122 मेडल जीत चुके बैल की बैंड-बाजे के साथ निकली अंतिम यात्रा, शामिल हुआ पूरा गांव
नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में गुरुवार को लोग एक अलग तरह की अंतिम संस्कार के गवाह बने। लोगों ने देखा कि ट्रैक्टर पर एक बैल के शव को फूलों ढका गया है और लोग उसका गाजे-बाजे के साथ अतिंम यात्रा निकाल रहे हैं। दरअसल, जिस बैल का अंतिम संस्कार किया जा रहा था वह कोई ऐसा वैसा बैल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुका था। जी हा, आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में एक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बैल की बीमारी के कारण मौत हो गई। बैल के मालिक ने उसके सम्मान में परंपरागत तरीके से उसका अंतिम संस्कार किया।

बैल की अंतिम यात्रा
बैल के मालिक कासरनेनी राजा पेशे से किसान हैं और वह अपने सभी पालतु जानवरों का ख्याल परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं। उन्होंने बताया कि, उनके सभी जानवर उनके परिवार का हिस्सा हैं इसलिए उन्होंने यह निर्णय लिया की वह अपने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बैल का बड़े स्तर पर अंतिम संस्कार करेंगे। इसके लिए उन्होंने बैल की अंतिम यात्रा भी निकाली। विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में 122 पदक जीतने वाले बैल के लिए कासरनेनी राजा ने परंपरा के अनुसार अनुष्ठान भी कराया।

जीत चुका है 122 पदक
अंतिम यात्रा के दौरान बैल के शव को एक खुली ट्रॉली में रखा गया जिसे सभी देख सकते थे, उन्होंने फूलों की माला से उसके शव को ढका। हाल ही में कासरनेनी राजा के बैल ने केसरपल्ली में पशु चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित अंतर-राज्यीय प्रतियोगिता में जानवर ने पहला स्थान हासिल किया था। कासरनेनी राजा ने बताया कि बैल उनके पास 9 वर्षों से था और उन्होंने अपने बच्चे की तरह इसकी देखभाल की।

बैंड बाजे के साथ हुआ अंतिम संस्कार
बैल के बीमार होने के बाद किसान कासरनेनी राजा ने उसका इलाज कराया और डॉक्टरों की भी मदद ली लेकिन वह उसे बचा न सके। गुरुवार को बैल का पोस्टमार्टम किया गया और उसी दिन उसका अंतिम संस्कार किया गया। बैल की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में गांव के लोग भी शामिल हुए। अपने जीवन काल में 122 मेडल जीत चुका यह बैल काफी फेमस भी था।












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