विलुप्त हो जाएगा मानव,धरती पर जीवन की गारंटी नहीं, नई 'पृथ्वी' की खोज पर क्या बोले ISRO प्रमुख ?

बेंगलुरु, 22 जुलाई: इंसान धरती पर भागम-भाग की जिंदगी जी रहा है। आरामदायक जीवन जीने के लिए लोग शॉर्ट कट तरीका अपनाने से भी पीछे नहीं हटते। लेकिन, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख की मानें तो पृथ्वी पर इंसान कब तक है, इसका कोई भरोसा नहीं है। इस बात की कोई गारंटी नहीं कि हम भी डायनासोर की तरह विलुप्त नहीं हो जाएं। इसलिए, उनकी अगुवाई में इसरो के वैज्ञानिक भारतीयों के लिए वैकल्पिक आवास की तलाश में लगे हुए हैं। बात अजीब सी है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक सोच है।

अगले साल के अंत तक 'गगनयान' के सफल होने की उम्मीद

अगले साल के अंत तक 'गगनयान' के सफल होने की उम्मीद

इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ ने कहा है कि भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम 'गगनयान' अगले साल के आखिर तक सफल होगा। वे गुरुवार को बेंगलुरु में मानव अंतरिक्ष उड़ान एक्सपो में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने एक बहुत ही गंभीर बात की ओर इशारा किया कि देश को 25 साल बाद अंतरिक्ष का स्थायी आवास बनाने में सक्षम होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग चल रही है और वो रूस से वापस लौट चुके हैं। अगले एक साल में, वे कई सैद्धांतिक, प्रायोगिक, बनावटी गतिविधियों (अंतरिक्ष के माहौल वाली) से गुजरेंगे और मिशन से संबंधित खास स्किल कौशल में ट्रेंड होंगे.....' उन्होंने बताया कि 'हम उम्मीद करते हैं कि सभी परीक्षण सफल होंगे और 2023 के आखिर में लक्ष्य को पूरा कर पाने में सक्षम होंगे।'

धरती पर जीवन की गारंटी नहीं- इसरो प्रमुख

धरती पर जीवन की गारंटी नहीं- इसरो प्रमुख

लेकिन, इसरो प्रमुख जिस बात पर जोर दे रहे हैं, वह बहुत ही गंभीर विषय है और सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए भी विचारनीय है। उनका कहना है कि बाहरी अंतरिक्ष को इंसानों के रहने लायक बनाना बहुत ही महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, 'इस बात की कोई गारंटी नहीं कि भविष्य में पृथ्वी पर जीवन विलुप्त नहीं होगा। मनुष्य होने के नाते हम विलुप्त होने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी दिशा में ये महत्वपूर्ण है कि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से निकलने के लिए अंतरिक्ष और रॉकेट प्रौद्योगिकी पर काम किया जाए और अंतरिक्ष की यात्रा की जाए और उसे जीवन को फलने-फूलने और रहने योग्य बनाया जाए।'

25 वर्ष बाद भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा!

25 वर्ष बाद भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा!

एस सोमनाथ का कहना है कि भारत को अभी भी अंतरिक्ष में काफी कुछ करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'सच तो ये है कि अगर आप आज चंद्रमा और मंगल पर कदम नहीं रखेंगे, तो भविष्य में यह आपको रखने नहीं देगा। इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि प्रौद्योगिकी क्षमता को अभी विकसित करें और अंतरिक्ष की यात्रा करने के लायक बनें और वहां जाकर रहें। यह मेरा सपना है कि जब भारत की आजादी के 100 वर्ष हो जाए, उसके बाद हम निश्चित तौर पर अंतरिक्ष को भारतीयों के लिए स्थायी आवास बनाने में सक्षम हो जाएं।'

डायनासोर में सोचने की क्षमता नहीं थी तो विलुप्त हो गए

डायनासोर में सोचने की क्षमता नहीं थी तो विलुप्त हो गए

इसरो चेयरमैन का कहना है कि डायनासोर में सोचने-समझने की क्षमता विकसित नहीं हुई थी, इसलिए वे विलुप्त हो गए। लेकिन, इंसान तो इसमें सक्षम है, इसलिए उसे धरती से बाहर भी स्थायी आवास के लिए जगह तलाशनी पड़ेगी। उन्होंने ये भी कहा कि पृथ्वी पर वायुमंडल है, जिसके चलते हम एस्टेरॉयड्स से बच जाते हैं। लेकिन, चंद्रमा और मंगल से वह टकराते रहते हैं।

 बाहरी दुनिया में अपनी जगह बनानी होगी

बाहरी दुनिया में अपनी जगह बनानी होगी

उन्होंने कहा कि अंटार्टिका में दुनिया के कई देशों ने अपने केंद्र बना रखे हैं। भारत ने भी वहां अपने तीन केंद्र बना रखे हैं। ऐसा करना इसलिए आवश्यक है कि अगर हम समय रहते अपनी जगह नहीं बना लेते तो फिर दुनिया हमें इसका मौका नहीं देगी। उन्होंने कहा कि मंगल पर हम पहली बार में पहुंचे। उन्हें उम्मीद है कि स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत का भी अपना स्पेस स्टेशन होगा। वह चाहते हैं कि भारत गगनयान तक ही न रुके और उससे आगे जाए। अंतरिक्ष में होने वाली खोज अभियान में भारत भी शामिल हो।

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