क्या शुक्र ग्रह पर है जीवन? रहस्यमयी गैस की पहेली सुलझाने में वैज्ञानिकों के छूट रहे पसीने
नई दिल्ली, 14 जुलाई। 2020 में शुक्र ग्रह के तपते और जहरीले वायुमंडल में फॉस्फीन नाम की एक गैस मिली, जिसने चारों ओर एक नई हलचल पैदा कर दी थी क्योंकि वैज्ञानिकों ने संभावना जताई थी कि शुक्र ग्रह में जीवन हो सकता है। लेकिन अब एक नई रिपोर्ट इस पर का खंडन करती हुई आई है जिसमें दावा किया जा रहा है कि ये रासायनिक अवशेष सतह पर सक्रिय ज्वालामुखी विस्फोट से हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने जताई ये संभावना
बता दें वैज्ञानिकों ने 2020 में शुक्र के बादलों में फॉस्फीन के संकेत मिलने की सूचना दी, जो एक हानिकारक गैस है जो पृथ्वी पर केवल जीवन से जुड़ी है। फॉस्फीन में फॉस्फोरस और हाइड्रोजन के तीन परमाणु होते हैं जो पृथ्वी पर देखे जाने वाले ऑक्सीजन से भरपूर वातावरण में जल्दी से टूट जाते हैं। वहीं अब जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन का तर्क दिया है कि वीनसियन फॉस्फीन के एक अजैविक स्रोत के रूप में ज्वालामुखी रूप से विस्फोटित फॉस्फाइड की संभावना है।अतीत में वैज्ञानिकों ने शुक्र को ज्वालामुखीय गतिविधि का एक गर्म क्षेत्र के रूप में देखा है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह फिर से जीवित हो गया है, जिससे कुछ हिस्से वास्तव में पहले से यंग हो गए हैं।

ज्वालामुखी गतिविधि फॉस्फीन को ट्रिगर कर सकती
शोधकर्ताओं ने कहा कि सतह से ज्वालामुखी विस्फोट सतह की गहरी परतों से फॉस्फोरस से भरे यौगिकों को हवा में ला सकते हैं। इन फॉस्फाइड्स को वायुमंडल में ज्वालामुखीय धूल के साथ उगल दिया जा सकता है, जहां वे फॉस्फीन बनाने के लिए सल्फ्यूरिक एसिड के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने बताया कि रासायनिक अवशेषों के लिए वेनुटियन वायुमंडल तक पहुंचने के लिए विस्फोट बड़े पैमाने पर होना चाहिए। उन्होंने १८८३ क्राकाटाउ विस्फोट के पैमाने पर एक घटना का हवाला दिया, जो पृथ्वी पर सबसे घातक और सबसे विनाशकारी ज्वालामुखीय घटनाओं में से एक है जिसने इंडोनेशिया में क्राकाटाओ द्वीप को नष्ट कर दिया।

शोधकर्ताओं ने कही ये बात
शोधकर्ताओं ने कहा "फॉस्फोरस सतह पर फॉस्फेट जैसे ऑक्सीकृत रूपों में होगा और एक अजैविक स्रोत के प्रशंसनीय होने के लिए, ज्वालामुखी की धूल में लोहे, मैग्नीशियम जैसी धातुओं में बंधी फॉस्फाइड की थोड़ी मात्रा की उपस्थिति ऊर्जावान रूप से आवश्यक होगी, जिसके कारण हाइड्रोजन फॉस्फाइड का उत्पादन, यानी फॉस्फीन होगा ।

शुक्र पर जीवन की संभावना कितनी है?
बता दें सौरमंडल के अन्य ग्रहों की अपेक्षा शुक्र ग्रह पर जीवन की संभावना कम समझी जाती है क्योंकि शुक्र पर वायुमंडल की मोटी परत है, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड अधिक मात्रा में उपलब्ध है। शुक्र के वातावरण में 96% कार्बन डाइऑक्साइड है। इस ग्रह पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी के मुकाबले 90 गुणा अधिक है। यही कारण है कि पृथ्वी का कोई जीव शुक्र ग्रह पर पैर रखेगा तो वो सेकेंडों में उबलने लगेगा।












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