस बार किसकी ओर झुकाव?
इस बार ये योजनाएं तो जारी ही हैं, उनमें मुफ्त राशन वाली योजना समेत और भी कई योजनाएं शामिल हो चुकी हैं। इन योजनाओं ने पूरे देश में एक बड़ा लाभार्थी वोट बैंक तैयारी किया है,जिसका फायदा सत्ताधारी भाजपा को मिला भी है। इसके संकेत नवंबर में हुए कई राज्यों के विधानसभाओं में भी मिल चुके हैं। इसके साथ ही बीजेपी की अगुवाई वाली मौजूदा सरकार दशकों से लंबित 33% महिला आरक्षण विधेयक पास करवाने में भी सफल रही है।
बड़े वादों की ओर इस बार कितना झुकेंगी महिला मतदाता?
लेकिन, कांग्रेस की ओर से इस बार महिला मतदाताओं को टारगेट करने के लिए हर साल उनके खातों में एक लाख रुपए डालने का वादा किया गया है। यही नहीं कांग्रेस ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 50% आरक्षण देने का भी वादा किया है। इसने महिलाओं के लिए कई और तरह की स्कीम चलाने की बात कही है। कांग्रेस को महिला मतदाओं से किए गए वादों से हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना विधानसभा चुनावों में जबर्दस्त फायदा भी मिल चुका है।
ऐसे में डेढ़ करोड़ से ज्यादा महिला वोटर किसके पक्ष में मतदान करने निकली हैं, यह देखना बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने जिसे भी ईवीएम पर आशीर्वाद दिया है, 4 जून को वोटों की गिनती में उनकी राजनीतिक किस्मत चमक सकती है।












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