Lal Bahadur Shastri Jayanti: छोटे कद के शास्त्रीजी की महान शख्सियत के 5 रोचक किस्से
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2024: आज देश के तीसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 120वीं जयंती मनाई जा रही है। 2 अक्टूबर,1904 को यूपी में वाराणासी के पास मुगलसराय में जन्मे शास्त्रीजी को जब भी याद किया जाता है, तो उनकी सादगी, विनम्रता, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण के साथ ही उनके चट्टान की तरह बुलंद हौसलों की स्मृतियां ताजा हो जाती हैं।
दो बातों के लिए उनके अमिट योगदान को देश कभी नहीं भुला सकता। पहला, 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनके कुशल नेतृत्व क्षमता और उनका वह आदर्श नारा, जो अब भारत के लोगों के लिए एक पवित्र मंत्र बन गया है- 'जय जवान, जय किसान'। ठीक इसी तरह 1966 में रूस के ताशकंद में संदिग्ध परिस्थितियों में हुआ उनका असामयिक निधन भी सदा के लिए बहस का विषय बन चुका है।

गुणों के खान थे लाल बहादुर शास्त्री
लाल बहादुर शास्त्री की कद-काठी मात्र पांच फीट से कुछ अधिक थी। लेकिन, स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी पद पर रहते हुए उन्होंने राजनीतिक सदाचार और ईमानदारी के साथ-साथ फौलादी इरादों वाली जो उच्चता कायम की, उसे न पहले और न बाद में कोई छू पाया। सादा जीवन, सौम्य व्यक्तित्व, सत्यनिष्ठा, बेदाग छवि, बेबाक सोच और उच्च विचार ये सारे के सारे गुण अकेले शास्त्रीजी में ही भरे पड़े थे।
स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही के तौर पर लाल बहादुर शास्त्री का सार्वजनिक जीवन यूं तो उनकी किशोरावस्था से भी पहले शुरू हो गया था। लेकिन, जब आजाद भारत में उन्हें सरकार की बड़ी जिम्मेदारियां निभाने का मौका मिला, तब आम जनता भी उनकी महान शख्सियत से रूबरू होने लगी।
ट्रैफिक में फंसे रहे, लेकिन पायलट गाड़ी नहीं चलाने दी
बात उन दिनों की है, जब शास्त्रीजी के पास देश के गृह मंत्रालय का जिम्मा था। वे सरकारी कार्य से कलकत्ता (कोलकाता) गए थे। अपना उत्तरदायित्व निभाने में इस तरह से लीन रह गए कि उन्हें अंदाजा ही नहीं रहा कि एयरपोर्ट निकलने का वक्त हो चुका था।
दमदम एयरपोर्ट दूर था। शाम हो चुकी थी। कलकत्ता की ट्रैफिक थी। भारत के गृहमंत्री भी उसी जाम में फंसे थे। पुलिस कमिश्नर ने सोचा कि बस एक सायरन वाली एस्कॉर्ट आगे कर देते हैं, फिर शास्त्रीजी की फ्लाइट नहीं छूटेगी।
लेकिन, उन्हें भी पता चल गया कि कार में बैठे उस दुबले-पतले मंत्रीजी की सोच आसमान से भी ऊंची थी। उन्होंने साफ मना कर दिया। क्योंकि, उन्हें लगा कि ऐसा करेंगे तो लोगों को लगेगा कि कोई बड़ा व्यक्ति जा रहा है।
थर्ड क्लास व्यक्ति के लिए फर्स्ट क्लास इंतजाम!
आगे चलकर शास्त्रीजी को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला। उन्हें देश के प्रधानमंत्री की हैसियत से एक राज्य के दौरे पर जाना था। लेकिन, ऐसी आवश्यकता आ गई कि उन्हें अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी। संबंधित प्रदेश के मुख्यमंत्री को लगा कि वह लोगों से क्या कहेंगे कि शास्त्रीजी क्यों नहीं आए।
उन्होंने फोन करके प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि 'सर, कृप्या करके अपना दौरा रद्द मत कीजिए।' भावना में बहकर सीएम ने कह दिया कि उनके लिए फर्स्ट क्लास की व्यवस्था की गई है। इसपर देश के प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि 'आपने एक थर्ड क्लास इंसान के लिए फर्स्ट क्लास व्यवस्था क्यों की है?' मुख्यमंत्री की तंद्रा टूट गई, प्रधानमंत्री तो लाल बहादुर शास्त्री बन चुके हैं!
एक शाम खाना छोड़ दें!
