Bangladesh China Oil Drilling: बांग्लादेश में चीनी कंपनियों की एंट्री, भारत के लिए क्यों है खतरे की घंटी
Bangladesh China Oil Drilling: बांग्लादेश ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए तीन नए कुएं खोदने का फैसला किया है। इसके लिए दो चीनी कंपनियों को 945 करोड़ टका का ठेका दिया गया है। वित्त मंत्री आमिर खोस्रू महमूद चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली।
लेकिन यह केवल व्यापारिक मामला नहीं है, बांग्लादेश के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में चीन का बढ़ता दखल भारत के लिए चिंता का सबब बन गया है। दक्षिण एशिया में चीन की यह सक्रियता क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

Energy Security Bangladesh: कंपनियों को मिला बड़ा काम
बांग्लादेश सरकार ने गैस और तेल की खोज के लिए चीन की दिग्गज कंपनियों पर भरोसा जताया है। सीएनपीसी चुआनकिंग ड्रिलिंग इंजीनियरिंग को 'श्रीकाइल डीप-1' और 'मुबारकपुर डीप-1' कुओं की खुदाई के लिए 713 करोड़ टका का ठेका मिला है। वहीं, सिनोपेक इंटरनेशनल पेट्रोलियम 'सिलहट-12' कुएं पर 232 करोड़ टका की लागत से काम करेगी। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर ही ऊर्जा संसाधनों को बढ़ाना है ताकि विदेशी निर्भरता कम हो सके, लेकिन इसके पीछे चीन की बढ़ती तकनीकी पकड़ साफ दिख रही है।
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भारत के लिए सामरिक चुनौतियां
बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं है। 2026 की बदलती राजनीतिक स्थितियों के बीच, चीन का बांग्लादेश के अहम प्रोजेक्ट्स में शामिल होना भारत को सुरक्षा के लिहाज से असहज कर रहा है। खासकर भारत की सीमा के करीब चटगांव में ड्रोन फैक्ट्री बनाने का रक्षा समझौता और तीस्ता नदी परियोजना में चीन का साथ आना भारत के लिए रणनीतिक झटका माना जा रहा है। भारत इसे अपने प्रभाव क्षेत्र में चीन की सेंधमारी के रूप में देख रहा है।
आर्थिक और बुनियादी ढांचे पर कब्जा
चीन अब बांग्लादेश में दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक बन चुका है। पिछले पांच वर्षों में चीन ने वहां 4.38 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। सिर्फ ऊर्जा ही नहीं, बल्कि चीन बांग्लादेश के बंदरगाहों पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। मोंगला बंदरगाह के आधुनिकीकरण के लिए 400 मिलियन डॉलर का निवेश इसका बड़ा उदाहरण है। आर्थिक निवेश के जरिए चीन बांग्लादेश की नीतियों को प्रभावित करने की क्षमता हासिल कर रहा है, जिससे भारत की आर्थिक घेराबंदी बढ़ सकती है।
समुद्री सुरक्षा पर गहराता खतरा
चटगांव और मोंगला जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों में चीनी निवेश भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती सक्रियता और बुनियादी ढांचे पर उसका नियंत्रण भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमता को चुनौती दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार के बहाने चीन इन बंदरगाहों का इस्तेमाल भविष्य में अपनी सैन्य पहुंच बढ़ाने के लिए कर सकता है। ऐसे में बांग्लादेश का चीन की ओर बढ़ता झुकाव आने वाले समय में दक्षिण एशिया के सुरक्षा समीकरणों को बदल सकता है।












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