Lockdown 4: ज्यादा छूट की उम्मीदों पर फिर सकता है पानी, बड़े विशेषज्ञ ने बताया कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा
नई दिल्ली- पूरा देश इस वक्त लॉकडाइन-4 में मिलने वाली रियायतों को लेकर उम्मीदें लगाए बैठा है। लेकिन, एक जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने ऐसी स्थिति में कोरोना वायरस के बड़े पैमाने पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन को लेकर आगाह कर दिया है। उनके मुताबिक दुनिया के ज्यादातर देशों में यह स्थिति आ चुकी है और भारत को भी यही मानकर चलना चाहिए कि हमें उसी का सामना करना है और उसी मुताबिक तैयारी करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में अगर आवाजाही में छूट मिलती है तो निश्चित तौर पर इंफेक्शन का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार जो लॉकडाउन- 4 में कुछ राहत देने की सोच रही है, उसपर इतने बड़े स्वास्थ्य एक्सपर्ट की राय का क्या असर पड़ता है।

अभी तक कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं- विशेषज्ञ
भारत को नोवल कोरोना वायरस के संभावित कम्युनिटी ट्रांसमिशन के खतरे के प्रति सावधान रहना चाहिए। एक जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने लॉकडाउन-4 में संभावित राहतों की खबरों के बीच ये आगाह किया है। भारत में कुछ विशेषज्ञ पहले से वायरस के कम्युनिटी ट्रांसमिशन (तीसरे स्टेज) का दावा करते रहे हैं, लेकिन सरकार अभी तक इन दावों को आधिकारिक तौर पर खारिज करती रही है। इन परिस्थितियों में पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट, प्रोफेसर के श्रीनाथ रेड्डी ने कहा है कि हम अभी देश में कम्युनिटी ट्रांसमिशन जैसे टर्म के इस्तेमाल से बच रहे हैं। क्योंकि, 'ज्यादातर केस उस जगह ही सीमित हैं, जहां विदेशों से यात्री आए या उनके संपर्क में आए लोग हैं। इसलिए लोग कह रहे हैं कि यह अभी भी स्टेज-2 है, क्योंकि यह ऐसा लोकल ट्रांसमिशन है, जिसका पता लगाया जा सकता है। यह अभी तक अप्रत्याशित कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं है।'

कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा मंडरा रहा है- प्रोफेसर के श्रीनाथ रेड्डी
रेड्डी एम्स में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख रह चुके हैं और उनका कहना है कि हमें यह पता होना चाहिए कि लगभग सभी देशों को बड़े पैमाने पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन का सामना करना पड़ा है और भारत को भी इसके लिए तैयार रहना चाहिए और ऐसे कदम उठाने चाहिए जैसे कि यह अभी भी हो रहा है और सभी तरह के एहतियाती प्रयास किए जाने चाहिए। मौजूदा समये में हार्वर्ड के एपिडमिलॉजी में प्रोफेसर के तौर पर भी जुड़े रेड्डी का कहना है कि देश में असल में कम्युनिटी ट्रांसमिशन का सिर्फ ही जोखिम ही नहीं है, बल्कि वास्तव में इसका बहुत बड़ा खतरा है।

लॉकडाउन हटने पर तेजी से संक्रमण की खतरा- रेड्डी
रॉलिन्स स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, इमोरी यूनिवर्सिटी में संबद्ध प्रोफेसर और सिडनी यूनिवर्सिटी में मेडिसिन के मानद प्रोफेसर के तौर भी काम कर रहे रेड्डी ने सबसे बड़ी बात लॉकडाउन को लेकर कही है। उनके मुताबिक भारत में कोरोना का प्रकोप बाकी देशों के मुकाबले जो काफी नियंत्रित रहा है, उसमें कई कारणों के अलावा लॉकडाउन भी बहुत बड़ा कारण है। लेकिन, अगर लॉकडाउन हटाया जाता है तो उससे कई रिस्क फैक्टर भी जुड़े हुए हैं। मसलन, लोगों की आवाजाही बहुत बढ़ जाएगी, इसके चलते वायरस का संक्रमण बहुत तेजी से फैल सकता है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में तो हालात बेकाबू हो जा सकते हैं, जैसे कि झुग्गी वाले इलाकों में। उन्होंने कहा है कि लॉकडाउन हटने के साथ ही वायरस का ट्रांसमिशन निश्चित तौर पर बढ़ने का खतरा है, इसलिए कई तरह की सावधानियां बरतनी पड़ेंगी।

'ग्रामीण इलाकों को बचाना होगा'
उन्होंने बताया कि लॉकडाउन में रियायत की स्थिति में लोगों को शारीरिक दूरी बनाकर रखनी होगी, मास्क पहनकर रहना होगा, हाथ धोते रहना पड़ेगा। उन्होंने ये भी कहा कि सौभाग्य से अभी तक भारत में संक्रमण मुख्यत: बड़े शहरों में ही सीमित है। लेकिन, उन्होंने कहा कि 'सबसे महत्वपूर्ण बात ग्रामीण इलाकों को बचाना है, क्योंकि दो-तिहाई भारत ग्रामीण इलाकों में ही रहता है और वहां संक्रमण कम है, क्योंकि आवाजाही कम है।' उन्होंने प्रवासी मजदूरों की भी चर्चा की है और कहा है कि यह देखना होगा कि वे महामारी के पीड़ित न बन जाएं, लेकिन साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वो दूसरों को संक्रमित न कर दें।












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