हर साल भारत में 1.16 लाख लोग HIV संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं

बैंगलुरू। एड्स दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। एचआईवी से संक्रमित लोगों की संख्या पिछले दिनों में कम होने की बजाए बढ़ रही है। वहीं दुनियाभर में HIV से संक्रमित लोगों की सूची में भारत तीसरे स्थान पर है जोकि काफी चिंता का विषय है। आज यानि 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर आइये जानते हैं भारत की एचआईवी संक्रमण के खिलाफ लड़ाई पर।

aids

भारत में एचआईवी संक्रमण का इतिहास और भारत का प्रयास

1986- HIV संक्रमण का पहला मामला भारत में पाया गया।
1992-1999- भारत सरकार ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण अभियान के प्रथम चरण की शुरुआत की।
2007-2009- भारत सरकार ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत की जिसमें राज्य सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं को भी शामिल किया गया।
2007-2009- भारत सरकार ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत की। जिसमें राष्ट्रीय स्तर से लेकर जिला स्तर तक एचआईवी संक्रमण के रोगियों के ईलाज के लिए सहयोग देने की योजना शुरु की गयी।
2012-2017- राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण अभियान के चौथे चरण की शुरुआत की गयी जिसमें संक्रमण का जिस जगह सबसे ज्यादा खतरा था उन जगहों को चिन्हित करके इसपर रोक लगाने का काम शुरु किया गया।

एचआईवी संक्रमण की चपेट में भारत

भारत सरकार के 2011-2012 के आंकडों पर नजर डालें तो हर साल तकरीबन 1.16 एचआईवी के संक्रमण के चपेट में आ रहे हैं। जिनमें 10974 लोग वयस्क है जबकि 19346 लोगों की उम्र 15 वर्ष से अधिक है। हालांकि यह संख्या पिछले वर्ष की अपेक्षा कम है लेकिन फिर भी जिस तरह से संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं वह चिंता का विषय है।

एचआईवी संक्रमति प्रदेशों की रैंकिंग

एचआईवी संक्रमण के मरीजों की सबसे अधिक संख्या आंध्र प्रदेश में है जबिक पूर्वी भारत के राज्य अन्य राज्यों की तुलना में इस संक्रमण से कम प्रभावित है। हर साल नए एचआईवी संक्रमण के मामलों के हिसाब से भारत के राज्यों की रैंकिंग इस प्रकार है।

आंध्र प्रदेश-16603
ओडिशा- 12702
झारखंड़- 9085
कर्नाटक- 9024
बिहार- 7797
उत्तर प्रदेश- 7745
पश्चिम बंगाल- 7289

वहीं गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब उत्तराखंड़ में हर साल 3000 से 7000 एचआईवी संक्रमण के मरीज सामने आते हैं। बाकि अन्य राज्यों में तीन हजार से कम संक्रमण के मामले हर साल सामने आते हैं।

एड्स से मरने वालों की संख्या पर नजर डालें तो 2011 में एड्स से संबंधित बीमीरी से 1.48 लाख लोगों की मृत्यु हो गयी। जिनमें 7 फीसदी बच्चे थे। वहीं सरकार द्वारा चलायी गयी ART स्कीम जिसमें एचआईवी से संक्रमित मरीजों का इलाज किया जाता है, उससे 29 फीसदी मरीजों की सालाना मृत्यु की दर में कमी आयी है। वहीं अगर 2007 से 2011 के आंकड़ो पर नजर डाले इस एचआईवी संक्रमण से हर साल मरने वाले लोगों में 42 फीसदी की कमी आयी है।

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