पंजाब से आतंकियों को सप्लाई होती थी नशे की गोलियां, इस तरह से हुआ भंडाफोड़
जालंधर। पंजाब के अमृतसर में बन रही ट्रामाडोल दवा दुबई की बजाय लीबिया आतंकियों के पास भेज दी गई। लेकिन इस बात का खुलास एक साल तक नहीं हो सका। जब इस बात का खुलासा हुआ तो सरकार व खुफिया एजेंसियों के हाथ पांव फूल गए। मामले के उजागर होने के बाद दोनों कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, पंजाब के अमृतसर में करीब एक साल पहले दो फर्मा कंपनियों ने अपने यहां दर्द निवारक दवा (ट्रामाडोल) का उत्पादन किया और करीब 24 लाख टेबलेट दुबई भेजीं। लेकिन यह टेबलेट लिबिया पहुंच गईं। जहां इनका सेवन आईएस आतंकियों ने किया। यह दवा इस्लामिक स्टेट के आतंकियों तक कैसे पहुंची, इसकी जानकारी किसी को नहीं हो सकी। एक साल बाद जब इस मामले की जानकारी हुई तो पंजाब सरकार समेत खुफिया विभाग में हडक़ंप मच गया। मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू की गई। पिछले दिनों चंडीगढ़ से आई ड्रग एंड कॉस्मेटिक विभाग की टीम ने दोनों कंपनियों के मालिकों से पूछताछ भी की। अंतत: विभाग ने फौरी कार्रवाई करते हुए दोनों कंपनियों को ट्रामाडोल दवा बनाने पर रोक लगा दी है। साथ ही दोनों कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए।
डिप्टी ड्रग कंट्रोलर गुरविंदर सिंह ने इस बात की पुष्टि की कि यह दवा आइएस आतंकियों तक पहुंची है। बताया कि दोनों कंपनियों ने पिछले वर्ष ये दवाएं दुबई की एक फर्म को भेजी थीं। दुबई की बजाय यह दवा लीबिया पहुंच गईं। बताया कि कंपनियां अब ट्रामाडोल दवा तैयार नहीं कर पाएंगी। इनका ट्रामाडोल तैयार करने का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। कंपनी द्वारा भेजी गई दवा इस्लामिक आतंकियों के पास कैसे पहुंची, इसकी जांच जारी है।
नशे के काम आती है गोली
ट्रामाडोल एक दर्द निवारक दवा है। इसका इस्तेमाल नशे के रूप में भी होता रहा है। ट्रामाडोल को अफीम का विकल्प भी माना जाता है। बताया जा रहा है कि यह दवा इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों की पहली पसंद है। इस्लामिक आतंकी इस दवा को फाइटर कहते हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो इस्लामिक आतंकी इस दवा का बड़ी शौक से सेवन करते हैं। भारत में एक गोली की कीमत तीन रुपये है, जबकि इस्लामिक स्टेट में यह 200 रुपये प्रति गोली बिकती है।












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