1965 में शास्त्रीजी के प्रधानमंत्री रहते पाकिस्तान ने युद्ध छेड़ दी। वह ऐसा दौर था, जब देश में खाद्य संकट भी छाया हुआ था। अमेरिका आपूर्ति रोकने की दादागीरी अलग दिखाने की कोशिश कर रहा था।
शास्त्रीजी को अचानक क्या सूझा कि पत्नी को कह दिया कि 'एक सप्ताह तक शाम को चूल्हा न जलाएं।' उन्होंने सिर्फ अपने परिवार के बड़े सदस्यों से एक शाम भूखे रहने को कहा और बच्चों के लिए निश्चित तौर पर दूध और फल का इंतजाम रखने को कह दिया।
जब वे आश्वस्त हो गए कि उनका परिवार एक शाम खाना नहीं खाकर भी काम चला सकता है तो उन्होंने रेडियो पर संदेश देकर देशवासियों से अपील की कि संकट के समय में सप्ताह में कम से कम एक बार शाम का खाना छोड़ने का प्रयास करें। उनकी अपील का व्यापक असर हुआ। भोजनालों ने भी उनकी अपील को सिर-आंखों पर ले लिया।
तब जाकर चैन की नींद सो पाए!
एक बार प्रधानमंत्री शास्त्री को पता चला की उनकी सरकारी कार का उपयोग उनके बच्चों ने कर लिया है। शास्त्रीजी को इससे बहुत ही अधिक असहजता हुई। उन्हें अच्छा नहीं लगा। उन्होंने तय सरकारी दर पर और परिवार के सदस्यों की ओर से कार से इस्तेमाल की गई दूरी के हिसाब से पाई-पाई का भुगतान सरकारी खजाने में कर दिया, तब जाकर कहीं वे चैन की नींद सो पाए।
संपत्ति के नाम पर छोड़ी लोन पर ली हुई सेकंड हैंड फिएट कार!
प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल बहुत ही छोटा रहा, क्योंकि ताशकंद में बहुत ही संदिग्ध परिस्थितियों में वह देशवासियों को सदा के लिए अलविदा कह दए। कहा जाता है कि इतने बड़े नेता के निधन के बाद पता चला कि उनके पास अपने नाम की न तो कोई जमीन है और न ही कोई अपना घर।
उनके नाम पर एक फिएट कार थी और वह भी सेकंड हैंड, जिसपर भी उन्होंने लोन ले रखा था। यह कार भी उन्होंने परिवार की ओर से सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल के बाद खरीदी थी, ताकि फिर से वैसी नौबत का सामना न करना पड़ जाए। देहांत के बाद उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने अपनी फैमिली पेंशन से कार का लोन चुकता किया।
-
US Iran War: ईरान के हमलों के आगे बेबस Trump, हटाना पड़ा 100 साल पुराना कानून, अमेरिका में तेल-गैस की किल्लत? -
Iran Vs America: ईरान के बाद अब चीन पर कहर बनकर टूटेंगे ट्रंप! अमेरिकी रिपोर्ट के खुलासे से हड़कंप -
Parliament session: 'मोहब्बत हमसे, शादी मोदी से', राज्यसभा में बोले खड़गे, वायरल हुआ PM का रिएक्शन -
'वो मर्द शादीशुदा था, मैं उसके प्यार में पागल थी', फिर मिला ऐसा दर्द, 83 की उम्र में कुंवारी हैं ये एक्ट्रेस -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच लगातार गिर रहे सोने के भाव, अब 10 ग्राम की इतनी रह गई है कीमत, नए रेट -
UGC के नए नियमों पर आज फैसले की घड़ी! केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में देगी सफाई -
Saudi Arabia Eid Ul Fitr 2026 : सऊदी अरब में 20 मार्च को मनाई जाएगी ईद, भारत में कब दिखेगा चांद? -
Gold Rate Today: थमी सोने की रफ्तार, कीमतों में जबरदस्त गिरावट! खरीददारी से पहले चेक कर लें लेटेस्ट रेट -
Silver Price Today: चांदी की कीमतें क्रैश! मार्च महीने में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट, कितना हुआ सिल्वर का रेट? -
Iran US War: 'खुद भी डूबेंगे सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे', ट्रंप पर भड़के बक्शी, कहा- Trump ने जनता से झूठ बोला -
PNG Connection: गैस संकट के बीच सबसे बड़ी गुड न्यूज! सिर्फ 24 घंटे में खत्म होगी किल्लत, सरकार ने उठाया ये कदम -
LPG Oil Crisis: हॉर्मुज में तैर रहे हैं 3.2 लाख टन गैस, भारत पहुंचा तो कितने सिलेंडर भरे जा सकते हैं












Click it and Unblock the Notifications