लालू को जमानत, बिहार में नए समीकरण के आसार

नई दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद लालू प्रसाद के परिवार जनों और समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने आतिशबाजी की और मिठाइयां बांटी और पटना सहित बिहार में कहीं-कहीं होली मनाई।
लालू के पुराने दोस्तों कांग्रेस और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) और यहां तक कि 'परम शत्रु' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी राजद प्रमुख को मिली जमानत का स्वागत किया है। अदालत के फैसले पर हालांकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने टिप्पणी करने से मना कर दिया, लेकिन उनकी पार्टी जनता दल युनाइटेड (जदयू) ने इसे नियमित न्यायिक प्रक्रिया बताया।
लालू के जमानत मिलने पर उनकी पत्नी राबड़ी ने प्रसन्नता जाहिर की और कहा कि सुबह में ही उन्होंने लालू के घर आने का सपना देखा था, तभी उन्हें विश्वास हो गया था कि लालूजी को लेकर कुछ शुभ समाचार आएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत देकर उनके सपने को सच साबित कर दिया।
उन्होंने कहा कि अब परिवार सहित बिहार के लोग उनके पटना आने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी धर्मनिरपेक्ष दलों को एक मंच पर आना चाहिए। राबड़ी ने कहा कि जिन्होंने साजिश के तहत जेल भिजवाने का काम किया था, उनकी कलई खुल गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
उन्होंने राजद में टूट की संभावना से इंकार किया और कहा कि राजद जब अबतक नहीं टूटा तो अब क्या टूटेगा, अब तो लालूजी आ गए? लालू के आने से राजद और मजबूत होगी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की किसी तरह की हवा होने से भी इनकार किया।
लालू के पुत्र और राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि विरोधियों की साजिश के तहत उनको (लालू) फंसाया गया। उन्होंने कहा कि लालू के आने के कारण सांप्रदायिक शक्तियों में घबराहट होने लगी है। यादव ने कहा कि लालू पूरे राज्य में जाएंगे और धर्मनिरपेक्ष शक्तियों को एकजुट करेंगे।
लालू प्रसाद को घर लाने के लिए उनके दोनों बेटे रांची जाएंगे।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.सतशिवम और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की खंडपीठ ने लालू प्रसाद को जमानत देते हुए कहा कि इस मामले में अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।
मामले के 44 आरोपियों में से 37 को पहले ही जमानत मिल चुकी है और छह अन्य की अर्जी निचली अदालत में विचाराधीन है।
न्यायालय ने यह उल्लेख किया कि लालू प्रसाद को पांच वर्ष कैद की सजा दी गई है जिसमें से वे दो अलग-अलग चरणों में एक वर्ष कैद काट चुके हैं। जिसमें सुनवाई के दौरान 10 महीने का कारावास और दोषी ठहराए और सजा सुनाए जाने के बाद दो महीने का कारावास शामिल है।
लालू प्रसाद को रांची स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने चारा घोटाला मामले में पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई थी। उन्हें 25 लाख रुपये जुर्माना भी किया गया था।
निचली अदालत ने उनके अलावा बिहार के एक और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र और 42 अन्य को चाइबासा कोषागार से 37.7 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले में सजा दी है। यह मामला अविभाजित बिहार का है और निकासी मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में की गई।
सीबीआई ने लालू की जमानत का विरोध नहीं किया।
लालू प्रसाद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने शीर्ष अदालत से कहा कि पूर्व रेल मंत्री एक वर्ष कैद काट चुके हैं और झारखंड उच्च न्यायालय में उनकी याचिका पर फैसला आने में करीब सात से आठ वर्ष का समय लगेगा।
उन्होंने कहा कि अन्य लोगों को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।
लालू प्रसाद ने झारखंड उच्च न्यायालय के 31 अक्टूबर के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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