Uniform Civil Code: विधि आयोग और कार्यान्वयन पर क्या सोच रही सरकार ? कानून मंत्री ने संसद में दी जानकारी
यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 21वें विधि आयोग से समान नागरिक संहिता से संबंधित विभिन्न मुद्दों की जांच और सिफारिश का अनुरोध किया था।

Uniform Civil Code के बारे में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में बताया कि सरकार ने भारत के 21वें विधि आयोग से समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) से संबंधित विभिन्न मुद्दों की जांच करने और उस पर सिफारिशें करने का अनुरोध किया था। हालांकि, विधि आयोग का कार्यकाल चार साल पहले ही समाप्त हो चुका है।
राज्यसभा में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि 21वें विधि आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त, 2018 को समाप्त हुआ। उन्होंने बताया, विधि आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, समान नागरिक संहिता से संबंधित मामला 22वें विधि आयोग के पास विचार के लिए भेजा जा सकता है।
22वें विधि आयोग में विचार !
सरकार लॉ कमीशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के बारे में क्या सोच रहा है, इस बारे में कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, भारत सरकार ने फिलहाल समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। संसद के बजट सत्र में कानून मंत्रालय से पूछा गया था कि "क्या सरकार के पास समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित करने की कोई योजना है ?" इससे जुड़े एक सवाल पर कानून मंत्री रिजिजू ने कहा, "विधि आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, समान नागरिक संहिता (UCC) से संबंधित मामले पर 22वें विधि आयोग में विचार किया जा सकता है।
कानून मंत्री रिजिजू ने कई और सवालों के जवाब भी दिए। जिनमें अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े सवाल सबसे अहम रहे। दो सवालों पर नजर-
क्या सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने की दिशा में बढ़ रही है ?
क्या सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसा एक स्वतंत्र नियामक स्थापित करने पर विचार कर रही है ?
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दोनों सवालों पर कानून मंत्री ने संसद को सूचित किया कि सुप्रीम कोर्ट को विगत 6 जनवरी, 2023 को भेजे पत्र में सरकार ने विभिन्न न्यायिक घोषणाओं के मद्देनजर MoP को अंतिम रूप देने की जरूरत पर बल दिया है। सरकार ने अन्य बातों के साथ-साथ सुझाव दिया है कि खोज-सह- सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में मूल्यांकन समिति में भारत सरकार द्वारा नामित प्रतिनिधि शामिल होना चाहिए।
बकौल रिजिजू, सरकार ने कहा है कि उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए, समिति में भारत सरकार द्वारा नामित एक प्रतिनिधि और उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के तहत राज्य सरकार (सरकारों) के एक प्रतिनिधि को मुख्यमंत्री द्वारा नामित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, यह प्रस्तावित किया गया है कि उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए, मुख्यमंत्री द्वारा अनुशंसित नाम खोज-सह-मूल्यांकन समिति, कॉलेजियम के बाहर के वरिष्ठ न्यायाधीशों के सुझाव पर पात्र उम्मीदवारों के नामों पर भी विचार कर सकती है। प्रस्तावित सचिवालय द्वारा बनाए गए डेटाबेस (न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं) से भी नाम चुने जा सकते हैं।
उन्होंने कहा, उच्च न्यायालय कॉलेजियम खोज-सह-मूल्यांकन समिति द्वारा तैयार किए गए नामों के पैनल पर विचार-विमर्श कर सकता है और सर्वोच्च न्यायालय, मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों के उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश कर सकता है।
उपयुक्त स्तर पर कॉलेजियम उपरोक्त स्रोतों से पात्र उम्मीदवारों को चुनने के बाद प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ सरकार को प्रस्ताव भेज सकता है।
कानून और न्याय मंत्री ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 224 के तहत की जाती है। इसमें किसी जाति या वर्ग के व्यक्तियों के लिए आरक्षण के प्रावधान नहीं हैं। रिजिजू ने कहा, रिजर्वेशन के प्रावधान न होने के बावजूद सरकार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध करती रही है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजते समय, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं से संबंधित उपयुक्त उम्मीदवारों पर उचित विचार किया जाए ताकि उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति में सामाजिक विविधता सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि 1108 न्यायाधीशों की स्वीकृत पदों में उच्च न्यायालयों में महिला न्यायाधीशों की संख्या 106 है। उन्होंने बताया कि 31 जनवरी, 2023 तक हाईकोर्ट में कुल 775 न्यायाधीश कार्यरत हैं। महिला न्यायाधीशों की संख्या 9.5 प्रतिशत है। कानून मंत्री के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने मलिक मज़हर सुल्तान मामले में जनवरी 2007 में एक न्यायिक आदेश के माध्यम से अधीनस्थ अदालतों में न्यायाधीशों की भर्ती की प्रक्रिया 31 मार्च को शुरू और उसी वर्ष 31 अक्टूबर तक समाप्त होने का निर्देश दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों में बड़ी संख्या में न्यायिक रिक्तियों का स्वत: संज्ञान लेते हुए, राज्य सरकारों/संघ शासित प्रदेशों और क्षेत्राधिकार उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को न्यायिक रिक्तियों को भरने के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है।
रिजिजू ने संसद में यह भी बताया कि फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) की योजना के तहत 768 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें स्थापित की गईं। इनमें 418 पॉक्सो अदालतें शामिल हैं। इनके तहत बलात्कार और POCSO मामलों की सुनवाई और त्वरित न्याय की पहल की जा रही है।












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