अपने अंतिम दिनों में काफी भावुक रहने लगी थीं लता मंगेशकर, पिता को करने लगी थीं याद
नई दिल्ली, फरवरी 06। स्वर कोकिला लता मंगेशकर के पार्थिव शरीर को पंचतत्व में विलीन कर दिया गया है। मुंबई स्थित शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिवाजी पार्क पहुंचकर लता मंगेशकर को अंतिम विदाई दी। आपको बता दें कि लता मंगेशकर का आज सुबह तकरीबन 8 बजे मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया था और अपने अंतिम समय में लता मंगेशकर ने अपने पिता को याद किया था।

अपने अंतिम दिनों में भावुक थीं लता मंगेशकर
आपको बता दें कि लता मंगेशकर पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती थी। वॉइसओवर आर्टिस्ट हरीश भिमानी ने बताया है कि अपने अंतिम दिनों में लता मंगेशकर ने अपने पिता को याद किया था और काफी भावुक रहती थीं। हरीश को लता मंगेशकर के भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने बताया कि लता अपने अंतिम दिनों में पिता दीनानाथ मंगेशकर को याद कर रही थीं जो एक नाट्य गायक थे।

अस्पताल में दो दिन पहले मंगवाया था ईयरफोन
आपको बता दें कि अपने अंतिम दिनों में लता मंगेशकर ने पिता की रिकॉर्डिंग्स को ही सुना था और उन्हें गाने की कोशिश करती थीं। शुक्रवार को लता मंगेशकर ने अस्पताल में ईयरफोन मंगवाया था। बता दें कि लता मंगेशकर को आईसीयू में मास्क हटाने के लिए मना किया गया था, लेकिन फिर भी वो मास्क हटाकर पिता के गीतों को गुना-गुना रही थीं। गाती थीं। आपको बता दें कि लता मंगेशकर अपने पिता को अपना गुरु मानती थीं।

अपने गाने नहीं सुनती थीं लता
हरीश भिमानी बताते हैं कि लता मंगेशकर अपने गाने जब सुनती थीं तो अपनी गलती पकड़ लेती थीं और जब वो अपनी गलती पकड़ लेती थीं तो काफी दुखी हो जाती थी, इसलिए वो अपने गाने नहीं सुनती थीं। वे कहतीं कि बड़े-बड़े संगीतकार उनके गाने को सुनेंगे और कमियां निकलेगी तो जाने क्या सोचेंगे। आपको बता दें कि लता मंगेशकर पिछले एक महीने से कोरोना और निमोनिया से जूझ रही थीं।
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