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Lalu Prasad Yadav: कोर्ट केस के कारण राजनीति पर ग्रहण, 27 साल पहले शरू हुई अदालती कार्यवाही, एक नजर

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री Lalu Prasad Yadav चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता हैं। उनके खिलाफ इतने मामले दर्ज हैं, जिनकी टाइमलाइन देखना भी खासा दिलचस्प है।

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Lalu Prasad Yadav को बिहार की राजनीति के अलावा राष्ट्रीय राजनीति का भी अहम किरदार माना जाता है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव कई अदालती मामलों में सजायाफ्ता हैं। कोर्ट से सजा मिलने के बाद लालू की राजनीति पर ग्रहण तो जरूर लगा है, लेकिन बिहार और राष्ट्रीय सियासत की चर्चा होने पर लालू का जिक्र न हो, ऐसा लगभग नामुमकिन है। कोर्ट में कुछ केस ऐसे भी हैं जिनमें लालू को जमानत मिली है, लेकिन अदालत ने लालू को निर्दोष नहीं माना है। इन मामलों की सुनवाई लंबित है। जानिए, खुद लालू और उनके परिजन किन अदालती मामलों में बरी हो चुके हैं, और कौन से ऐसे मामले हैं, जिनमें अदालत ने लालू की जमानत अर्जी स्वीकार कर उन्हें बेल दी है।

दरअसल, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के खिलाफ अदालती मामले बिहार विभाजन के बाद झारखंड की राजधानी रांची की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में हैं। इन्हें चारा घोटाला मामला भी कहा जाता है। सीबीआई की विस्तृत जांच के बाद कोर्ट ने लालू को डोरंडा कोषागार से 139.35 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का दोषी पाया। इससे पहले चारा घोटाले के चार मामलों में लालू प्रसाद को सजा हो चुकी है। अलग-अलग मामलों को मिलाकर करीब 950 करोड़ रुपये का घोटाला तत्कालीन बिहार सरकार के अलग-अलग जिलों में कोषागार से धोखाधड़ी और अवैध निकासी से संबंधित है।

मामले के मूल 170 अभियुक्तों में से 55 की मृत्यु हो चुकी है। लालू प्रसाद यादव समेत 99 आरोपियों को कोर्ट ने दोषी पाया है। करीब 28 साल पहले का यह मामला जनवरी 1996 में सामने आया था। पशुपालन विभाग में चाईबासा के तत्कालीन उपायुक्त अमित खरे की छापेमारी के बाद घोटाले की बात सामने आई। मार्च 1996 में पटना उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने जून 1997 में चार्जशीट दायर कर पहली बार लालू प्रसाद को इस मामले में आरोपी बनाया।

चार्जशीट और विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच तत्कालीन सीएम लालू को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। नवंबर, 2000 में झारखंड गठन के कारण, लालू के खिलाफ दर्ज मामला अक्टूबर 2001 में झारखंड उच्च न्यायालय में ट्रांसफर हुआ। विशेष सीबीआई अदालत में फरवरी 2002 से चारा घोटाला मामले में सुनवाई शुरू हुई।

पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को पहली सजा सितंबर 2013 में सुनाई गई। चाईबासा कोषागार के इस मामले में 37.70 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और अवैध निकासी के आरोप साबित हुए। कोर्ट के फैसले के बाद लालू को रांची जेल में भेजा गया। पांच साल की जेल के कारण लालू की राजनीति को ग्रहण लगा और उन्हें लोकसभा सदस्यता गंवानी पड़ी। बतौर राजद सांसद अयोग्य करार दिए गए लालू को पांच साल की जेल हुई, लेकिन इसी साल दिसंबर में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत भी मिल गई।

राजद सुप्रीमो की परेशानी 2017 में फिर से बढ़ी। दिसंबर 2017 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने लालू को देवघर कोषागार से 89.27 लाख रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित दूसरे घोटाले में भी दोषी ठहराया। इस मामले में कोर्ट ने साढ़े तीन साल कैद की सजा सुनाई। हाईकोर्ट में अपील के बाद लालू को अप्रैल, 2021 में भी जमानत मिली। हालांकि, करीब पांच साल बाद यानी जुलाई, 2022 में साढ़े तीन साल की आधी सजा पूरी करने के बाद लालू को एक बार फिर जमानत मिल गई।

पूर्व मुख्यमंत्री लालू को तीसरी बार सजा जनवरी 2018 में सुनाई गई। चाईबासा कोषागार से जुड़े इस मामले में 33.13 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और निकासी के आरोप साबित हुए। एक बार फिर पांच साल कैद की सजा सुनाई गई। दो महीने बाद, मार्च 2018 में सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू को धोखाधड़ी के मामले में साजिश और भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत दोषी ठहराया। दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 की अवधि में दुमका कोषागार से जुड़े मामले में लालू को अलग-अलग धाराओं के तहत सात-सात साल की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सजाएं अलग-अलग चलेंगी, यानी कुल 14 साल की सजा सुनाई गई। कोर्ट के फैसले के बाद लालू को जेल में डाल दिया गया। 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अप्रैल, 2021 में लालू को झारखंड हाईकोर्ट से बेल मिल गई।

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    अलग-अलग मामलों में दोषी पाए जाने के बाद लालू को कई मामलों में राहत भी मिली। सेहत से जुड़े कारणों के आधार पर लालू को जमानत पर रिहा किया गया। कई मामलों में लालू ने कोर्ट से बरी किए जाने की अपील भी की। अप्रैल 2000 में लालू के साथ उनकी पत्नी राबड़ी को भी सीबीआई ने आरोपी बनाया। हालांकि, सरेंडर के बाद राबड़ी को जमानत मिल गई, जबकि लालू की बेल एप्लिकेशन खारिज हो गई, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। दिसंबर, 2006 में लालू और राबड़ी को आय से अधिक संपत्ति मामले में भी राहत मिली। अदालत ने सीबीआई की ओर से दायर मामलों में दोनों को बरी कर दिया।

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