36 साल पुराने मामले में माफिया मुख्तार अंसारी को उम्रकैद, फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा
उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को 36 साल पुराने के फर्जी आर्म लाइसेंस के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। वाराणसी की MP-MLA कोर्ट ने माफिया मुख्तार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, इसके साथ ही दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
बुधवार की दोपहर विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) अवनीश उपाध्याय की अदालत में मुख्तार अंसारी को सजा पर सुनवाई पूरी हुई। इस दौरान मुख्तार वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बांदा जेल से जुड़ा रहा। तीन बजे माफिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

क्या है मामला?
जून 1987 में गाजीपुर में दोनाली बंदूक का लाइसेंस लेने में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर कर लाइसेंस जारी हुआ था। यह मामला सामने आने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया था।
पुलिस ने माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में तत्कालीन आयुध क्लर्क गौरी शंकर श्रीवास्तव और मुख्तार अंसारी को दोषी बनाया था। इनमें आयुध क्लर्क गौरीशंकर श्रीवास्तव की साल 2021 में हो मौत हो चुकी है।
इस मामले में वाराणसी जिले की MP MLA Court ने सुनवाई के बाद माफिया मुख्तार अंसारी को आईपीसी की धारा में धारा 428, 467, 468, 120 बी और 30 आर्म्स एक्ट में दोषी करार दिया है। वहीं धारा 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में दोषमुक्त कर दिया।
आपको बता दें कि फर्जी लाइसेंस लाइसेंस में मुख्तार के खिलाफ यह 8वां मामला है जिसमें कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।इससे पहले मुख्तार अंसारी को सात मामलों में सजा हो चुकी है। इन सात मामलों में से तीन मामलों पर सजा वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने ही सुनाई थी।












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